Saturday , 16 September 2017
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पितृ पक्ष श्राद्ध

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पितृ पक्ष श्राद्ध

पितृ पक्ष श्राद्ध

हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना जाता है। मान्यतानुसार अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती और वह भूत के रूप में इस संसार में ही रह जाता है। पितृ पक्ष का महत्त्व (Importance of Pitru Paksha)
ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पितरों यानि पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार भी पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों में से एक माना जाता है। पितरों की शांति के लिए हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक के काल को पितृ पक्ष श्राद्ध (Pitru Paksha) होते हैं। मान्यता है कि इस दौरान कुछ समय के लिए यमराज पितरों को आजाद कर देते हैं ताकि वह अपने परिजनों से श्राद्ध ग्रहण कर सकें।

Hindi to English

In Hinduism, after the death, Shraddha is considered to be very necessary. According to the law, if a person is not given the due rituals and is not honored, he does not get salvation from this person and he remains in this world as a ghost. Importance of Pitru Paksha
According to Brahma Vaivarta Purana, before pleasing the deities, one should please his ancestors, the ancestors. According to Hindu astrology, Pitra defect is also considered to be one of the most complex horoscope defects. Every year for the peace of the ancestors, Bhadrapad Shukla Purnima, from Ashwani Krishna Amavasya, is the father’s patra (Pitru Paksha). It is believed that during this period, Yama Raj liberates the ancestors so that he can get freedom from his kin.

 

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