Tuesday , 11 July 2017
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निरर्थक चर्चा में खर्च न करें समय

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निरर्थक चर्चा में खर्च न करें समय

निरर्थक चर्चा में खर्च न करें समय

भगवान बुद्ध, अनमोल समय के सदुपयोग के पक्षधर थे। निकम्मी बातों में समय गंवाने का सदा विरोध किया करते थे। कोई आदमी उनके पास आया और बोला, भगवन् आप बार-बार दुख और विमुक्ति पर ही बोलते हैं। कृप्या यह तो बताइए यह दुख होता किसको है? और दुखों से विमुक्ति होती किसको है?

प्रश्न करने वाले का प्रश्न निरर्थक था। पर बुद्ध कहां ऐसी निरर्थक चर्चा में उलझने वाले थे। वह प्रेमपूर्वक बोले भाई तुम्हें प्रश्न करना ही नहीं आता है। प्रश्न यह नहीं करना चाहिए था कि दुख किसे होता है । तुम्हें प्रश्न करना चाहिए था कि दुख क्यों होता है?और विमुक्ति कैसे होती है?

सार्थक बात यह है कि दुख से छुटकारा पाएं और इसके लिए यह जानना आवश्यक है कि दुख का कारण क्या है? और उसका निवारण क्या है? और उसका निवारण क्या है? इसे छोड़ सभी चर्चाएं व्यर्थ होतीं हैं। यह सब निरर्थक नहीं तो और क्या हैं।

तभी बुद्ध से कोई पूछता है कि भगवन् यह बताएं कि संसार को किसने बनाया है? तो फिर वह प्यार से समझते हैं कि किसी विष बुझे तीर से घायल व्यक्ति कभी नहीं पूछता कि उसे किसने बनाया है। बेहतर है कि उस तीर को निकाल लिया जाए तो पीड़ा से मुक्त होकर इलाज कराया जाए। तभी वह दुख मुक्त हो सकता है।I

In English

Lord Buddha was favored for the use of precious time. Always used to oppose time spent in nonsense Someone came to them and said, Bhagwan, you speak only on misery and liberation. Please tell this, who is it to hurt? And who is free from misery?

Questioner’s question was meaningless. But where Buddha was going to engage in such a pointless discussion. He lovingly said, brother, you do not have to question. The question should not have been that who is suffering. You should have questioned why the suffering happens? And how is liberation?

The meaningful thing is that you get rid of sadness and for this it is necessary to know what is the cause of suffering? And what’s the problem? And what’s the problem? All discussions except this are meaningless. If all this is not nonsense then what else?

Only then does Buddha ask that God should tell who made the world? Then he lovingly understands that a person with a poisoned arrow is never asked who made him. It is better that if the arrow is taken out, then get relief from pain and be treated. Only then can he be sad.

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