Monday , 13 February 2017
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समुराई की समस्या

samuraaii-kee-samasyaa

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Samuraaii kee samasyaa

Samuraaii kee samasyaa

एक  समुराई  जिसे   उसके   शौर्य ,इमानदारी  और  सज्जनता  के  लिए  जाना  जाता  था  , एक  जेन सन्यासी से सलाह  लेने  पहुंचा .

जब  सन्यासी  ने  ध्यान  पूर्ण   कर  लिया  तब  समुराई  ने  उससे  पूछा , “ मैं  इतना  हीन  क्यों  महसूस  करता  हूँ ? मैंने  कितनी  ही  लड़ाइयाँ  जीती  हैं , कितने  ही  असहाय  लोगों  की  मदद  की  है . पर  जब मैं और लोगों  को  देखता  हूँ  तो  लगता  है  कि मैं उनके सामने कुछ नहीं हूँ , मेरे  जीवन  का  कोई  महत्त्व  ही  नहीं  है .”

“रुको ;  जब  मैं  पहले  से  एकत्रित  हुए  लोगों  के  प्रश्नों  का  उत्तर  दे  लूँगा  तब  तुमसे  बात  करूँगा .” , सन्यासी  ने  जवाब  दिया  .

समुराई  इंतज़ार  करता  रहा , शाम  ढलने  लगी  और  धीरे -धीरे  सभी  लोग  वापस  चले  गए .

“ क्या  अब  आपके  पास  मेरे  लिए  समय  है  ?” , समुराई  ने  सन्यासी  से  पूछा .

सन्यासी  ने  इशारे  से  उसे  अपने  पीछे  आने  को  कहा , चाँद  की  रौशनी  में  सबकुछ  बड़ा  शांत  और  सौम्य  था , सारा  वातावरण  बड़ा  ही  मोहक  प्रतीत  हो  रहा  था .

“ तुम चाँद को देख रहे हो , वो  कितना  खूबसूरत  है ! वो  सारी  रात  इसी  तरह  चमकता  रहेगा , हमें शीतलता पहुंचाएगा , लेकिन  कल  सुबह  फिर  सूरज  निकल  जायेगा , और सूरज  की  रौशनी  तो  कहीं  अधिक  तेज  होती  है , उसी  की  वजह  से  हम  दिन में   खूबसूरत  पेड़ों , पहाड़ों  और   पूरी  प्रकृति  को  साफ़  –साफ़  देख  पाते  हैं  , मैं तो कहूँगा कि चाँद की कोई ज़रुरत ही नहीं है….उसका अस्तित्व ही बेकार है !!”

“ अरे ! ये आप क्या कह रहे हैं, ऐसा बिलकुल  नहीं है ”- समुराई बोला, “ चाँद  और  सूरज बिलकुल  अलग -अलग  हैं , दोनों  की  अपनी-अपनी  उपयोगिता है , आप  इस तरह दोनों  की  तुलना  नहीं  कर  सकते हैं .”, समुराई बोला.

“तो इसका मतलब  तुम्हे अपनी समस्या का हल पता  है . हर  इंसान  दूसरे  से  अलग  होता  है , हर  किसी  की  अपनी -अपनी  खूबियाँ  होती  हैं , और  वो  अपने -अपने  तरीके  से  इस  दुनिया  को  लाभ   पहुंचाता है ; बस  यही  प्रमुख  है  बाकि  सब  गौड़ है “, सन्यासी ने अपनी बात पूरी की.

Friends, हमें   भी  खुद  को  दूसरों  से  compare नहीं  करना  चाहिए , अगर  औरों  के  अन्दर  कुछ  qualities हैं  तो  हमारे  अन्दर  भी  कई  गुण  हैं , पर  शायद  हम  अपने  गुणों  को  कम  और  दूसरों  के  गुणों  को  अधिक  आंकते  हैं  , हकीकत  तो  ये  है  की  हम  सब  unique हैं  और  सभी  किसी  न  किसी  रूप  में  special हैं .

Ralph Waldo Emerson  ने  कहा  भी  है , “मैं जिस व्यक्ति से भी मिलता हूँ वह किसी ना किसी रूप में मुझसे बेहतर है.”

[To English wish4me]

Ek samuraaii jise usake shaury ,imaanadaaree aur sajjanataa ke lie jaanaa jaataa thaa , ek jen sanyaasee se salaah lene pahunchaa . Jab sanyaasee ne dhyaan poorṇa kar liyaa tab samuraaii ne usase poochhaa , “ main itanaa heen kyon mahasoos karataa hoon ? Mainne kitanee hee ladaaiyaan jeetee hain , kitane hee asahaay logon kee madad kee hai . Par jab main aur logon ko dekhataa hoon to lagataa hai ki main unake saamane kuchh naheen hoon , mere jeevan kaa koii mahattv hee naheen hai .”

“ruko ; jab main pahale se ekatrit hue logon ke prashnon kaa uttar de loongaa tab tumase baat karoongaa .” , sanyaasee ne javaab diyaa . Samuraaii intazaar karataa rahaa , shaam ḍhalane lagee aur dheere -dheere sabhee log vaapas chale gae .

“ kyaa ab aapake paas mere lie samay hai ?” , samuraaii ne sanyaasee se poochhaa . Sanyaasee ne ishaare se use apane peechhe aane ko kahaa , chaand kee raushanee men sabakuchh badaa shaant aur saumy thaa , saaraa vaataavaraṇa badaa hee mohak prateet ho rahaa thaa .

“ tum chaand ko dekh rahe ho , vo kitanaa khoobasoorat hai ! Vo saaree raat isee tarah chamakataa rahegaa , hamen sheetalataa pahunchaa_egaa , lekin kal subah fir sooraj nikal jaayegaa , aur sooraj kee raushanee to kaheen adhik tej hotee hai , usee kee vajah se ham din men khoobasoorat pedon , pahaadon aur pooree prakriti ko saapha –saapha dekh paate hain , main to kahoongaa ki chaand kee koii zarurat hee naheen hai…. Usakaa astitv hee bekaar hai !!”

“ are ! Ye aap kyaa kah rahe hain, aisaa bilakul naheen hai ”- samuraa_ii bolaa, “ chaand aur sooraj bilakul alag -alag hain , donon kee apanee-apanee upayogitaa hai , aap is tarah donon kee tulanaa naheen kar sakate hain .”, samuraaii bolaa.

“to isakaa matalab tumhe apanee samasyaa kaa hal pataa hai . Har insaan doosare se alag hotaa hai , har kisee kee apanee -apanee khoobiyaan hotee hain , aur vo apane -apane tareeke se is duniyaa ko laabh pahunchaataa hai ; bas yahee pramukh hai baaki sab gaud hai “, sanyaasee ne apanee baat pooree kee.

Friends, hamen bhee khud ko doosaron se compare naheen karanaa chaahie , agar auron ke andar kuchh qualities hain to hamaare andar bhee ka_ii guṇa hain , par shaayad ham apane guṇaon ko kam aur doosaron ke guṇaon ko adhik aankate hain , hakeekat to ye hai kee ham sab unique hain aur sabhee kisee n kisee roop men special hain .

Ralph aldo emerson ne kahaa bhee hai , “main jis vyakti se bhee milataa hoon vah kisee naa kisee roop men mujhase behatar hai.”

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