Sunday , 18 February 2018
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मन में यदि सुराख है तो उसमें प्रेम कैसे भरेगा

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गौतम बुद्ध यात्रा पर थे। रास्ते में उनसे लोग मिलते। कुछ उनके दर्शन करके संतुष्ट हो जाते तो कुछ अपनी समस्याएं रखते थे। बुद्ध सबकी परेशानियों का समाधान करते थे।

एक दिन एक व्यक्ति ने बुद्ध से कहा- मैं एक विचित्र तरह के द्वंद्व से गुजर रहा हूं। मैं लोगों को प्यार तो करता हूं पर मुझे बदले में कुछ नहीं मिलता। जब मैं किसी के प्रति स्नेह रखता हूं तो यह अपेक्षा तो करूंगा ही कि बदले में मुझे भी स्नेह या संतुष्टि मिले। लेकिन मुझे ऐसा कुछ नहीं मिलता। मेरा जीवन स्नेह से वंचित है।

मैं स्वयं को अकेला महसूस करता हूं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरे व्यवहार में ही कोई कमी है। कृपया बताएं कि मुझ में कहां गलती और कमी है। बुद्ध ने तुरंत कोई उत्तर नहीं दिया, वे चुप रहे! सब चलते रहे। चलते-चलते बुद्ध के एक शिष्य को प्यास लगी। कुआं पास ही था।

रस्सी और बाल्टी भी पड़ी हुई थी। शिष्य ने बाल्टी कुएं में डाली और खींचने लगा। कुआं गहरा था। पानी खींचते-खींचते उसके हाथ थक गए पर वह पानी नहीं भर पाया क्योंकि बाल्टी जब भी ऊपर आती खाली ही रहती।

सभी यह देखकर हंसने लगे। हालांकि कुछ यह भी सोच रहे थे कि इसमें कोई चमत्कार तो नहीं? थोड़ी देर में सबको कारण समझ में आ गया। दरअसल बाल्टी में छेद था। बुद्ध ने उस व्यक्ति की तरफ देखा और कहा- हमारा मन भी इसी बाल्टी की ही तरह है जिसमें कई छेद हैं।

आखिर पानी इसमें टिकेगा भी तो कैसे? मन में यदि सुराख रहेगा तो उसमें प्रेम भरेगा कैसे। क्या वह रुक पाएगा? तुम्हें प्रेम मिलता भी है तो टिकता नहीं है। तुम उसे अनुभव नहीं कर पाते क्योंकि मन में विकार रूपी छेद हैं।

In English

Gautam Buddha was on a journey. They meet people on the way. If some were satisfied with their philosophy, then some kept their problems. Buddha used to solve all problems.

One day a person said to Buddha – I am passing through a strange kind of duality. I love people but I do not get anything in return. When I have affection for someone, then I would expect that in return I also get affection or satisfaction. But I did not get anything like that. My life is deprived of affection.

I feel myself alone. It is not that there is no shortage in my behavior. Please tell me where there is fault and shortness in me. Buddha did not respond immediately, he kept quiet! All keep moving On the way a Buddha student became thirsty. The well was nearby.

Rope and bucket were also lying. The disciple started throwing and pulling in the bucket well. The well was deep. He was tired of pulling water but he could not fill the water because the bucket was empty only when it came up.

Everyone began to laugh at seeing this. Although some were even thinking that there is no miracle in it? After a while everyone understood the reason. Actually there was a hole in the bucket. Buddha looked at that person and said, ‘Our mind is also like this bucket in which there are many holes.

After all, how will the water survive in it? If there is a hole in the mind then how will it love? Will he stop? You also get love, so does not last. You can not experience it because there are holes in the heart.

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