Monday , 10 July 2017
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कर्म तेरे अच्छे होगें तो भगवान भी तेरा साथ देगें

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एक बार देवर्षि नारद अपने शिष्य तुम्बुरु के साथ कही जा रहे थे। गर्मियों के दिन थे एक प्याऊ से उन्होंने पानी पिया और पीपल के पेड़ की छाया में बैठे ही थे कि अचानक एक कसाई वहां से 25-30 बकरों को लेकर गुजरा उसमे से एक बकरा एक दुकान पर चढ़कर घांस खाने के लिए दौड़ पड़ा।

दुकान शहर के मशहूर सेठ शागाल्चंद सेठ की थी। दुकानदार का बकरे पर ध्यान जाते ही उसने बकरे के कान पकड़कर मारा। बकरा चिल्लाने लगा। दुकानदार ने बकरे को पकड़कर कसाई को सौंप दिया।

और कहा कि जब बकरे को तू हलाल करेगा तो इसकी सिर मेरे को देना क्योकि यह मेरी घांस खा गया है देवर्षि नारद ने जरा सा ध्यान लगा कर देखा और जोर से हंस पड़े तुम्बुरु पूछने लगा गुरूजी ! आप क्यों हंसे?

उस बकरे को जब मार पड़ रही थी तो आप दू:खी हो गए थे, किन्तु ध्यान करने के बाद आप रंस पड़े इससे क्या रहस्य है ?नारदजी ने कहा यह तो सब कर्मो का फल है

इस दुकान पर जो नाम लिखा है ‘शागाल्चंद सेठ’ वह शागाल्चंद सेठ स्वयं यह बकरा होकर आया है। यह दुकानदार शागाल्चंद सेठ का ही पुत्र है सेठ मरकर बकरा हुआ है और इस दुकान से अपना पुराना सम्बन्ध समझकर घांस खाने गया।

उसके बेटे ने ही उसको मारकर भगा दिया। मैंने देखा की 30 बकरों में से कोई दुकान पर नहीं गया। इस बकरे का पुराना संबंध था इसलिए यह गया।

इसलिए ध्यान करके देखा तो पता चला की इसका पुराना सम्बन्ध था। जिस बेटे के लिए शागाल्चंद सेठ ने इतना कमाया था, वही बेटा घांस खाने नहीं देता और गलती से खा लिए तो सिर मांग रहा है पिता की यह कर्म गति और मनुष्य के मोह पर मुझे हंसी आ रही है।

In English

Once, Devshi Narada was going with her disciple Tumbaru. On the day of the summer, they were sitting in the shade of drinking water and peepal trees from a pigeon that suddenly a butcher passed along with 25-30 goats from there, and there was a goat riding on a shop and running to eat the cows.

The shop was famous for the city’s famous Seth Shaglachand Seth. When he went to the shopkeeper’s goat, he grabbed the goat’s ear and struck it. The goat started shouting The shopkeeper grabbed the goat and handed it over to the butcher.

And said that when you go to the goat, it will give its head to me as it has eaten my breath; Narrar Narada looked a little bit and noticed and began to laugh loudly, Tumbaroo! Why you laugh

When the goat was hit, you were saddened, but after meditation, what is the mystery behind it? Narada said that it is the result of all karmas

The name written on this shop, ‘Shagalchand Seth’, Shagalchand Seth himself came under the goat. This shopkeeper is the son of Shagalchand Seth, who has been killed by Seth, has been a goat and has gone to the house to understand his old relation.

His son killed him and drove him away. I saw no one out of 30 goats went to the shop. This goat had an old relationship, so it was gone.

So, after meditation, it came to know that it was an old relationship. The son whom Shagalchand Seth had earned so much, the same son does not eat grass and is eaten by mistake, then the head is demanding that this karma of the father and the lover of man is laughing at me.

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