Monday , 3 July 2017
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परिश्रम में मिलाइए अभ्यास का रंग

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परिश्रम में मिलाइए अभ्यास का रंग

परिश्रम में मिलाइए अभ्यास का रंग

युनान के डिमास्थनीज बोलने में न केवल तुतलाते थे, बल्कि हकलाते भी थे। एक दिन वह अपने शहर की सभा में एक प्रसिद्ध वक्ता का भाषण सुनकर वह बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने मन ही मन अच्छा वक्ता बनने का संकल्प लिया।

वह जानते थे कि उनकी तुतलाहट और हकलाहट करियर के रास्ते में परेशानी खड़ी करेंगे। लेकिन उन्हें यह बात भी मालूम थी कि कठिन परिश्रम और नियमित साधना से ही इस कठिन परेशानी पर विजय हासिल करना संभव है।

बस, फिर क्या था उसने नित्य नियमित रूप से भाषण देने का अभ्यास करना शुरु कर दिया। वह समुद्र की तट पर जाते और लहरों को श्रोताओं का समूह मानकर जोर-जोर से भाषण करते।

यह भले ही नाटकीय लगता हो, लोग देखते हों लेकिन वह अपनी नियमित साधना में तत्पर जुड़े रहते थे। नियमित रूप से किया गया परिश्रम और अभ्यास ऐसा रंग लाया कि वह थोड़े दिनों में ही प्रसिद्ध वक्ता बन गए।

In English

Demonstrators of Yunnan did not only bowl in speaking but also stammering. One day he was very impressed by hearing a famous speaker speech in his city council and he resolved to become a good speaker in his heart.

He knew that his tiredness and stutter would create trouble in the career path. But he also knew that it is possible to overcome this difficult problem only with hard work and regular meditation.

Just what, then, he started practicing regularly giving regular speech. He went on the seashore and considered the waves as a group of listeners and spoke loudly.

Though it may seem dramatic, people are watching but they used to be immediately engaged in their regular practice. Regularly done diligence and practice brought such a color that he became a famous speaker in a few days.

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