Wednesday , 26 April 2017
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Earn relationships not money

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Passport Office

Passport Office

थोड़ा समय लगेगा लेकिन पढ़ना जरूर, आंसू आ जाए तो जान लेना आपकी भावनाएं जीवित हैं ….🌹

बात बहुत पुरानी है। आठ-दस साल पहले की। मैं अपने एक मित्र का पासपोर्ट बनवाने के लिए दिल्ली के पासपोर्ट ऑफिस गया था।उन दिनों इंटरनेट पर फार्म भरने की सुविधा नहीं थी। पासपोर्ट दफ्तर में दलालों का बोलबाला था और खुलेआम दलाल पैसे लेकर पासपोर्ट के फार्म बेचने से लेकर उसे भरवाने, जमा करवाने और पासपोर्ट बनवाने का काम करते थे।मेरे मित्र को किसी कारण से पासपोर्ट की जल्दी थी, लेकिन दलालों के दलदल में फंसना नहीं चाहते थे।हम पासपोर्ट दफ्तर पहुंच गए, लाइन में लग कर हमने पासपोर्ट का तत्काल फार्म भी ले लिया। पूरा फार्म भर लिया। इस चक्कर में कई घंटे निकल चुके थे, और अब हमें िकसी तरह पासपोर्ट की फीस जमा करानी थी।हम लाइन में खड़े हुए लेकिन जैसे ही हमारा नंबर आया बाबू ने खिड़की बंद कर दी और कहा कि समय खत्म हो चुका है अब कल आइएगा।मैंने उससे मिन्नतें की, उससे कहा कि आज पूरा दिन हमने खर्च किया है और बस अब केवल फीस जमा कराने की बात रह गई है, कृपया फीस ले लीजिए।बाबू बिगड़ गया। कहने लगा, “आपने पूरा दिन खर्च कर दिया तो उसके लिए वो जिम्मेदार है क्या? अरे सरकार ज्यादा लोगों को बहाल करे। मैं तो सुबह से अपना काम ही कर रहा हूं।”मैने बहुत अनुरोध किया पर वो नहीं माना। उसने कहा कि बस दो बजे तक का समय होता है, दो बज गए। अब कुछ नहीं हो सकता।मैं समझ रहा था कि सुबह से दलालों का काम वो कर रहा था, लेकिन जैसे ही बिना दलाल वाला काम आया उसने बहाने शुरू कर दिए हैं। पर हम भी अड़े हुए थे कि बिना अपने पद का इस्तेमाल किए और बिना उपर से पैसे खिलाए इस काम को अंजाम देना है।मैं ये भी समझ गया था कि अब कल अगर आए तो कल का भी पूरा दिन निकल ही जाएगा, क्योंकि दलाल हर खिड़की को घेर कर खड़े रहते हैं, और आम आदमी वहां तक पहुंचने में बिलबिला उठता है।खैर, मेरा मित्र बहुत मायूस हुआ और उसने कहा कि चलो अब कल आएंगे।मैंने उसे रोका। कहा कि रुको एक और कोशिश करता हूं।बाबू अपना थैला लेकर उठ चुका था। मैंने कुछ कहा नहीं, चुपचाप उसके-पीछे हो लिया। वो उसी दफ्तर में तीसरी या चौथी मंजिल पर बनी एक कैंटीन में गया, वहां उसने अपने थैले से लंच बॉक्स निकाला और धीरे-धीरे अकेला खाने लगा।मैं उसके सामने की बेंच पर जाकर बैठ गया। उसने मेरी ओर देखा और बुरा सा मुंह बनाया। मैं उसकी ओर देख कर मुस्कुराया। उससे मैंने पूछा कि रोज घर से खाना लाते हो?उसने अनमने से कहा कि हां, रोज घर से लाता हूं।मैंने कहा कि तुम्हारे पास तो बहुत काम है, रोज बहुत से नए-नए लोगों से मिलते होगे?वो पता नहीं क्या समझा और कहने लगा कि हां मैं तो एक से एक बड़े अधिकारियों से मिलता हूं।