Sunday , 18 February 2018
Latest Happenings
Home » Mahatma Gandhi » गांधीजी को यूं ही नहीं कहते हैं महात्मा

गांधीजी को यूं ही नहीं कहते हैं महात्मा

%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%A4

%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%A4

 

महात्मा गांधी जी छुआछूत के खिलाफ थे। एक बार उन्होंने अपने आश्रम में दलित और सवर्ण के विवाह की अनुमति दी। हालांकि उस समय भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की अगुआई कर रही कांग्रेस गांधी जी द्वारा दलितों के सामाजिक उत्थान हेतु चलाये गये इन कदमों से सहमति नहीं रखती थी क्योंकि उसका मानना था कि ‘सामाजिक सुधार’ को ‘स्वतंत्रता आन्दोलन’ से पृथक रखा जाना चाहिए।

कांग्रेस के इस रवैये के कारण डॉ भीमराव अम्बेडकर अंग्रेजी राज का साथ दे रहे थे और ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के समय वे वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य होते थे इतना ही नहीं वे गांधी के प्रखर आलोचक भी थे।

अपने इस व्यवहार के पीछे उनका मानना था कि कांग्रेस के ब्राह्मण बाहुल्य ढांचे से दलितों का भला नहीं हो सकता था। 1947 में जब देश स्वतंत्र हुआ तो डॉ. अंबेडकर के इसी प्रकार के विचारों के चलते कांग्रेस के नेतागण विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल उन्हें अपने पहले मंत्रिमंडल में साथ रखने को तैयार न थे।

लेकिन गांधी जी ने हस्तक्षेप करके यह समझाने का प्रयास किया कि कि आजादी कांग्रेस को नहीं मिली है बल्कि देश को मिली है इसलिए पहले मंत्रिमंडल में सबसे अच्छी प्रतिभाओं को शामिल किया जाना चाहिये चाहे वह किसी भी दल अथवा समुदाय की क्यों न हो।

गांधी के इस सकारात्मक हस्तक्षेप के बाद ही डॉ. अम्बेडकर देश के पहले कानून मंत्री बन सके थे। गांधी जी के लिये मन में किसी के लिये बैर अथवा पूर्वाग्रह नहीं था इसीलिये गांधीजी को बड़े दिल वाला भी कहा जाता है।

Hindi to English

Mahatma Gandhi was against the untouchability. Once he allowed the marriage of Dalits and upper castes in his ashram. Though the Congress, led by the Indian independence movement at the time, did not agree with Gandhiji’s initiatives for social upliftment of the Dalits because he believed that ‘social reform’ should be kept separate from the ‘freedom movement’.

Due to this attitude of the Congress, Dr. Bhimrao Ambedkar was cooperating with the English Raj and at the time of ‘Quit India Movement’ he used to be a member of the Executive Council of Viceroy, and not only that he was also an intense critic of Gandhi.

Behind his behavior, he believed that the Brahmin Bahuuli structure of the Congress could not have been better for the Dalits. Due to similar views of Dr. Ambedkar in 1947, when the country became independent, Congress leaders, especially Jawaharlal Nehru and Sardar Patel, were not ready to accompany them in their first cabinet.

But Gandhiji tried to explain by interfering that the freedom was not given to the Congress but the country has got it, hence the best talent should be included in the first cabinet, even if it is not of any party or community.

Only after Gandhi’s positive intervention could Dr. Ambedkar become the first law minister of the country. For Gandhiji, there was no bias or prejudice for anybody in the mind, so Gandhiji is also called a big hearted person.

Comments

comments