Tuesday , 11 July 2017
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इंसान वही जो दूसरों के दुःख दर्द को समझे

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इंसान वही जो दूसरों के दुःख दर्द को समझे

एक ज्ञानी संत थे। दूसरों के दुख दूर करने में उन्हें परम आनंद प्राप्त होता था। एक बार वे सरोवर के किनारे ध्यान में बैठे हुए थे। तभी उन्होंने देखा एक बिच्छु पानी में डूब रहा है। वे तुरंत ही उसे बचाने के लिए दौड़ पड़े।

उन्होंने जैसे ही बिच्छु को पानी से निकालने के लिए उठाया उसने स्वामीजी को डंक मारना शुरू कर दिया और वह संत के हाथों से छुटकर पुन: पानी में गिर गया। स्वामीजी ने फिर कोशिश परंतु वे जैसे ही उसे उठाते बिच्छु डंक मारने लगता।

ऐसा बहुत देर तक चलता रहा, परंतु संत ने भी हार नहीं मानी और अंतत: उन्होंने बिच्छु के प्राण बचा लिए और उसे पानी से बाहर निकाल लिया। वहीं एक अन्य व्यक्ति इस पूरी घटना को ध्यान से देख रहा था। जब संत सरोवर से बाहर आए तब उस व्यक्ति ने पूछा- स्वामीजी मैंने देखा आपने किस तरह जहरीले बिच्छु के प्राण बचाए।

बिच्छु को बचाने के लिए अपने प्राण खतरे में डाल दिए। जब वह बार-बार डंक मार रहा था तो फिर आपने उसे क्यों बचाया? इस प्रश्न को सुनकर स्वामीजी मुस्काए और फिर बोले- बिच्छु का स्वभाव है डंक मारना और मनुष्य का स्वभाव है दूसरों की मदद करना।

In English

Was a knowledgeable saint. They used to get ultimate pleasure in removing the suffering of others. Once they were sitting in meditation on the banks of the lake. Then he saw a scorpion drowning in water. They immediately ran to save him.

As soon as he picked up the scorpion to be removed from the water, he started stinging to Swamiji and he was relieved from the hands of the saint and again fell into the water. Swamiji tried again but as soon as he picked up the scorpions started stinging.

It continued for a long time, but the saint also did not give up and eventually he saved the life of the scorpion and took it out of the water. Another person was observing this whole incident carefully. When the Sant came out of the lake then that person asked- Swamiji I saw how you saved the life of a poisonous scorpion.

To save the scorpion, put your life in danger. When he was stung repeatedly, then why did you save him? After listening to this question, Swamiji smiles and then says – The nature of the scorpion is sting and man’s nature is helping others.

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