Friday , 9 June 2017
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दशहरे पर पान क्यों खाया जाता है

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dashara paan

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पान प्रेम का पर्याय है। दशहरे में रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खाने की परम्परा है। ऐसा माना जाता है दशहरे के दिन पान खाकर लोग असत्य पर हुई सत्य की जीत की खुशी को व्यक्त करते हैं, और यह बीड़ा उठाते हैं कि वह हमेशा सत्य के मार्ग पर चलेंगे। जानकार कहते हैं कि  पान का पत्ता मान और सम्मान का प्रतीक है। इसलिए हर शुभ कार्य में इसका उपयोग किया जाता है।

दशहरे के दिन पान खाने की परम्परा पर वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरह चैत्र नवरात्र में पूरे नौ दिन तक मिश्री, नीम की पत्ती और काली मिर्च खाने की परम्परा है। क्योंकि इनके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उसी तरह शारदेय नवरात्रि का समय भी ऋतु परिवर्तन का समय होता है। इस समय संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
ऐसे में यह परम्परा लोगों की बीमारियों से रक्षा करती है। नौ दिन के उपवास के बाद लोग अन्न ग्रहण करते हैं जिसके कारण उनकी पाचन की प्रकिया प्रभावित होती है। पान का पत्ता पाचन की प्रक्रिया को सामान्य बनाए रखता है। इसलिए दशहरे के दिन शारीरिक प्रक्रियाओं को सामान्य बनाए रखने के लिए पान खाने की परम्परा है।
 Wish4me  In English

dashahare ke din paan khaane kee parampara par vaigyaanikon ka maanana hai ki jis tarah chaitr navaraatr mein poore nau din tak mishree, neem kee pattee aur kaalee mirch khaane kee parampara hai. kyonki inake sevan se shareer kee pratirodhak kshamata badhatee hai. usee tarah shaaradey navaraatri ka samay bhee rtu parivartan ka samay hota hai. is samay sankraamak beemaariyon ke phailane ka khatara sabase jyaada hota hai.

aise mein yah parampara logon kee briyoneemaa se raksha karatee hai. nau din ke upavaas ke baad log ann grahan karate hain jisake kaaran unakee paachan kee prakiya prabhaavit hotee hai. paan ka patta paachan kee prakriya ko saamaany banae rakhata hai. isalie dashahare ke din shaareerik prakriyaon ko saamaany banae rakhane ke lie paan khaane kee parampara hai.

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