Thursday , 13 July 2017
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इंसान में होते हैं अवगुण, ऐसे करें पहचान

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इंसान में होते हैं अवगुण, ऐसे करें पहचान

                                                          इंसान में होते हैं अवगुण, ऐसे करें पहचान

एक संत से एक बार एक व्यक्ति मिलने आया। उसने कहा, ‘महाराज मैं बहुत पापी व्यक्ति हूं। मुझे उपदेश दीजिए।’ संत ने कहा, अच्छा एक काम करो जो तुमको अपने से पापी, ‘तुच्छ और बेकार वस्तु लगे उसे मेरे पास लेकर आओ।’

उस व्यक्ति को सबसे पहले श्वान मिला। लेकिन संत द्वारा बताए गुण उसमें नहीं थे। वह स्वामीभक्त और वफादार था। वह थोड़ा आगे चला तब उसे एक कांटेदार झाड़ी दिखाई दी। लेकिन वह भी उसके मानकों पर खरी नहीं उतरी क्योंकि कांटेदार झाड़ी का उपयोग खेत में बाड़ लगाने में होता है। जिससे फसलों की पशुओं से रक्षा होती है।

वह व्यक्ति आगे चलता गया। तब उसे रास्ते में गोबर मिला। गोबर आंगन लीपने और सुखाकर ईंधन के काम आता है। उसने सोचा कि यह मुझसे भी गया-बीता नहीं है। उस व्यक्ति ने जिस वस्तु को भी देखा वह उसे अच्छी ही लगी।

वह व्यक्ति थक-हार कर संत के पास पहुंचा। और बोला महाराजा, मुझे अपने से तुच्छ और बेकार वस्तु नहीं मिली। इस तरह संत ने उस व्यक्ति को शिष्य बना लिया।

Hindi to English

Once a saint came to meet a person. He said, ‘Maharaj, I am a very sinful person. Teach me. ‘ The saint said, do a good thing that will bring you a sinner, ‘despised and worthless thing to yourself, and bring it to me.’

That person got the dog first. But the attributes given by the Saint were not in it. He was a devotee and loyalist. He went a little further and then he saw a thorny bush. But that too did not fit his standards because the thorn bushes is used in fencing in the field. Which protects crops from animals.

The person went on ahead. Then he got dung in the way. The dung patches are used for dripping and drying. He thought that this too has gone from me- has not passed. She liked the thing that the person saw.

The person got tired and reached the saint. And said, ‘Maharaja, I did not find anything worthless and worthless to myself. In this way the saint made that person a disciple.

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