Wednesday , 12 July 2017
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ऐसे कीजिए अच्छे और बुरे की पहचान

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ऐसे कीजिए अच्छे और बुरे की पहचान

गुरु द्रोणाचार्य ने शिक्षा पूरी होने पर कौरव और पांडव वंश के राजकुमारों दुर्योधन और युधिष्ठिर को परीक्षा के लिए बुलाया। गुरु द्रोण ने सबसे पहले युधिष्ठिर और दुर्योधन को एक अच्छा व्यक्ति ढूंढकर लाने को कहा। दोनों राजुकमार चल दिए।

 सारा दिन खाली हाथ भटकने के बाद शाम को वापिस गुरुकुल आए। दुर्योधन बोला, गुरुजी मुझे तो कोई भी भला आदमी नहीं मिला, जिसे में आपके पास लाता। दूसरी ओर युधिष्ठिर ने कहा, गुरुदेव में सभी बुरे कहे जाने वाले आदमियों के पास गया।
उनसे मिलकर मैंने पाया कि उनमें तो अनेक गुण हैं। मुझे कोई व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जो पूरी तरह से बुरा हो। क्षमा कीजिए मैं आपके कार्य को नहीं कर पाया।
तब गुरु द्रोण ने कहा, ‘प्रत्येक मनुष्य में अच्छाई और बुराई का संगम है। न कोई पूर्ण है। न कोई संपूर्ण से अच्छा। सवाल हमारे नजरिए का है हम उसमें क्या देखते हैं।’

Hindi to English

Guru Dronacharya invited Duryodhana and Yudhishthira to test the Kauravas and the sons of Pandav dynasty to complete the education. Guru Drano first asked Yudhishtir and Duryodhana to find a good person. Both came running Rajukamara.

After returning empty-handed all day, came back to Gurukul in the evening. Duryodhana said, Guruji, I have not found any good man in whom you have got to whom you have got. On the other hand, Yudhishtir said, in Gurudev all the people went to the bad guys called the evil.

I met him and found that he has many qualities. I did not find any person who was totally bad. Sorry I could not do your work.

Then Guru Dron said, “There is a confluence of good and evil in every human being. No one is full. Neither any perfect than the best. The question is of our attitudes what we see in it. ‘

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