Wednesday , 6 September 2017
Latest Happenings
Home » Gyan Ganga » इंसान बन गए, इंसानियत कब सीखेंगे

इंसान बन गए, इंसानियत कब सीखेंगे

human-being-humanity-when-learn

human-being-humanity-when-learn

humanity

humanity

कभी हम शिकवा करते हैं, कभी शिकायतें करते हैं, कभी रूठ जाते हैं, कभी मान जाते हैं, कभी हंसते हैं, कभी रोते हैं और ना जाने अपनी जिंदगी में क्या क्या करते हैं।

फिर भी हम जिंदगी से खफा रहते हैं, क्यों? बहुत कुछ पाने की होड़ में जो कुछ हमारे पास होता है हम उसे भी खो बैठते हैं। खुद को तो संभाल नहीं सकते, तो फिर इतना कुछ कैसे संभालेंगे।

भगवान ने भी पता क्या सोच के इंसान को बनाया था। इंसान तो बन गए लेकिन इंसानियत क्या होती है, यह कभी नहीं सीख पाए। हर पल कुछ ना कुछ बेकार में सोच के अपने आपको परेशान करते रहते हैं। चैन से बैठकर कभी आराम भी नहीं कर सकते। कितना भागेंगे आप?

मोहब्बत को भी पाना हो तो उससे जरा दूर रहना पड़ता है, क्योंकि ‘मोहब्बत का जमाने में यही दस्तूर होता है, जिसे दिल प्यार करता है वो अक्सर दूर होता है’। या यूं कहिए ‘नहीं आती जो उनकी याद महीनों तक नहीं आती, मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं।’

हम शिकायत क्यों करते हैं, क्योंकि हमें कुछ अच्छा नहीं लगता। हम शिकवा क्यों करते हैं, क्योंकि हमें कोई अच्छा लगता है।

कोई हमें देखकर हमसे नज़र चुरा ले , तो हम पर कयामत टूट पड़ती है। आप इतना कुछ दुनिया के लिए करते हैं और दुनिया आपसे ऐसे बेरुखी से पेश आए, आपको दुःख तो होगा ही। फिर मन को तसल्ली देने के लिए क्या-क्या सोचते हैं ताकि मन शांत हो जाए।

ऐसे में एक ठंडा गिलास पानी पी लीजिये, सब ठीक हो जाएगा। हम अपनी शक्सियत को तो उम्दा बना सकते हैं, लेकिन किसी और को कैसे बदल सकते हैं। हमारी कमजोरी सिर्फ इतनी है ‘जो भी प्यार से भी बुलाए, हम उसी के हो लिए’, पर क्या वो हमारा हुआ?

बिल्कुल नहीं। हर इंसान प्यार का भूखा होता है। अगर उसकी यह भूख मिट जाए तो फिर उसे कुछ खाने की जरूरत ही नहीं। पर अक्सर इंसान प्यार में ही धोखा खाता है, इसलिए वो खाना खाना कभी नहीं छोड़ता।

जब से दुनिया बनी है और जब तक यह दुनिया रहेगी, हम शिकवा और शिकायतें करते ही रहेंगे। क्योंकि इसके बिना हमारा गुजारा ही नहीं, और दुनिया में कोई हमारा ही नहीं। अकेले रहकर भी हम सिर्फ दीवारों से ही लड़ सकते हैं। कोई हमारे साथ जुड़ा हुआ है तो हम उससे नोकझोंक कर सकते हैं और जिंदगी को सुरमई बना सकते हैं।

कल हम हों ना हों, पर हमारा नाम तो होगा। सूरज भी होगा, चांद भी होगा पर अफ़सोस शायद हम न होंगे। जब तक हैं। जिंदादिली को हमेशा सीने से लगाए रखिए। अरे कल किसने देखा है, आज को अपना साथी बनाए रखिए।

 

 

Comments

comments