Monday , 10 July 2017
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जिंदगी में कभी आपने कहीं भी सुनी है दर्द की भाषा

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कोलकाता में मुस्लिम महिला सम्मेलन का वार्षिक अधिवेशन था। सरोजिनी नायडू इसकी मुख्य अतिथि थीं। भाषण देने वालों में कोई बांग्ला में तो कोई ऊर्दू में। उनके पास बैठी महिलाओं में भी किसी ने बांग्ला की वकालत की तो किसी ने ऊर्दू की।

इसी बीच एक स्वयंसेविका ने आकर किसी महिला से कहा, आपके घर से फोन आया है कि आपकी बच्ची बहुत रो रही है। किसी भी तरह चुप नहीं हो रही है।

किसी भी तरह चुप नहीं हो रही। सरोजिनी नायडू ने सेविका से बहुत गंभीरता से कहा, बहन जरा फोन पर यह तो पूछ लो कि बच्ची ऊर्दु में रही है या बांग्ला में। उनकी बात सुन कर भाषाओं पर बहस कर रहीं महिलाओं का चेहरा शर्म से झुक गया। उन्होंने कहा कि कभी आपने दर्द की भाषा सुनी होती तो जानतीं।

In English

The Muslim Women Conference in Kolkata was the annual convention. Sarojini Naidu was its chief guest. Among the speakers, there is no Bengali in any Bengali Someone advocated Bengali in any of the women sitting beside them, then somebody has Urdu

In the meantime a volunteer came and told a lady, “There is a call from your house that your child is crying a lot. There is no way to be silent.

Not being silent anyhow. Sarojini Naidu said to the servant very seriously, sister, just call on the phone to ask if the girl is in Urdu or in Bengali. Listening to them, the faces of the women who were debating on languages ​​were overwhelmed with embarrassment. He said that if you had ever heard the language of pain, then you would know.

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