Tuesday , 19 September 2017
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परशु’ प्रतीक है पराक्रम का

parashu-is-the-symbol-of-paramukhi

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Parashu is the symbol of Paramakra

परशु प्रतीक है पराक्रम का राम पर्याय है सत्य सनातन का। इस प्रकार परशुराम का अर्थ हुआ पराक्रम के कारक और सत्य के धारक। नारायण के छठे अवतार भगवान परशुराम को कभी सही परिप्रेक्ष्य में समझा ही नहीं गया।

नारायण ने एक साथ दो अवतार क्यों लिए?

ऐसा हिंस्र अवतार!!
नारायण को मनुष्य रूप में लेने की क्या अवश्यकता पड़ी?
परशुराम अवतार वास्तव में क्या है?
शिव और नारायण के वर्चस्ववाद की स्थापना के प्रतीक रूप में कल्पित हैं क्या परशुराम?

शास्त्रोक्त मान्यता तो यह है कि परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, अतः उनमें आपादमस्तक यानी शीश से पांव तक विष्णु ही प्रतिबिंबित होते हैं, परंतु मेरी मौलिक और विनम्र व्याख्या यह है कि ‘परशु’ में भगवान शिवसमाहित हैं और ‘राम’ में भगवान विष्णु इसलिए परशुराम अवतार भले ही विष्णु के हों, किंतु व्यवहार में समन्वित स्वरूप शिव और विष्णु का है। इसलिए मेरे मत में परशुराम दरअसल ‘शिवहरि’ हैं।

पिता जमदग्नि और माता रेणुका ने तो अपने पाँचवें पुत्र का नाम ‘राम’ ही रखा था, लेकिन तपस्या के बल पर भगवान शिव को प्रसन्न करके उनके दिव्य अस्त्र ‘परशु’ (फरसा या कुठार) प्राप्त करने के कारण वे राम से परशुराम हो गए।

‘परशु’ प्राप्त किया गया शिव से। शिव संहार के देवता हैं। परशु संहारक है, क्योंकि परशु ‘शस्त्र’ है। राम प्रतीक हैं विष्णु के। विष्णु पोषण के देवता हैं अर्थात्‌ राम यानी पोषण/रक्षण का शास्त्र। शस्त्र से ध्वनित होती है शक्ति। शास्त्र से प्रतिबिंबित होती है शांति। शस्त्र की शक्ति यानी संहार। शास्त्र की शांति अर्थात्‌ संस्कार। परशुराम दरअसल ‘परशु’ के रूप में शस्त्र और ‘राम’ के रूप में शास्त्र का प्रतीक हैं। एक वाक्य में कहूँ तो परशुराम शस्त्र और शास्त्र के समन्वय का नाम है, सामर्थ्य, आत्मसम्मान के साथ अपनी धर्म, आस्था, संस्कृति व संस्कारों को सम्माननीय बनाये रखने का संतुलन जिसका संदेश है।

अक्षय तृतीया को जन्मे हैं, इसलिए परशुराम की शस्त्रशक्ति भी अक्षय है और शास्त्र संपदा भी अनंत है। विश्वकर्मा के अभिमंत्रित दो दिव्य धनुषों की प्रत्यंचा पर केवल परशुराम ही बाण चढ़ा सकते थे। यह उनकी अक्षय शक्ति का प्रतीक था, यानी शस्त्रशक्ति का। पिता जमदग्नि की आज्ञा से अपनी माता रेणुका का उन्होंने वध किया। यह पढ़कर, सुनकर हम अचकचा जाते हैं, अनमने हो जाते हैं, लेकिन इसके मूल में छिपे रहस्य को/सत्य को जानने की कोशिश नहीं करते।
यह तो स्वाभाविक बात है कि कोई भी पुत्र अपने पिता के आदेश पर अपनी माता का वध नहीं करेगा।

