Monday , 13 February 2017
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Shattila Ekadashi

shattil-ekaadashee

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षट्तिला एकादशी व्रत वधि (Shattila Ekadasi Vrat Vidhi)

कथा के पश्चात इस एकादशी का जो व्रत विधान है वह जानते हैं. व्रत विधान के विषय में जो पुलस्य ऋषि ने दलभ्य ऋषि को बताया वह यहां प्रस्तुत है. ऋषि कहते हैं माघ का महीना पवित्र और पावन होता है इस मास में व्रत और तप का बड़ा ही महत्व है. इस माह में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को षट्तिला (Magha Krishna Paksha Shattila Ekadashi) कहते हैं. षट्तिला एकादशी के दिन मनुष्य को भगवान विष्णु के निमित्त व्रत रखना चाहिए. व्रत करने वालों को गंध, पुष्प, धूप दीप, ताम्बूल सहित विष्णु भगवान की षोड्षोपचार से पूजन करना चाहिए. उड़द और तिल मिश्रित खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाना चाहिए. रात्रि के समय तिल से 108 बार Šৠँ नमो भगवते वासुदेवाय स्वाहा इस मंत्र से हवन करना चाहिए.

इस व्रत में तिल का छ: रूप में दान करना उत्तम फलदायी होता है. जो व्यक्ति जितने रूपों में तिल का दान करता है उसे उतने हज़ार वर्ष स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है. ऋषिवर ने जिन 6 प्रकार के तिल दान की बात कही है वह इस प्रकार हैं 1. तिल मिश्रित जल से स्नान 2. तिल का उबटन 3. तिल का तिलक 4. तिल मिश्रित जल का सेवन 5. तिल का भोजन 6. तिल से हवन. इन चीजों का स्वयं भी प्रयोग करें और किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण को बुलाकर उन्हें भी इन चीज़ों का दान दें.

इस प्रकार जो षट्तिला एकादशी  का व्रत रखते हैं भगवान उनको अज्ञानता पूर्वक किये गये सभी अपराधों से मुक्त कर देते हैं और पुण्य दान देकर स्वर्ग में स्थान प्रदान करते हैं. इस कथन को सत्य मानकर जो भग्वत् भक्त यह व्रत करता हैं उनका निश्चित ही प्रभु उद्धार करते हैं.

Shattila Ekadasi Vrat

एक समय दालभ्य ऋषि ने पुलस्त्य ऋषि से पूछा कि हे महाराज, पृथ्वी लोक में मनुष्य ब्रह्महत्यादि महान पाप करते हैं, पराए धन की चोरी तथा दूसरे की उन्नति देखकर ईर्ष्या करते हैं। साथ ही अनेक प्रकार के व्यसनों में फँसे रहते हैं, फिर भी उनको नर्क प्राप्त नहीं होता, इसका क्या कारण है?

वे न जाने कौन-सा दान-पुण्य करते हैं जिससे उनके पाप नष्ट हो जाते हैं। यह सब कृपापूर्वक आप कहिए। पुलस्त्य मुनि कहने लगे कि हे महाभाग! आपने मुझसे अत्यंत गंभीर प्रश्न पूछा है। इससे संसार के जीवों का अत्यंत भला होगा। इस भेद को ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र तथा इंद्र आदि भी नहीं जानते परंतु मैं आपको यह गुप्त तत्व अवश्य बताऊँगा।

उन्होंने कहा कि माघ मास लगते ही मनुष्य को स्नान आदि करके शुद्ध रहना चाहिए। इंद्रियों को वश में कर काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या तथा द्वेष आदि का त्याग कर भगवान का स्मरण करना चाहिए। पुष्य नक्षत्र में गोबर, कपास, तिल मिलाकर उनके कंडे बनाना चाहिए। उन कंडों से 108 बार हवन करना चाहिए।

उस दिन मूल नक्षत्र हो और एकादशी तिथि हो तो अच्छे पुण्य देने वाले नियमों को ग्रहण करें। स्नानादि नित्य क्रिया से निवृत्त होकर सब देवताओं के देव श्री भगवान का पूजन करें और एकादशी व्रत धारण करें। रात्रि को जागरण करना चाहिए।

उसके दूसरे दिन धूप-दीप, नैवेद्य आदि से भगवान का पूजन करके खिचड़ी का भोग लगाएँ। तत्पश्चात पेठा, नारियल, सीताफल या सुपारी का अर्घ्य देकर स्तुति करनी चाहिए-

हे भगवान! आप दीनों को शरण देने वाले हैं, इस संसार सागर में फँसे हुअओं का उद्धार करने वाले हैं। हे पुंडरीकाक्ष! हे विश्वभावन! हे सुब्रह्मण्य! हे पूर्वज! हे जगत्पते! आप लक्ष्मीजी सहित इस तुच्छ अर्घ्य को ग्रहण करें।

इसके पश्चात जल से भरा कुंभ (घड़ा) ब्राह्मण को दान करें तथा ब्राह्मण को श्यामा गौ और तिल पात्र देना भी उत्तम है। तिल स्नान और भोजन दोनों ही श्रेष्ठ हैं। इस प्रकार जो मनुष्य जितने तिलों का दान करता है, उतने ही हजार वर्ष स्वर्ग में वास करता है।

