Monday , 18 December 2017
Latest Happenings
Home » Gyan Ganga » आचार्य बहुश्रुत के शिष्यों की कांटों भरी अंतिम परीक्षा

आचार्य बहुश्रुत के शिष्यों की कांटों भरी अंतिम परीक्षा

humans-only-joe-others-kahn

humans-only-joe-others-kahn

The final examination of the thorns of Acharya Purshuva's disciples

एक बार गुरुकुल में तीन शिष्यों की विदाई का अवसर आया तो आचार्य बहुश्रुत ने कहा की सुबह मेरी कुटिया में आना। तुम्हारी अंतिम परीक्षा होगी। आचार्य बहुश्रुत ने रात्रि में कुटिया के मार्ग पर कांटे बिखेर दिए।

सुबह तीनों शिष्य अपने-अपने घर से गुरु के निवास की ओर चल पड़े। मार्ग पर कांटे थे। लेकिन शिष्य भी कमजोर नहीं थे। पहला शिष्य कांटों की चुभन के बावजूद कुटिया तक पहुंच गया। दूसरा शिष्य कांटो से बचकर आया। फिर भी एक कांटा तो चुभ ही गया। तीसरे शिष्य ने कांटे देखे तो कांटों की डालियों को घसीट कर दूर फेंक दिया।

फिर हाथ मुंह धोकर कुटिया तक तीनों गए। आचार्य बहुश्रुत तीनों की गतिविधियां गौर से देख रहे थे। तीसरा शिष्य ज्यों ही आया, त्यों ही उन्होंने कुटिया के द्वार खोल दिए और बोले- वत्स, तुम मेरी अंतिम परीक्षा में उतीर्ण हो गए हो।

गुरु ने कहा कि ज्ञान वही है जो व्यवहार में काम आए। तुम्हारा ज्ञान व्यावहारिक हो गया है। तुम संसार में रहोगे तो तुम्हें कांटे नहीं चुभेंगे और तुम दूसरों को भी चुभने नहीं दोगे। फिर पहले और दूसरे शिष्य की ओर देखकर बोले, तुम्हारी शिक्षा अभी अधूरी है।

In English

Once the opportunity for the departure of the three disciples in Gurukul, Acharya Purshoot said that coming in my cottage in the morning. Your final exam will be Acharya Miksharut sprayed the thorns on the path of a cottage in the night.

In the morning, three disciples went towards their residence from the home of the master. There were thorns on the way. But the disciples were not too weak The first disciple reached the cottage despite the prick of the thorns. The second one came out of Kanto and escaped. Yet a thorn just stabbed. If the third disciple saw thorns, then drag the thorns and throw them away.

Then, after washing their hands, they went to the cottage. Acharya was watching carefully the activities of all three. As soon as the third disciple came, he opened the door of the cottage and said, “You have gone through my last exam.

The master said that knowledge is the same which can be used in practice. Your knowledge has become practical. If you remain in the world then you will not prick the thorns and you will not let others prick. Then looking at the first and the second disciple, you said, your education is still incomplete.

Comments

comments