Tuesday , 11 July 2017
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अपमान के बदले सम्मान कभी हासिल नहीं किया जा सकता

insult-of-rewards-honor-sometimes

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RAJT

 

बात पुरानी है पर है लाजबाव, यूरोप संभ्रांत शहर में एक व्यक्ति रहता था, जो अक्सर धर्मग्रंथों का मजाक उड़ाया करता था। वह नास्तिक था पर वह ईश्वर में विश्वास करने वालों का सम्मान कतई नहीं करता था। वह उनसे वैचारिक बहस न करके, कुतर्कों के जरिए उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश करता था।
एक दिन वह एक पादरी के पास पहुंचा। उसका मकसद पादरी को नीचा दिखाना था। उसने पादरी से पूछा- अगर मैं खजूर खाऊं तो क्या मुझे पाप लगेगा? पादरी ने सहजता से कहा-नहीं। उस व्यक्ति ने फिर पूछा-और अगर मैं खजूर के साथ थोड़ा पानी मिला लूं तो क्या मुझे पाप लगेगा?
पादरी ने उसी तरह कहा- इससे भी कोई अंतर नहीं पड़ेगा। उस व्यक्ति ने फिर अगला सवाल पेश किया- और महोदय, यदि मैं उस खजूर में पानी के साथ थोड़ा खमीर मिला लूं तो क्या यह धार्मिक दृष्टि से गलत होगा?
पादरी ने उसकी मंशा ताड़ ली पर उन्होंने बिना झुंझलाए कहा- बिल्कुल नहीं। उस पर उस व्यक्ति ने दलील दी- फिर धर्मग्रंथों में शराब पीना पाप क्यों बताया गया है,जबकि शराब इन्हीं तीनों से मिलकर बनती है।
पादरी ने इसका जवाब देने की बजाय उससे प्रश्न किया- अगर मैं तुम पर मुट्ठी भर धूल फेंकू तो क्या तुम्हें चोट लगेगी। इस पर उस व्यक्ति ने कहा- नहीं तो…।
पादरी ने कहा- और अगर मैं धूल में थोड़ा पनी मिलाकर फेंकू तो क्या तुम्हें चोट लगेगी? उस व्यक्ति ने सिर हिलाकर कहा-नहीं।
पादरी ने मुस्कराते हुए फिर पूछा- और अगर मैं उस मिट्टी और पानी में कुछ पत्थर मिलाकर तुम्हारे ऊपर फेंकू तो क्या होगा? चोट लगेगी कि नहीं।
यह सवाल सुनकर वह थोड़ा घबराया। उसने कुछ सोचकर कहा- आप चोट लगने की बात कर रहे हैं, मेरा तो सिर ही फूट जाएगा।
पादरी ने कहा- मुझे विश्वास है कि तुम्हें अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा। वह व्यक्ति शर्मिंदा हो गया। उसने अपने व्यवहार के लिए पादरी से क्षमा मांगी और आगे से उसने किसी व्यक्ति से ऐसी गलती नहीं कि…।

In English

The thing is old but laziness, a person lived in Europe elite city, which often used to ridicule religious texts. He was an atheist but he did not respect the people who believed in God. He used to try to break his morale by not having ideological debate, through the kurtakas.
One day he reached near a priest. His aim was to humiliate the priest. He asked the priest- If I eat dates, would I have sin? The pastor said effortlessly-no. The person asked again- and if I get some water with dates, will I get a sin?
The pastor said in the same way – there will be no difference. The person then presented the next question – and sir, if I get a little yeast with water in that date, will it be wrong with a religious view?
The priest took his intention, but he said without hesitation- not at all. The person argued on that – then why is drinking in the holy scriptures been said to be sin, while alcohol is made up of these three people.
Instead of answering this, the priest questioned him – if I throw a handful of dust on you then will you get hurt? That person said on this – if not ….
The clergy said – And if I throw a little bit of dust in the dust then will you hurt? The person shook his head and said-no.
The priest asked, then smiling- and if I had to throw some stones in that soil and water then what would happen if you were to throw it? Whether it will hurt or not.
He was a little nervous after hearing this question. He thought, ‘You are talking about injury, my head will be broken.’
The priest said – I am sure that you have got the answer to your question. That person was embarrassed He apologized to the pastor for his behavior and did not make such a mistake in front of any person ….

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