कई आईएएस, आईपीएस, विधायक और न जाने कौन-कौन रोज यहां आते हैं। मेरी कुर्सी के सामने बड़े-बड़े लोग इंतजार करते हैं।मैंने बहुत गौर से देखा, ऐसा कहते हुए उसके चेहरे पर अहं का भाव था।मैं चुपचाप उसे सुनता रहा।फिर मैंने उससे पूछा कि एक रोटी तुम्हारी प्लेट से मैं भी खा लूं? वो समझ नहीं पाया कि मैं क्या कह रहा हूं। उसने बस हां में सिर हिला दिया।मैंने एक रोटी उसकी प्लेट से उठा ली, और सब्जी के साथ खाने लगा।वो चुपचाप मुझे देखता रहा। मैंने उसके खाने की तारीफ की, और कहा कि तुम्हारी पत्नी बहुत ही स्वादिष्ट खाना पकाती है।वो चुप रहा।मैंने फिर उसे कुरेदा। तुम बहुत महत्वपूर्ण सीट पर बैठे हो। बड़े-बड़े लोग तुम्हारे पास आते हैं। तो क्या तुम अपनी कुर्सी की इज्जत करते हो?अब वो चौंका। उसने मेरी ओर देख कर पूछा कि इज्जत? मतलब?मैंने कहा कि तुम बहुत भाग्यशाली हो, तुम्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है, तुम न जाने कितने बड़े-बड़े अफसरों से डील करते हो, लेकिन तुम अपने पद की इज्जत नहीं करते।उसने मुझसे पूछा कि ऐसा कैसे कहा आपने? मैंने कहा कि जो काम दिया गया है उसकी इज्जत करते तो तुम इस तरह रुखे व्यवहार वाले नहीं होते।देखो तुम्हारा कोई दोस्त भी नहीं है। तुम दफ्तर की कैंटीन में अकेले खाना खाते हो, अपनी कुर्सी पर भी मायूस होकर बैठे रहते हो, लोगों का होता हुआ काम पूरा करने की जगह अटकाने की कोशिश करते हो। मान लो कोई एकदम दो बजे ही तुम्हारे काउंटर पर पहुंचा तो तुमने इस बात का लिहाज तक नहीं किया कि वो सुबह से लाइऩ में खड़ा रहा होगा,और तुमने फटाक से खिड़की बंद कर दी। जब मैंने तुमसे अनुरोध किया तो तुमने कहा कि सरकार से कहो कि ज्यादा लोगों को बहाल करे।मान लो मैं सरकार से कह कर और लोग बहाल करा लूं, तो तुम्हारी अहमियत घट नहीं जाएगी? हो सकता है तुमसे ये काम ही ले लिया जाए। फिर तुम कैसे आईएएस, आईपीए और विधायकों से मिलोगे?भगवान ने तुम्हें मौका दिया है रिश्ते बनाने के लिए। लेकिन अपना दुर्भाग्य देखो, तुम इसका लाभ उठाने की जगह रिश्ते बिगाड़ रहे हो।मेरा क्या है, कल भी आ जाउंगा, परसों भी आ जाउंगा। ऐसा तो है नहीं कि आज नहीं काम हुआ तो कभी नहीं होगा। तुम नहीं करोगे कोई और बाबू कल करेगा।पर तुम्हारे पास तो मौका था किसी को अपना अहसानमंद बनाने का। तुम उससे चूक गए।वो खाना छोड़ कर मेरी बातें सुनने लगा था।मैंने कहा कि पैसे तो बहुत कमा लोगे, लेकिन रिश्ते नहीं कमाए तो सब बेकार है। क्या करोगे पैसों का? अपना व्यवहार ठीक नहीं रखोगे तो तुम्हारे घर वाले भी तुमसे दुखी रहेंगे। यार दोस्त तो नहीं हैं,ये तो मैं देख ही चुका हूं। मुझे देखो, अपने दफ्तर में कभी अकेला खाना नहीं खाता।यहां भी भूख लगी तो तुम्हारे साथ खाना खाने आ गया। अरे अकेला खाना भी कोई ज़िंदगी है?