Tuesday , 12 September 2017
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चापलूस से अच्छा होता है आलोचक

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अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल में रक्षा मंत्रालय का कार्यभार एक ऐसे व्यक्ति को सौंपा जो उनका कटु आलोचक था। वह व्यक्ति लिंकन के विरूद्ध कुछ न कुछ गलत बोला करता था।

जब यह बात लिंकन के दोस्त को पता चली तो उन्होंने कहा, ‘क्या आप नहीं जानते कि जिसे आपने रक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा है, वह कौन है?’

लिंकन बोले, ‘ऐसा क्या हुआ?’ दोस्त बोला, ‘उस व्यक्ति ने कल ही एक सभा में आपको दुबला पतला गुरिल्ला बताया है।’ लिंकन बोले, ‘मुझे पता है, समाचार पत्र में पढ़ा था।’

उसने लिंकन को भड़काने के लिहाज से कहा, ‘इससे पहले भी एक सभा में उसने आपको बहरूपिया कहा था।’ लिंकन बोले, ‘वह भी मुझे पता है।’

दोस्त अब नाराज होकर बोला, ‘जब सब पता है तो उसे रक्षा मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण विभाग क्यों सौंपा?’ लिंकन बोले, ‘वह जैसा भी है लेकिन कुशल प्रशासक है। अपने कार्य को लगन-निष्ठा से पूरा करता है। मुझे ऐसे ही देशभक्त रक्षामंत्री की आवश्यकता है… न कि चापलूस की।’

Hindi to English 

During his tenure, the US President handed over the charge of the Ministry of Defense to a person who was critical of him. The person used to say something wrong against Lincoln.

When Lincoln’s friend came to know about this, he said, ‘Do not you know who you are entrusted with the Ministry of Defense, who is he?’

Lincoln said, ‘What happened?’ The friend said, ‘That person has told you in a meeting yesterday that you are a slender guerilla.’ Lincoln said, ‘I know, I had read in the newspaper.’

He said in order to provoke Lincoln, “Even before that in a meeting, he had called you baharupia.” Lincoln said, ‘I know that too.’

The mate now angry and said, ‘When all knows, why did he entrust a vital department like the Ministry of Defense?’ Lincoln said, ‘He is as efficient but as an administrator. Fulfill your work diligently. I need a patriot like that … not a flattery. “

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