Tuesday , 19 September 2017
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ऐसा हुआ तो जीवन की समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी

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ऐसा हुआ तो जीवन की समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी

ऐसा हुआ तो जीवन की समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी

बात करते हैं उन इलाकों की जहां अमूमन जबर्दस्त तूफान आया करते हैं। ऐसे ही एक तूफान में पानी के तेज बहाव से एक बड़ा पत्थर टूट कर सड़क के बीचों-बीच आ गिरा।
तभी एक व्यक्ति वहां आया, जहां पत्थर गिरा था, वहां वह रुक गया और किसी के आने की प्रतीक्षा करने लगा। थोड़ी देर बाद एक दूसरा व्यक्ति अपनी घोड़ागाड़ी से वहां आ पहुंचा।
उसने पहले व्यक्ति से पूछा कि तुम यहां सड़क के बीच में हट जाओ ताकि मैं यहां से गुजर सकूं। पहले व्यक्ति ने कहा- ‘तुम्हें जल्दी है तो पहले वहां जाकर यह चट्टान हटाओ। पहले व्यक्ति ने कहा क्यों न किसी शक्तिशाली आदमी की प्रतीक्षा करें। वही हमारा रास्ता साफ करेगा।’
दोनों साथ-साथ बैठ गए। तभी एक और घोड़ागाड़ी वाला वहां आ पहुंचा। वह काफी बूढ़ा था। जब उसे पता चला कि दोनों यहां क्यों खड़े हैं तो वह पत्थर के इर्द-गिर्द चहलकदमी करने लगा। समय बीतता रहा। अब वहां एक
काफिला इकट्ठा हो गया। इतने में गेरुआ वस्त्र पहने एक संन्यासी वहां आ पहुंचे। वे स्वामी विवेकानंद के गुरुभाई एवं रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी अखंडानंद थे।
वह इन दिनों अपनी एकांत साधना के लिए यहां आए हुए थे। वे सब को परेशान देख बोले- तुम लोग अपनी जवाबदेही दूसरों पर डालने की कोशिश मत करो। आओ हम सभी मिलकर प्रयास करते हैं।
स्वामी जी ने सबसे पहले पत्थर हटाना शुरू किया। उन्हें देख दूसरों ने भी कोशिश की। और इस तरह पत्थर हट गया।
स्वामी जी ने कहा-हम हर समय दूसरों का मुंह देखते रहते हैं।हमें लगता है कोई आकर हमारी समस्या हल करेगा। कोई आगे बढ़कर खुद पहल नहीं करता। अगर हम ऐसा करने लगें तो जीवन की समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी।

In English

Talk about those areas where there is a tremendous storm. In such a hurricane, a huge rock breaks down through the middle of the road, after the rapid drainage of water.
Then a person came there, where the stone had fallen, he stopped there and started waiting for someone to come. After a while a second person reached there with his carriage.
He asked the first person that you go here in the middle of the road so that I can pass through here. The first person said – ‘If you are in a hurry then first remove it and then remove this rock. The first person said why not wait for a powerful man. That will clear our way. ‘
The two sat together. Then there was another horse carrier coming there. He was quite old. When he came to know why the two were standing here, he started strolling around the stone. Time kept on passing by Now there one
The convoy got together. In this way a monk who was dressed in garruya came there. He was the master of Swami Vivekananda and the disciple Swami Akhandanand of Ramkrishna Paramhans.
He had been here for his untiring spiritual practice these days. They all look disturbed- you do not try to put your accountability on others. Let us all strive together.
Swamiji first started removing the stone. Seeing them, others also tried. And this way the stone was removed.
Swamiji said – we see others’ mouths all the time. We feel that someone will come and solve our problem. Nobody moves ahead and does not take initiative himself. If we start doing this then the problems of life will be resolved automatically.

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