Monday , 29 May 2017
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कजरी तीज का त्यौहार

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कजरी तीज का त्यौहार 21 अगस्त को मनाया जा रहा है। हिन्दू पंचांग प्रणाली के अनुसार साल के छठे महीने को भाद्रपद कहा जाता है। भाद्रपद अर्थात भादों का पूरा माह विष्णु के कृष्ण आभि लिए हुए अवतारों को संबोधित है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी अर्थात कजली तीज के नाम से जाना जाता है। इस दिन आसमान में घुमड़ती काली घटाओं के कारण इस पर्व को कजली अथवा कजरी तीज के नाम से पुकारते हैं। इस पर्व में परविद्धा तृतीया ग्राह्य है। यदि इस तिथि को पूर्वाभाद्रपद या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र हो तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। भाद्रपद के दो नक्षत्रों में से उत्तराभाद्रपद शनि का नक्षत्र है। इस नक्षत्र में भगवान विष्णु के श्याम वर्ण लिए विग्रह का पूजन करने का विधान है। किसी भी भाद्रपद नक्षत्र में शनिदेव व भगवान श्रीकृष्ण के पूजन का विधान है। शब्द कजली का अर्थ है काले रंग से। शास्त्रों में शनिदेव का स्थान काले मेघों के बीच माना जाता है तथा शब्द भाद्रपद से ही शनि की बहन भद्रा उत्तपन हुई थी। शब्द भाद्रपद का अर्थ है जिनके श्री चरण सुंदर हों अर्थात श्रीकृष्ण व शनिदेव।

क्योंकि कजरी अर्थात कजली तीज पर भगवान विष्णु के शामल वर्ण लिए विग्रह का पूजन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। कजरी तीज पर सुहागने तथा कंवारी कन्याएं पार्वती के भवानी स्वरूप का पूजन भी करती हैं। कजरी तीज पर तीन बातें त्याज्य मानी जाती हैं पहला पति से छल कपट, दूसरा मिथ्याचार एवं दुर्व्यावहार तथा तीसरा परनिंदा। सुहागने कजरी तीज को अपने पीहर अथवा अपने मामा के घर मनाती हैं। इस दिन विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर सुहागने अपनी सास के पांव छूकर उन्हें भेंट करती हैं। यदि सास न हो तो जेठानी या किसी वयोवृद्धा को देना शुभ होता है। कजरी तीज पर पैरीं में मेहंदी लगाने का विशेष महत्व है। लोक मान्यता के अनुसार, इसी दिन गौरा अर्थात पार्वती विरहाग्नि में तपकर काली हो गई थी तथा इसी दिन उन्होंने अपना काल रंग त्यागकर पुनः शिव से मिलन किया था। इस दिन मां पार्वतीजी की सवारी बड़ी धूम-धाम से निकाली जाती है। पीपल, कदंब और बरगद के पत्ते मां भवानी, श्री राधा-कृष्ण और शनिदेव का पूजन कर चढ़ाएं जाते हैं।
क्या करें इस दिन: मां भवानी, श्री राधा-कृष्ण और शनिदेव का विधिवत षोडशोपचार पूजा करें, उनकी दिव्य कथाओं एवं चरित्रों का श्रवण करते हुए “ॐ गौरीशंकराय नमः”,  “ॐ नमो भगवाते वसुदेवाय”, तथा “ॐ शनिदेवाय नमः” 
आदि मंत्रों का जप करें। इसी क्रम में विशिष्ट हविद्रव्य जैसे की पीपल, कदंब तथा बरगद से हवन करें। इस दिन हर घर में झूला डाला जाता है। सुहागने पति हेतु व कुंवारी कन्याएं अच्छे पति हेतु व्रत रखती हैं। इस दिन गेहूं, जौ, चना व चावल के सत्तू में घी मिलाकर पकवान बनाते है। व्रत शाम को चंद्रोदय के बाद खोलते हैं और ये पकवान खाकर ही व्रत खोला जाता है। इस दिन काली गाय की पूजा की जाती है तथा आटे की 7 रोटियां बनाकर उस पर गुड़ चना रखकर काली गाय को खिलाया जाता है। कजरी तीज के प्रभाव से मानव के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की सहज प्राप्ति होती है। मां भवानी, श्री राधा-कृष्ण और शनिदेव की कृपा से आर्थिक साधन सुलभ होते है। सुख-संपत्ति, आयुष्य एवं सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
Hindi to English

The festival of Kajri Teej is being celebrated on August 21. According to the Hindu Panchang system, the sixth month of the year is called Bhadrapad. The whole month of Bhadrapada i.e. Bhadon is addressed to the incarnations of Vishnu, Krishna Avi. The third part of the Krishna side of Bhadrapad month is known as Kajari ie Kajali Teej. On this day due to black densities circling in the sky, this festival is called by the name of Kajali or Kajari Teej. The third part of the festival is admissible. If this date is predestined or Uttabhbandhpadra constellation, its importance is increased. Of the two constellations of Bhadrapad, the Uttarakhandpad is the constellation of Saturn. In this constellation is the law of worshiping the Viagra for the black character of Lord Vishnu. In any Bhadrapad nakshatra there is the law of worship of Shani Dev and Lord Krishna. The word kajali means black color. In the scriptures, the place of Shani Dev is considered to be between the Black Clouds and the word Bhadrapada was the sister’s sister Bhadra Uttana. The word Bhadrapad means the people whose shri stages are beautiful ie Shrikrushna and Shani Dev.
Because worship of Vigya is considered to be the best for Kajjari ie Kajali Tees, the covered character of Lord Vishnu. Kajree on the Teej, Suhagan and Kanvari Kanya also worship the Bhavani form of Parvati. Three things are considered ablaze on Kajri Teej, deceased deceit, second mithiyaachar and misbehavior and third paranidas. Suhagan kajri celebrates her teas in the house of her pomber or her maternal uncle. By making different types of dish on this day, Suhagan touches her mother’s feet and offers them to her. If you do not have a mother-in-law then it is auspicious to give birth to Jethani or any old age. Applying henna on the Kajari Tees is very important. According to the popular belief, on this day, in the Gaura ie Parvati Virahagani, he had become black in color and on this day, he discarded his time and reconciled with Shiva. On this day, Mother Parvarti’s ride is taken out with great enthusiasm. Pipal, Kadamb and banyan leaves are offered for worship by mother Bhavani, Shri Radha-Krishna and Shani Dev.
What to do: On this day: Due to the blessings of Mother Bhavani, Shri Radha-Krishna and Shani Dev, worship Goddess Shodh, “Gaurishankarai Namah”, “Namo Bhagwate Vasudevay”, and “Shani Dew Namah” while listening to his divine stories and characters.
Chant mantras etc. In this sequence, make a special hymn such as Pipal, Kadamb and Banyan. On this day, every house is swinging. Sweethearted husbands and virgins keep fast for good husbands. On this day wheat, barley, gram and rice sattu make gravy to make a dish. The fast open in the evening after the moonlight and by opening this dish, the fast is opened. Black cow is worshiped on this day and 7 rotis of flour is fed by making jaggery on it and fed to black cow. With the influence of Kajir Teej, there is a natural ease of religion, meaning, work and salvation for four human beings. Financial help is available with the blessings of Mother Bhavani, Shri Radha-Krishna and Shani Dev. Happiness, life and good fortune are attained

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