Tuesday , 30 May 2017
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Mother & child Relationship

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“तुम माँ के पेट में थे नौ महीने तक, कोई दुकान तो चलाते नहीं थे, फिर भी जिए। हाथ—पैर भी न थे कि भोजन कर लो, फिर भी जिए। श्वास लेने का भी उपाय न था, फिर भी जिए। नौ महीने माँ के पेट में तुम थे, कैसे जिए? तुम्हारी मर्जी क्या थी? किसकी मर्जी से जिए?

फिर माँ के गर्भ से जन्म हुआ, जन्मते ही, जन्म के पहले ही माँ के स्तनों में दूध भर आया, किसकी मर्जी से? अभी दूध को पीनेवाला आने ही वाला है कि दूध तैयार है,

किसकी मर्जी से? गर्भ से बाहर होते ही तुमने कभी इसके पहले साँस नहीं ली थी माँ के पेट में तो माँ की साँस से ही काम चलता था—लेकिन जैसे ही तुम्हें माँ से बाहर होने का अवसर आया, तत्क्षण तुमने साँस ली, किसने सिखाया? पहले कभी साँस ली नहीं थी, किसी पाठशाला में गए नहीं थे, किसने सिखाया कैसे साँस लो?

किसकी मर्जी से? फिर कौन पचाता है तुम्हारे दूध को जो तुम पीते हो, और तुम्हारे भोजन को? कौन उसे हड्डी—मांस—मज्जा में बदलता है?

किसने तुम्हें जीवन की सारी प्रक्रियाएँ दी हैं? कौन जब तुम थक जाते हो तुम्हें सुला देता है? और कौन जब तुम्हारी नींद पूरी हो जाती है तुम्हें उठा देता है?

कौन चलाता है इन चाँद—सूर्यों को? कौन इन वृक्षों को हरा रखता है? कौन खिलाता है फूल अनंत—अनंत रंगों के और गंधों के?

इतने विराट का आयोजन जिस स्रोत से चल रहा है, एक तुम्हारी छोटी—सी जिंदगी उसके सहारे न चल सकेगी? थोड़ा सोचो, थोड़ा ध्यान करो।

अगर इस विराट के आयोजन को तुम चलते हुए देख रहे हो, कहीं तो कोई व्यवधान नहीं है, सब सुंदर चल रहा है, सुंदरतम चल रहा है; सब बेझिझक चल रहा है। तुम छोटे से अंश हो इस जगत के, तुम्हें यह भ्रांति कब से आ गयी कि मुझे स्वयं को अलग से चलाना पड़ेगा? मुझे अपना जिम्मा अपने ऊपर लेना पड़ेगा? इसी भ्रांति में तुमने अपने जीवन के सारे कष्ट, असफलताएँ और विषाद पैदा कर लिए हैं।”
यह लेख उन लोगों के लिए है जो हर छोटी बड़ी तकलीफ मैं अपना संतुलन खो बैठते हैं और इलाज समाधान के कुचक्र मैं फस कर जीर्ण शीर्ण हो रोग शइया पर दीनहीन होकर जीवन का अंत कर बैठते हैं

Hindi to English

“You were in the mother’s stomach for nine months, did not run any shop, but still you did not have any hands or feet that you would eat, still live, still there was no way to breathe, still live nine You were in the mother’s womb for months, how to live? What was your wish? Whose choice?
Then the mother was born from the womb, born as soon as she was born, the milk of the mother came in full swing, whose will? Now the drinker is going to come that the milk is ready,
Whose choice? As soon as you were out of the womb, you never breathed in her mother’s womb, she used to work from mother’s breath only- but as soon as you got an opportunity to get out of mother, you breathed immediately, who taught? Never had a breath before, did not go to any school, who taught how to breathe?
Whose choice? Then who digest your milk that you drink, and your food? Who turns him into bone-marrow-medulla?
Who has given you all the processes of life? Who gives you peace when you are tired? And who else wakes you when your sleep is over?
Who runs these moon-suns? Who keeps these trees green? Who feeds the flowers – infinite colors and odor?
The arrangement of the so-called Virat is going on, one of your little life will not be able to support him? Think a little, take a little meditation.
If you are watching this Virat, you are walking, there is no interference, everything is beautiful, the best is going on; Everything is running smoothly. You are a part of the smallest part of this world, when did you come to the illusion that I have to run myself separately? Do I have to take up my own responsibility? In this misconception you have created all the miseries, failures and distractions of your life. “

This article is for those people who lose their balance in every major problem and I get frustrated by the tragedy of the treatment solution.

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