Sunday , 18 February 2018
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मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती एक दुःख भरी कहानी

a-sad-story-shaking-human-sensations

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मैं थक-हार कर काम से घर वापस जा रहा था। कार में शीशे बंद होते हुए भी..जाने कहाँ से ठंडी-ठंडी हवा अंदर आ रही थी…मैं उस सुराख को ढूंढने की कोशिश करने लगा..पर नाकामयाब रहा।

कड़ाके की ठण्ड में  आधे घंटे की ड्राइव के बाद मैं घर पहुंचा…

रात के 12 बज चुके थे,  मैं घर के बाहर कार से आवाज देने लगा….बहुत देर हॉर्न भी बजाया…शायद सब सो चुके थे…

10 मिनट बाद खुद ही उतर कर गेट खोला….सर्द रात के सन्नाटे में मेरे जूतों की आवाज़ साफ़ सुनी जा सकती थी…

कार अन्दर कर जब दुबारा गेट बंद करने लगा तभी मैंने देखा एक 8-10 साल का बच्चा, अपने कुत्ते के साथ मेरे घर के सामने फुटपाथ पर सो रहा है… वह एक अधफटी चादर ओढ़े हुए था …

उसको देख कर मैंने उसकी ठण्ड महसूस करने की कोशिश की तो एकदम सकपका गया..

मैंने Monte Carlo की महंगी जेकेट पहनी हुई थी फिर भी मैं ठण्ड को कोस रहा था…और बेचारा वो बच्चा…मैं उसके बारे में सोच ही रहा था कि इतने में वो कुत्ता बच्चे की चादर छोड़  मेरी कार के नीचे आ कर सो गया।

मेरी कार का इंजन गरम था…शयद उसकी गरमाहट कुत्ते को सुकून दे रही थी…

फिर मैंने कुत्ते की भागने की बजाय उसे वहीं सोने दिया…और बिना अधिक आहट किये पीछे का ताला खोल घर में घुस गया… सब के सब सो रहे थे….मैं चुप-चाप अपने कमरे में चला गया।

जैसे ही मैंने सोने के लिए रजाई उठाई…उस लड़के का ख्याल मन आया…सोचा मैं कितना स्वार्थी हूँ….मेरे पास विकल्प के तौर पर कम्बल ,चादर ,रजाई सब थे… पर उस बच्चे के पास एक अधफटी चादर भर थी… फिर भी वो बच्चा उस अधफटी चादर को भी कुत्ते के साथ बाँट कर सो रहा था और मुझे घर में फ़ालतू पड़े कम्बल और चादर भी किसी को देना गवारा नहीं था…

यही सोचते-सोचते ना जाने कब मेरी आँख लग गयी ….अगले दिन सुबह उठा तो देखा घर के बहार भीड़ लगी हुई थी..

बाहर निकला तो किसी को बोलते सुना-

अरे वो चाय बेचने वाला सोनू कल रात ठण्ड से मर गया..

मेरी पलके कांपी और एक आंसू की बूंद मेरी आँख से छलक गयी..उस बच्चे की मौत से किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा…बस वो कुत्ता अपने नन्हे दोस्त के बगल में गुमसुम बैठा था….मानो उसे उठाने की कोशिश कर रहा हो!

स्तों, ये कहानी सिर्फ एक कहानी नहीं ये आज के इंसान की सच्चाई है। मानव से अगर मानवता चली जाए तो वो मानव नहीं रहता दानव बन जाता है…और शायद हममें से ज्यादातर लोग दानव बन चुके हैं। हम अपने लिए पैदा होते हैं….अपने लिए जीते हैं और अपने लिए ही मर जाते हैं….ये भी कोई जीना हुआ!

चलिए एक बार फिर से मानव बनने का प्रयास करते हैं…चलिए अपने घरों में बेकार पड़े कपड़े ज़रूरतमंदों के देते हैं…चलिए…कुछ गरीबों को खाना खिलाते हैं….चलिए….किसी गरीब बच्चे को पढ़ाने का संकल्प लेते हैं….चलिए एक बार फिर से मानव बनते हैं!

धन्यवाद!

Translate into Hindi to English

I was tired of going back home from work. Even when the glass was locked in the car … know where the cold-cold air was coming in. I started trying to find the hole … but failed.

After half an hour’s drive in the cold winter, I reached home …
It was 12 o’clock in the night, I started voicing from the car outside the house …. Also played horn a lot … maybe everyone had slept …

After 10 minutes, I got off the gate myself …. In the night of the night, the sound of my shoes could be heard …

When I started to shut the gate again, I saw an 8-10 year old child, sleeping on the sidewalk in front of my house … he was wearing a blank sheet …

Seeing him, I tried to feel his coldness, then he was very scared.

I was worn by Monte Carlo’s expensive jacket, still I was cursing cold … and that poor child … I was thinking about it that the dog left the bed sheet and slept under my car.

My car’s engine was hot … Shayyat’s warmth was comforting the dog …

Then instead of fleeing the dog, he let it sleep there … and without any more astonishment, the lock in the back locked in the house … all of them were sleeping …. I went quietly in my room.

As soon as I took the quilt for sleeping … the idea of ​​that boy came … I thought how selfish I am …. I had a blanket, sheet, quilt as an alternative … but that child had a blank sheet filled … yet The child was sleeping with that blank sheet, sharing it with the dog and I was not able to give some blankets and sheets in the house to anyone …

When I do not think like this, I have an eye …. The next morning I got up and saw the crowd outside the house.

When you got out, you heard someone say-

Hey Sonu, who sells tea, died last night.

My pillows and a tear drop dried up from my eyes .. No one had any difference with the death of that child … just that dog was sitting beside his younger friend … I’m trying to raise him!

Stories, this story is not just a story, it’s the truth of today’s human being. If humanity goes away from human beings, then humans do not become monsters … and perhaps most of us have become demons. We are born for ourselves …. Live for us and die for ourselves …. Someone has lived this too!

Let’s try to become a human again … Let us give clothes for the needy in the homes of the needy … let us … feed some poor people … Come on …. They take the resolve to teach a poor child … They become human again!

Thanks!

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