मेरी बात सुन कर वो रुंआसा हो गया। उसने कहा कि आपने बात सही कही है साहब। मैं अकेला हूं। पत्नी झगड़ा कर मायके चली गई है। बच्चे भी मुझे पसंद नहीं करते। मां है, वो भी कुछ ज्यादा बात नहीं करती। सुबह चार-पांच रोटी बना कर दे देती है, और मैं तनहा खाना खाता हूं। रात में घर जाने का भी मन नहीं करता। समझ में नहींं आता कि गड़बड़ी कहां है?मैंने हौले से कहा कि खुद को लोगों से जोड़ो। किसी की मदद कर सकते तो तो करो। देखो मैं यहां अपने दोस्त के पासपोर्ट के लिए आया हूं। मेरे पास तो पासपोर्ट है।मैंने दोस्त की खातिर तुम्हारी मिन्नतें कीं। निस्वार्थ भाव से। इसलिए मेरे पास दोस्त हैं, तुम्हारे पास नहीं हैं।वो उठा और उसने मुझसे कहा कि आप मेरी खिड़की पर पहुंचो। मैं आज ही फार्म जमा करुंगा।मैं नीचे गया, उसने फार्म जमा कर लिया, फीस ले ली। और हफ्ते भर में पासपोर्ट बन गया।बाबू ने मुझसे मेरा नंबर मांगा, मैंने अपना मोबाइल नंबर उसे दे दिया और चला आया।कल दिवाली पर मेरे पास बहुत से फोन आए। मैंने करीब-करीब सारे नंबर उठाए। सबको हैप्पी दिवाली बोला।उसी में एक नंबर से फोन आया, “रविंद्र कुमार चौधरी बोल रहा हूं साहब।”मैं एकदम नहीं पहचान सका। उसने कहा कि कई साल पहले आप हमारे पास अपने किसी दोस्त के पासपोर्ट के लिए आए थे, और आपने मेरे साथ रोटी भी खाई थी।आपने कहा था कि पैसे की जगह रिश्ते बनाओ।मुझे एकदम याद आ गया। मैंने कहा हां जी चौधरी साहब कैसे हैं?उसने खुश होकर कहा, “साहब आप उस दिन चले गए, फिर मैं बहुत सोचता रहा। मुझे लगा कि पैसे तो सचमुच बहुत लोग दे जाते हैं, लेकिन साथ खाना खाने वाला कोई नहीं मिलता। सब अपने में व्यस्त हैं। मैंसाहब अगले ही दिन पत्नी के मायके गया, बहुत मिन्नतें कर उसे घर लाया। वो मान ही नहीं रही थी।वो खाना खाने बैठी तो मैंने उसकी प्लेट से एक रोटी उठा ली,कहा कि साथ खिलाओगी? वो हैरान थी।रोने लगी। मेरे साथ चली आई। बच्चे भी साथ चले आए। साहब अब मैं पैसे नहीं कमाता। रिश्ते कमाता हूं। जो आता है उसका काम कर देता हूं।साहब आज आपको हैप्पी दिवाली बोलने के लिए फोन किया है।अगल महीने बिटिया की शादी है। आपको आना है।अपना पता भेज दीजिएगा। मैं और मेरी पत्नी आपके पास आएंगे।मेरी पत्नी ने मुझसे पूछा था कि ये पासपोर्ट दफ्तर में रिश्ते कमाना कहां से सीखे?तो मैंने पूरी कहानी बताई थी। आप किसी से नहीं मिले लेकिन मेरे घर में आपने रिश्ता जोड़ लिया है।सब आपको जानते है बहुत दिनों से फोन करने की सोचता था, लेकिन हिम्मत नहीं होती थी।आज दिवाली का मौका निकाल कर कर रहा हूं। शादी में आपको आना है। बिटिया को आशीर्वाद देने। रिश्ता जोड़ा है आपने। मुझे यकीन है आप आएंगे।वो बोलता जा रहा था, मैं सुनता जा रहा था। सोचा नहीं था कि सचमुच उसकी ज़िंदगी में भी पैसों पर रिश्ता भारी पड़ेगा।लेकिन मेरा कहा सच साबित हुआ। आदमी भावनाओं से संचालित होता है। कारणों से नहीं। कारण से तो मशीनें चला करती हैंपसंद आए तो अपनें अज़ीज़ दोस्तों को जरुर भेजें एंव इनसांनीयत की भावना को आगे बढ़ाएँ