फिर परशुराम ने ऐसा क्यों किया?
इस प्रश्न का उत्तर हमें परशुराम के ‘परशु’ में नहीं परशुराम के ‘राम’ में मिलता है। आलेख के आरंभ में ही ‘राम’ की व्याख्या करते हुए कहा जा चुका है कि ‘राम’ पर्याय है सत्य सनातनका। सत्य का अर्थ है सदा नैतिक। सत्य का अभिप्राय है दिव्यता। सत्य का आशय है सतत सात्विक सत्ता।परशुराम दरअसल ‘राम’ के रूप में सत्य के संस्करण हैं, इसलिए नैतिक-युक्ति का अवतरण हैं। यह परशुराम का तेज, ओज और शौर्य ही था कि कार्तवीर्य सहस्रार्जुनका वध करके उन्होंने अराजकता समाप्त की तथा नैतिकता और धर्म/न्याय का ध्वजारोहण किया।
परशुराम का क्रोध मेरे मत में रचनात्मक क्रोध है।जैसे माता अपने शिशु को क्रोध में थप्पड़ लगाती है, लेकिन रोता हुआ शिशु उसी माँ के कंधे पर आराम से सो जाता है, क्योंकि वह जानता है कि उसकी माँ का क्रोध रचनात्मक है। मेरा यह भी मत है कि परशुराम ने अन्याय का संहार और न्याय का सृजन किया।

सरल शब्दों में कहें तो सनातन ज्ञान “अहिंसा परमोधर्म, धर्महिंसा तदैव च” का अक्षरशः प्रतिपालन करने का सजीव , प्रत्यक्ष आदर्श है, भगवान श्री परशुराम.

Translate Into Hindi To English

Parashu is the symbol of Paramakra, ‘Ram’ is synonymous with Satyaanan. Thus Parashurama means the holder of the power of truth and the person of truth. Lord Parashuram, the sixth incarnation of Narayana, was never understood in the right perspective.

Why did Narayan get two incarnations together?
Such an incarnation !!
What was the need to take Narayana in human form?
What is Parashuram Avatar really?
What is perceived as the symbol of establishing the supremacy of Shiva and Narayana Parasurama

The scientific belief is that Parasurama is the sixth incarnation of Lord Vishnu, therefore, Vishnu is reflected from the meditative meaning of Shisha to the feet, but my original and humble interpretation is that Lord Parasu is Lord Shiva and Lord in Ram Vishnu therefore, Parashuram avatar may be of Vishnu, but in practice, the coordinated form is of Shiva and Vishnu. Therefore, in my opinion, Parshuram is actually ‘Shivahari’.

Father Jamdagni and Mata Renuka had kept the name of their fifth son as ‘Rama’, but on receiving the blessings of Lord Shiva, they found their divine weapon ‘Parashu’ (farsa or khair) due to which they became Parasuram.

‘Parashu’ received from Shiva. Shiva is the god of slaughter. Parashu is a destroyer, because Parshu is ‘Arms’. Ram symbol is Vishnu’s Vishnu is the god of nurturing, i.e. Ram means the science of nutrition / protection. The weapon implies the power. Shanti is reflected in scripture. Weapon’s power The peace of the scripture ie the sacraments Parashuram is actually a symbol of scripture in the form of ‘Parashu’ as weapon and ‘ram’. In one sentence, Parshuram is the name of the weapon and the coordination of scripture, the message of strength, self-esteem, the balance of maintaining respect for its religion, faith, culture and values.

Akshay Tritiya is born, hence the weapon of Parashurama is also Akshaya and the Shastra estate is also infinite. Parshuram could only throw arrows on the pretext of the two divine bows of Vishwakarma. It was a symbol of his renewable power, that is, the weapon of weapon. They killed their mother Renuka with the order of father Jamdagni. By reading this, listening to us, we are inadvertent, weirdly, but do not try to know the hidden secret / truth in its origin.

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