Wednesday , 13 September 2017
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एक और कहानी

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My grandmother was less surprised at this and my friend more

लस्सी का ऑर्डर देकर हम सब आराम से बैठकर एक दूसरे की खिंचाई मे लगे ही थे कि एक लगभग 70-75 साल की माताजी कुछ पैसे मांगते हुए मेरे सामने हाथ फैलाकर खड़ी हो गईं उनकी कमर झुकी हुई थी चेहरे की झुर्रियों मे भूख तैर रही थी आंखें भीतर को धंसी हुई किन्तु सजल थीं उनको देखकर मन मे ना जाने क्या आया कि मैने जेब मे सिक्के निकालने के लिए डाला हुआ हाथ वापस खींचते हुए उनसे पूछ लिया

दादी लस्सी पिहौ का
मेरी इस बात पर दादी कम अचंभित हुईं और मेरे मित्र अधिक क्योंकि अगर मैं उनको पैसे देता तो बस 2-4-5 रुपए ही देता लेकिन लस्सी तो 35 रुपए की एक है इसलिए लस्सी पिलाने से मेरे गरीब हो जाने की और उन दादी के मुझे ठग कर अमीर हो जाने की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई थी

दादी ने सकुचाते हुए हामी भरी और अपने पास जो मांग कर जमा किए हुए 6-7 रुपए थे वो अपने कांपते हाथों से मेरी ओर बढ़ाए .. मुझे कुछ समझ नही आया तो मैने उनसे पूछा ये काहे के लिए इनका मिलाई के पियाइ देओ पूत भावुक तो मैं उनको देखकर ही हो गया था रही बची कसर उनकी इस बात ने पूरी कर दी

एकाएक आंखें छलछला आईं और भरभराए हुए गले से मैने दुकान वाले से एक लस्सी बढ़ाने को कहा उन्होने अपने पैसे वापस मुट्ठी मे बंद कर लिए और पास ही जमीन पर बैठ गईं अब मुझे वास्तविकता मे अपनी लाचारी का अनुभव हुआ क्योंकि मैं वहां पर मौजूद दुकानदार अपने ही दोस्तों और अन्य कई ग्राहकों की वजह से उनको कुर्सी पर बैठने के लिए ना कह सका

डर था कि कहीं कोई टोक ना दे कहीं किसी को एक भीख मांगने वाली बूढ़ी महिला के उनके बराबर मे बैठ जाने पर आपत्ति ना हो लेकिन वो कुर्सी जिसपर मैं बैठा था मुझे काट रही थी
लस्सी कुल्लड़ों मे भरकर हम लोगों के हाथों मे आते ही मैं अपना कुल्लड़ पकड़कर दादी के पड़ोस मे ही जमीन पर बैठ गया

क्योंकि ये करने के लिए मैं स्वतंत्र था इससे किसी को आपत्ति नही हो सकती हां ! मेरे दोस्तों ने मुझे एक पल को घूरा लेकिन वो कुछ कहते उससे पहले ही दुकान के मालिक ने आगे बढ़कर दादी को उठाकर कुर्सी पर बिठाया और मेरी ओर मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर कहा

ऊपर बैठ जाइए साहब अब सबके हाथों मे लस्सी के कुल्लड़ और होठों पर मुस्कुराहट थी बस एक वो दादी ही थीं जिनकी आंखों मे तृप्ति के आंसूं होंठों पर मलाई के कुछ अंश और सैकड़ों दुआएं थीं
ना जाने क्यों जब कभी हमें 10-20-50 रुपए किसी भूखे गरीब को देने या उसपर खर्च करने होते हैं तो वो हमें बहुत ज्यादा लगते हैं लेकिन सोचिए कभी कि क्या वो चंद रुपए किसी के मन को तृप्त करने से अधिक कीमती हैं ?
क्या उन रुपयों को बीयर , सिगरेट ,पर खर्च कर दुआएं खरीदी जा सकती हैं ?
दोस्तों

जब कभी अवसर मिले अच्छे काम करते रहें भले ही कोई अभी आपका साथ ना दे !

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By ordering the lassi, we were all sitting comfortably in one another’s house, asking for an almost 70-75 year old mother, who, after asking for some money, stood up in front of me. Her waist was leaning, her waist was leaning, Hunger was floating in the wrinkles of the face.

Eyes blazed in the inner, but they were soaked. Seeing them, I did not know what to do in the mind that when I pulled back the hand inserted in the pocket to ask for it, then ask them.

Grandma lassi piho ka
My grandmother was less surprised at this and my friend more .. Because if I give money to her, then she should give only 2-4-5 rupees but the lassi is one of the 35 rupees, so because of lassi I should become poor and those grandmothers I was very much more likely to become rich by cheating!

The grandmother took a swing and got the demand of Rs 6-7 deposited by her with her trembling hands to me. I did not understand anything, so I asked her.

What’s for this
Piaai duo poot of their milk
Emotional, I had just been seeing them I have survived this thing!

Every time the eyes came crispy and filled with the throat, I told the shopkeeper to raise a lassi. They closed their money back in the fist and sat on the ground nearby …
Now I felt really helpless in reality because I could not say to sit on the chair because of the shopkeepers, my friends and many other customers there!

There was no fear that somebody should not give a tip. Somebody should not have any objection if the old woman asking for a begging is sitting in their place. But the chair on which I was sitting was cutting me.

 

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