Wednesday , 5 July 2017
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मन से हारें नहीं कन्फ्यूशियस कहते हैं इस तरह रखें संयम

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एक बार एक साधक ने कन्फ्यूशियस से पूछा, मैं मन पर संयम कैसे रखूं? कन्फ्यूशियस ने उस व्यक्ति से पूछा, क्या तुम कानों से सुनते हो? साधक ने कहा, हां, मैं कानों से ही सुनता हूं।

तब कन्फ्यूशियस ने कहा, मैं नहीं मान सकता तुम मन से भी सुनते हो और उसे सुनकर अशांत हो जाते हो। इसलिए आज से केवल कानों से सुनो।

मन से सुनना बंद कर दो। तुम आंखों से देखते हो, यह भी मैं मान नहीं सकता आज से तुम केवल आंख से देखना और जीभ से चखना आरंभ करो। मन पर अपने आप संयम हो जाएगा।

संक्षेप में

यह प्रेरक प्रसंग एक सशक्त सूत्र की तरह है। केवल कान से सुनो, आंख से देखो और जीभ से चखो। उनसे मन को मत जोड़ो। मन पर संयम रखने की यह पहली सीढ़ी है।

Hindi to English

Once a seeker asked Confucius, how can I keep patience on my mind? Confucius asked the person, do you hear from the ears? The seeker said, yes, I listen to the ears only.

Confucius then said, “I can not believe you hear from the mind too and listen to him and become turbulent.” So listen with ears only today.

Stop listening to your heart. You see with your eyes, even I can not believe that from today you only see with your eyes and start tasting with your tongue. The mind will be restrained on its own.

in short

This motivational context is like a powerful formula. Just listen with the ear, look with your eyes and taste with the tongue. Do not add them to the mind. This is the first stair of restraint on the mind.

 

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