👉पैसा इन्सान के लिए बनाया गया है, इन्सान पैैसै के लिए नहीं बनाया गया है।👈

आपका आभारी मित्र

Hindi to english

It will take some time but reading, tears are coming, then your emotions are alive …. 🌹

It is a very old issue. Eight-ten years ago. I went to the passport office of Delhi to build my friend’s passport. There was no facility to fill the form on the internet in those days. In the Passport Office the brokers were dominated and open brokers used to take money from the sale of passport forms and to fill it, deposit and make passports. My friend had a quick passport for some reason, but did not want to get caught in the swamp of brokers We reached the passport office, we got an urgent form of passport by looking in line. Filled the entire form. There were many hours in this affair, and now we had to deposit the passport fees in any way.We were standing in line, but as soon as our number came, Babu stopped the window and said that the time has come and now it will come tomorrow. I pleaded with him, told him that we have spent all day today and just now there is no reason to deposit the fees, please take the fees. He started saying, “If you spend the entire day, then what is he responsible for?” Hey government should restore more people. I am doing my job since morning. “I requested a lot but he did not accept it. He said that the time is up to two o’clock, two o’clock. Now nothing can happen.I was thinking that he was doing the job of the brokers from the morning, but as soon as the broker came to work, he has begun excuses. But we were too stubborn that without using our position and feeding money without paying the money, we have to execute this work. I also understood that if tomorrow, if tomorrow, even tomorrow will be full day, because the broker They stand around the window and the aam admits to reach there. Well, my friend was very upset and he said that tomorrow will come tomorrow. I stopped him. Said that wait a second attempt. Babu got up with his bag. I did not say anything, quietly behind him. He went to a canteen built on the third or fourth floor in the same office, where he pulled a lunch box from his bag and slowly started eating alone. I sat on the bench in front of him and sat down. He looked at me and made a bad mouth. I smiled looking at her. I asked him to bring me food from the house everyday? He said with a sense that yes, bring me from the house everyday.I said that you have a lot of work, will you meet many new people everyday? He does not know what And I started to say that yes, I meet one of the big officials. Many IAS, IPS, MLAs and do not know who come here every day. Lots of people wait in front of my chair.I looked very carefully, saying that on his face there was a sense of ego.I kept quietly listening to him. Then I asked him to eat a roti from your plate too? He did not understand what I am saying. She just nodded in Ya.I took a roti from her plate and started eating with a vegetable. She kept looking at me quietly. I praised her food, and said that your wife cooks a very tasty meal.She is silent.I then curved him again. You are sitting in a very important seat. Big people come to you So do you respect your chair? Now he is stunned. He looked at me and asked that respect? Meaning? I said that you are very fortunate, you have got such an important responsibility, you do not know how many big officers deal with, but you do not respect your position.She asked me how did you say that? I said that if you respect the work that has been given you are not behaving like this rude. Look, there is no friend of yours too. You eat a meal alone in the office canteen, you sit down while sitting on your chair, trying to keep the people from getting the work done. Suppose someone suddenly reached your counter at 2 o’clock, then you did not care that he would have been standing in line from the morning, and you closed the window with crackers. When I requested you then you said that you should tell the government to restore more people.Don’t I tell the government and restoring people, will not you lose your importance? Maybe you can get this work done from you. How would you meet the IAS, IPA and the legislators? God has given you a chance to make relationships. But look at your misfortune, you are spoiling the relationship instead of taking advantage of it. What is my, I will come tomorrow, I will come tomorrow also. It is not that if no work is done today then it will never happen. You will not do any other Babul will do tomorrow. But you had the chance to make someone feel your favor. You missed him. He had stopped eating and listening to my words. I said that money will earn a lot, but if you do not earn a relationship then all is useless. What will you do with money? If you do not keep your behavior well then your home also will be unhappy with you. I am a friend, I have already seen it. Look at me, never eat food alone in your office. Even here, hungry, then came to eat with you. Hey alone is any life? He listened to me and became a little rouser. He said that you have said the thing right, sir. I am alone The wife has gone to the maiden by quarreling. Children do not like me too. Mother, she does not talk too much. In the morning, I make four to five meals, and I eat meat. Do not even mind going home at night. Do not understand where the disturbance is? I said to myself that connect yourself with the people. If you can help someone, then do so. Look, I have come here for my friend’s passport. I have a passport. I made my wishes for friend’s sake. With selflessness So I have friends, you do not have it. He got up and he told me that you should reach my window. I will submit the form today.I went down, he deposited the form, took the fees. And the passport became a weekend.Babu asked me my number, I gave her my mobile number and she came back.On the occasion of Diwali, I got a lot of phone calls. I picked up almost all the numbers. Everyone spoke Happy Diwali. In the same phone call from one number, “Rabindra Kumar Chaudhary is speaking sir.” I could not quite recognize. He said that many years ago you had come to us for a passport with a friend, and you had also eaten bread with me. You said that make relationships with you instead of money.I remember all of a sudden. I said yes, how are you, Choudhary sir? He said, “Sir, you went on that day, then I kept thinking a lot.” I felt that money is really given to many people, but there is no one to eat together. I was seated in my house, and the next day my wife went to my mother’s house, made very submissive and brought her home. She was not feeling that. She sat down to eat, so I picked a roti from her plate, said that she would feed? I started walking with my son, came along with me, even the children went along with me, sir, now I do not earn money, I earn the relationship, I do the work of the one who comes.Sir has called you today to call Happy Diwali. Bitia is married, you have to come.Let’s send your address, my wife and I will come to you.My wife had asked me where did she learn from making a passport office relationship? Then I told the whole story. You have not met anyone but you have added a relationship to my house. All you know was thinking of calling for a long time but I did not have the courage. Today, I am taking out the opportunity of Diwali, you have to come to the wedding. Blessing to Bitia. Relationship is added to you I’m sure you will come.He was going to speak, I was listening. It was not thought that even in his life, the relationship with money would be huge. But my statement proved true. Man is driven by emotions. Not for reasons If due to the fact that the machines are running, then send them to your loved ones and move on to the spirit of innocence.

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