Tuesday , 11 July 2017
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जैसा आचरण वैसा व्यवहार

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जैसा आचरण वैसा व्यवहार

जैसा आचरण वैसा व्यवहार

एक बार एक स्त्री महाराष्ट्र के महान संत ज्ञानेश्वर महाराज के पास आई। वह अपने छोटे बच्चे को भी साथ लाई। उस स्त्री ने संत से कहा कि मेरे बेटे को अपच की बीमारी है। मैने इसका इलाज कई दवाईयों और औषधियों से किया पर यह ठीक नहीं हुआ।

संत ज्ञानेश्वर ने कहा कि ‘इसे आप कल लेकर आना। दूसरे दिन जब वह स्त्री लड़के को लेकर संत के पास गई तो, संत ज्ञानेश्वर ने बच्चे से पूछा तुम गुड़ खाते हो, बच्चे ने स्वीकृति में सिर हिलाया। संत ने उस बच्चे से कहा कि तुम गुड खाना बंद कर दो, तुम्हारी बीमारी ठीक हो जाएगी।’

स्त्री यह सब बात सुन रही थी। उसने संत ज्ञानेश्वर से पूछा कि ‘महाराज आप यह बात कल भी बता सकते थे। लेकिन आपने यह बात कहने के लिए हमें आज ही क्यों बुलाया’, तब संत ज्ञानेश्वर बोले कि बहन जब तुम कल मेरे पास आईं, तब मेरे पास गुड़ रखा हुआ था।

ऐसे में, में तुम्हारे पुत्र से गुड़ खाने के लिए मना नहीं कर सकता था। यदि में मना करता तो तुम्हारा पुत्र शायद सोचता कि, महाराज स्वयं तो गुड़ का सेवन करते हैं और मुझे मना कर रहे हैं कि इसे मत खाना। यह बात सुनकर उस स्त्री ने संत की महानता से अभिभूत हो गई।

In English

Once a woman came to the great saint of Maharashtra, Dnyaneshwar Maharaj. He brought his little child together too. The woman told the saint that my son has a disease of indigestion. I treated it with many medicines and medicines but it was not cured.

Saint Dnyaneshwar said that ‘bring it to you tomorrow and bring it tomorrow. On the second day when the woman went to the saint with the boy, Saint Dnyaneshwar asked the child, you eat jaggery, the child nodded in acceptance. The saint told the child that you stop eating good, your disease will be cured.

The woman was listening to all this. He asked Saint Dnyaneshwar, ‘Maharaj, you could tell this thing even yesterday.’ But why did you call us today to say this’, then Saint Dnyaneshwar said that when you came to me yesterday, sister had kept a jaggery.

In such a situation, your son could not refuse to eat jaggery. If your son refused, your son probably thought that Maharaj himself was eating jag and he was refusing to do it, do not eat it. Upon hearing this, that woman got overwhelmed by the greatness of the saint.

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