Thursday , 13 July 2017
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sawan ka mahina

                                                                           sawan ka mahina

ग्वालियर। सावन का महीना शुरू हो गया। इस महीने का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि यह न केवल प्रकृति का सबसे मनभावना मौसम होता है, बल्कि इस महीने में भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन भी मनाया जाता है। समय के साथ-साथ इस महीने का महत्व कम होता गया और अब महिलाएं अपने मायके उसी दिन जाती हैं, जब रक्षाबंधन होता है। इस बदलाव पर पत्रिका ने दो पीढिय़ों की महिलाओं से बात की।
ढाई सौ से अधिक झूले लगते थे अमुआ की डाल पे
वन का महीना आते ही भीगी मिट्टी की खुशबू, अमुआ की डाल पे पड़े झूले और उस पर पेंग भरती महिलाओं की याद बरबस ही जेहन में आ जाती है। वह दिन भी क्या हुआ करते थे। सावन आते ही शहर के चारों हरियाली, बड़े-बड़े पेड़ और उन पर लंबी रस्सियों में झूले।

सभी सखियां घर से बताकर तो कुछ झूठ बोलकर कभी इस मोहल्ले के झूले, तो कभी उस मोहल्ले के झूले झूलने पहुंच जाती थी। सुबह से झूलते-झूलते कब शाम हो जाती पता ही नहीं चलता था। ये झूले कंपू, सिटी सेंटर, एसएएफ ग्राउंड सहित कई स्थानों पर लगते थे। शहर के हर दसवें पेड़ पर उन दिनों झूला लगता और लोग एक के बाद एक बारी-बारी से झूलते थे। क्या बच्चे क्या बड़े क्या बूढ़े सभी झूले का लुत्फ उठाते थे। सावन के पहले दिन ही पेड़ों की डालियों पर झूले पड़ जाते, जो रक्षाबंधन पर ही उतरते थे। मैं भी सहेलियों सरला और मृदुला के साथ कंपू के पास आम के पेड़ में झूला झूलने जाती थी। हमारा पूरा-पूरा दिन वहीं गुजरता था। सभी सखियां इकट्ठा होकर गाना गातीं। शहर में लगभग 250 झूले लगा करते थे।

जन तो पेड़ बचे और न ही डालियों पर झूले पड़ते हैं। डवलपमेंट के नाम पर बड़ी-बड़ी मल्टी और पुल के बीच शहर से पेड़ गायब से हो गए हैं। हमने भी बचपन में झूले देखे, लेकिन आज यह सब सपना सा लगता है। क्या करें झूले बिना रहा भी नहीं जाता। इसीलिए आर्टिफिशियल झूले लगाते हैं। क्लब की ओर से होटल में होने वाली एक्टिविटी में सावन उत्सव मनाया जाता है। वहां आर्टिफिशियल झूले पड़ते हैं और उसी में बारी-बारी से सभी मजा ले लेते हैं। कहीं-कहीं पेड़ हैं भी तो जगह बहुत सकरी है। झूला नहीं लग सकता। बच्चे भी आज पूछते हैं मां झूला कैसा होता है। मार्केट में आए आर्टिफिशियल झूले ही उन्हें दरवाजे पर या बगीची में लगा दिए जाते हैं।
In English
Gwalior The month of Savan commenced. This month’s importance is also more because it is not only the most pleasant weather of nature but it is also celebrated in this month that the holy festival of brother and sister is also celebrated. Over time, the importance of this month has diminished and now women go to their maternal days only when the Raksha Bandhan happens. On this change, the journal talked to women of two generations.
More than two hundred swings seemed to put Amuya
As soon as the month of the forest arrives, the fragrance of the soils of the soil, the swinging of the Amuas, and the recollection of the women of Peng, it comes to mind only. What used to be that day also As soon as the saawan came, swing in the four greenery, big trees and long ropes on the city.By telling all the sakhis to the house and then lying about this lake, then some swirls swirled in that neighborhood. It was not possible to know that when the swinging swing from morning till evening. These swings used to be in many places, including Kampu, City Center, SAF Ground. On every tenth tree in the city, it started swinging and people swung one by one after one. Did the children enjoy the big swing? On the first day of Savannah, it was only on the branches of trees that they landed on the Raksha Bandhan. I used to go swinging in the mango tree near Kampu with the friends Sarla and Mridula. Our whole day passed there. All the singers gather and sang song There were about 250 swingers in the city.The trees do not survive nor do they swing on the branches. In the name of development, the trees have disappeared between the big multi and the bridge between the city. We also saw swings in childhood, but today all this seems like a dream. What do you do without swing? That is why artificial swings. Sawan festival is celebrated in the activities of the club on the part of the club. There are artificial swings and in turn they all get fun. There are trees in some places, but the place is very active. Can not swing Children also ask today how a mother swing is. Artyfishial swings in the market are given to them at the door or in the garden.

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