Thursday , 9 February 2017
Latest Happenings
Home » Gyan Ganga » Religion Information » Hindu » अजा एकादशी

अजा एकादशी

aja-ekadasi-katha

aja-ekadasi-katha

Aja Eka Dasi

Aja Eka Dasi

भगवान श्री राम के वंश में हरिश्चन्द्र नाम के एक राजा हुए थे। राजा अपनी सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए प्रसिद्घ थे। एक बार देवताओं ने इनकी परीक्षा लेने की योजना बनाई। राजा ने स्वप्न में देखा कि ऋषि विश्ववामित्र को उन्होंने अपना राजपाट दान कर दिया है। सुबह विश्वामित्र वास्तव में उनके द्वार पर आकर कहने लगे तुमने स्वप्न में मुझे अपना राज्य दान कर दिया।

राजा ने सत्यनिष्ठ व्रत का पालन करते हुए संपूर्ण राज्य विश्वामित्र को सौंप दिया। दान के लिए दक्षिणा चुकाने हेतु राजा हरिश्चन्द्र को पूर्व जन्म के कर्म फल के कारण पत्नी, बेटा एवं खुद को बेचना पड़ा। हरिश्चन्द्र को एक डोम ने खरीद लिया जो श्मशान भूमि में लोगों के दाह संस्कारा का काम करवाता था।

डोम ने राजा हरिश्चन्द्र को श्मशान भूमि में दाह संस्कार के लिए कर वसूली का काम दे दिया। इसके बावजूद सत्यनिष्ठा से राजा विचलित नहीं हुए। एक दिन भाग्यवश गौतम मुनि से इनकी भेंट हुई। गौतम मुनि ने राजा से कहा कि हे राजन पूर्व जन्म के कर्मों के कारण आपको यह कष्टमय दिन देखना पड़ रहा है।

आप भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी जिसका नाम अजा एकादशी है उस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करें और रात्रि में जागरण करते हुए भगवान का ध्यान कीजिए आपको कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी। राजा ने ऋषि के बताए नियम के अनुसार अजा एकादशी का व्रत किया।

सितम्बर माह का राशिफल

इसी दिन इनके पुत्र को एक सांप ने काट लिया और मरे हुए पुत्र को लेकर इनकी पत्नी श्मशान में दाह संस्कार के लिए आई। राजा हरिश्चन्द्र ने सत्यधर्म का पालन करते हुए पत्नी से भी पुत्र के दाह संस्कार हेतु कर मांगा। इनकी पत्नी के पास कर चुकाने के लिए धन नहीं था इसलिए उसने अपनी सारी का आधा हिस्सा फाड़कर राजा का दे दिया।

राजा ने जैसे ही सारी का टुकड़ा अपने हाथ में लिया आसमान से फूलों की वर्षा होने लगी। देवगण राजा हरिश्चन्द्र की जयजयकार करने लगे। इन्द्र ने कहा कि हे राजन् आप सत्यनिष्ठ व्रत की परीक्षा में सफल हुए। आप अपना राज्य स्वीकार कीजिए।

 

अजा एकादशी व्रत विधि
जिस अजा एकादशी के व्रत से राजा हरिश्चन्द्र के पूर्व जन्म के पाप कट गए और खोया हुए राज्य हुआ पुनः प्राप्त हुआ वह अजा एकादशी व्रत इस वर्ष 1 सितम्बर को है। जो व्यक्ति इस व्रत को रखना चाहते हैं उन्हें दशमी तिथि को सात्विक भोजन करना चाहिए ताकि व्रत के दौरान मन शुद्घ रहे।

एकादशी के दिन सुबह सूर्योदय के समय स्नान ध्यान करके भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाकर, फलों तथा फूलों से भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। भगवान की पूजा के बाद विष्णु सहस्रनाम अथवा गीता का पाठ करना चाहिए।

व्रती के लिए दिन में निराहार एवं निर्जल रहने का विधान है। लेकिन शास्त्र यह भी कहता है कि बीमार और बच्चे फलाहार कर सकते हैं।

सामान्य स्थिति में रात्रि में भगवान की पूजा के बाद जल और फल ग्रहण कर सकते हैं। इस व्रत में रात्रि जागरण करने का बड़ा महत्व है। द्वादशी तिथि के दिन प्रातः ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद स्वयं भोजन करना चाहिए। यह ध्यान रखें कि द्वादशी के दिन बैंगन नहीं खाएं।

अजा एकादशी का पुण्य


पुराणों में बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रद्घापूर्वक अजा एकादशी का व्रत रखता है उसके पूर्व जन्म के पाप कट जाते हैं। इस जन्म में सुख-समृद्घि की प्राप्ति होती है। अजा एकादशी के व्रत से अश्वमेघ यज्ञ करने के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। मृत्यु के पश्चात व्यक्ति उत्तम लोक में स्थान प्राप्त करता है।

 

Comments

comments