Tuesday , 7 February 2017
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आदमी अपने किए कर्मो से ही महानता को प्राप्त कर सकता है

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संसार में आने वाले हर जीव को अपने पुण्य एवं पाप का फल मिलता है। इस संसार में धरती पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति का अपना चरित्र होता है। इसी चित्र और चरित्र से वह जाना जाता है। यह बात सागर नाका स्थित सदगुवां जैन मंदिर में विराजमान जनसंत श्रमण मुनि विरंजन सागर महाराज ने प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा व्यक्ति के गुण एवं अवगुण से ही उसकी पहचान होती है। जैसा वह होता है वैसा ही दिखाई देता है। हो सकता है कि दिखने में कभी फर्क पड़ जाए। लेकिन एक दिन उसका असली चरित्र सामने आ ही जाता है।

हर संसारी जीव अपने जन्म से नहीं बल्कि उसके द्वारा किए गए कर्मो से महान बनता है। उन्होंने आगे कहा कि जीवन में तीन प्रकार के लोग होते हैं। एक वह होता है जो अपने जन्म से ही महान एवं सर्वपूज्य होता है। वे तीर्थंकर होते हैं जिनको जन्म के साथ ही महान कहा गया है। वे अपने पुण्य कर्म से दूसरो को पूज्य करने का कार्य करते हैं। दूसरे वे लोग होते है जो अपने जन्म से नहीं अपने कर्म से जीवन को महान बनाते है वे संत ही होते हैं। जो अपने को महान बनाने के बाद दूसरों को भी महान करने का उपक्रम करते हैं। वहीं तीसरे प्रकार के वे लोग हैं जो महान नहीं होते लेकिन स्वयं ही अपने आप को महान घोषत कर देते हैं। जबकि यह संसारी जीव अपने कार्य से ही महानता को प्राप्त करता है। क्षुल्लक विषौम्य सागर महाराजन ने प्रवचनों के दौरान कहा कि आदमी अपने किए कर्मो से ही महानता को प्राप्त कर सकता है। कर्म जो इंसान सही कर रहा है। उसका ही गुणगान होता है। कोई उच्च कुल में जन्म लेने के बाद भी निम्न कार्य करता है तो उसका कर्म निम्न ही कहा जाएगा। वह कहने मात्र से उच्च नहीं हो सकता। जो अपने अंदर उंचे विचारों को धारण करे वहीं उंचा माना जाता है। यह संसार भी उसे ही अपने सिर आंखों पर बैठाती है। प्रवचनों के दौरान भक्तों ने संतों की वाणी का लाभ लिया।

Man becomes great due to his work….

 

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