Saturday , 20 January 2018
Latest Happenings
Home » Gyan Ganga » Bhajan/Aarti / Mantra/ Chalisa Lyrics » रे मन हरि सुमिरन कर लीजै

रे मन हरि सुमिरन कर लीजै

%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%88

%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%88

मंगल भवन अमंगल हारी
द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी

रे मन, हरि सुमिरन कर लीजै ।
हरि सुमिरन कर लीजै ।
हरि सुमिरन कर लीजै ।

हरिको नाम प्रेमसों जपिये, हरिरस रसना पीजै ।
हरिगुन गाइय, सुनिय निरंतर, हरि-चरननि चित दीजै ॥

हरि-भगतनकी सरन ग्रहन करि, हरिसँग प्रीति करीजै ।
हरि-सम हरि जन समुझि मनहिं मन तिनकौ सेवन कीजै ॥

हरि केहि बिधिसों हमसों रीझै, सो ही प्रश्न करीजै ।
हरि-जन हरिमारग पहिचानै, अनुमति देहिं सो कीजै ॥

हरिहित खाइय, पहिरिय हरिहित, हरिहित करम करीजै ।
हरि-हित हरि-सन सब जग सेइय, हरिहित मरिये जीजै ॥

wish4me

Comments

comments