1. तिल स्नान, 2. तिल का उबटन, 3. तिल का हवन, 4. तिल का तर्पण, 5 तिल का भोजन और 6. तिलों कादानये तिल के 6 प्रकार हैं इनके प्रयोग के कारण यह षटतिला एकादशी कहलाती है। इस व्रत के करने से अनेक प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। इतना कहकर पुलस्त्य ऋषि कहने लगे कि अब मैं तुमसे इस एकादशी की कथा कहता हूँ।

एक समय नारदजी ने भगवान श्रीविष्णु से यही प्रश्न किया था और भगवान ने जो षटतिला एकादशी का माहात्म्य नारदजी से कहा- सो मैं तुमसे कहता हूँ। भगवान ने नारदजी से कहा कि हे नारद! मैं तुमसे सत्य घटना कहता हूँ। ध्यानपूर्वक सुनो।

प्राचीनकाल में मृत्युलोक में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह सदैव व्रत किया करती थी। एक समय वह एक मास तक व्रत करती रही। इससे उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया। यद्यपि वह अत्यंत बुद्धिमान थी तथापि उसने कभी देवताअओं या ब्राह्मणों के निमित्त अन्न या धन का दान नहीं किया था। इससे मैंने सोचा कि ब्राह्मणी ने व्रत आदि से अपना शरीर शुद्ध कर लिया है, अब इसे विष्णुलोक तो मिल ही जाएगा परंतु इसने कभी अन्न का दान नहीं किया, इससे इसकी तृप्ति होना कठिन है।

भगवान ने आगे कहा- ऐसा सोचकर मैं भिखारी के वेश में मृत्युलोक में उस ब्राह्मणी के पास गया और उससे भिक्षा माँगी। वह ब्राह्मणी बोली- महाराज किसलिए आए हो? मैंने कहा- मुझे भिक्षा चाहिए। इस पर उसने एक मिट्टी का ढेला मेरे भिक्षापात्र में डाल दिया। मैं उसे लेकर स्वर्ग में लौट आया। कुछ समय बाद ब्राह्मणी भी शरीर त्याग कर स्वर्ग में आ गई। उस ब्राह्मणी को मिट्टी का दान करने से स्वर्ग में सुंदर महल मिला, परंतु उसने अपने घर को अन्नादि सब सामग्रियों से शून्य पाया।

घबराकर वह मेरे पास आई और कहने लगी कि भगवन् मैंने अनेक व्रत आदि से आपकी पूजा की परंतु फिर भी मेरा घर अन्नादि सब वस्तुओं से शून्य है। इसका क्या कारण है? इस पर मैंने कहा- पहले तुम अपने घर जाओ। देवस्त्रियाँ आएँगी तुम्हें देखने के लिए। पहले उनसे षटतिला एकादशी का पुण्य और विधि सुन लो, तब द्वार खोलना। मेरे ऐसे वचन सुनकर वह अपने घर गई। जब देवस्त्रियाँ आईं और द्वार खोलने को कहा तो ब्राह्मणी बोली- आप मुझे देखने आई हैं तो षटतिला एकादशी का माहात्म्य मुझसे कहो।

उनमें से एक देवस्त्री कहने लगी कि मैं कहती हूँ। जब ब्राह्मणी ने षटतिला एकादशी का माहात्म्य सुना तब द्वार खोल दिया। देवांगनाओं ने उसको देखा कि न तो वह गांधर्वी है और न आसुरी है वरन पहले जैसी मानुषी है। उस ब्राह्मणी ने उनके कथनानुसार षटतिला एकादशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और रूपवती हो गई तथा उसका घर अन्नादि समस्त सामग्रियों से युक्त हो गया।

अत: मनुष्यों को मूर्खता त्यागकर षटतिला एकादशी का व्रत और लोभ न करके तिलादि का दान करना चाहिए। इससे दुर्भाग्य, दरिद्रता तथा अनेक प्रकार के कष्ट दूर होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Shattila Ekadashi Puja Mantra

कृष्ण कृष्ण कृपालुस्त्वमगतीनां गतिर्भव ।
संसारार्णवमग्नानां प्रसीद पुरुषोत्तम ॥
नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते विश्वभावन ।
सुब्रह्मण्य नमस्तेSस्तु महापुरुष पूर्वज ॥
गृहाणार्ध्यं मया दत्तं लक्ष्म्या सह जगत्पते ।

पापकर्म से मुक्ति के लिए तिल खाएं, पिएं और लगाएं

In English

Sttila Ekadasi vow Vdi (Shattila Ekadasi Vrat Vidhi)

After the story of the Ekadasi vow legislation know that. Lent legislation concerning the Pulsy Rishi Rishi told Dlby’s what. Wiseman says the month of Magha is sacred and the holy month of fasting and penance, is very important. In the waning months of the upcoming Ekadashi Sttila (Magha Krishna Paksha Shattila Ekadashi) says. Sttila Ekadasi day should be fast for the sake of man, Lord Vishnu. Those who lent smell, floral, sun lamp, including betel should worship of Vishnu’s Sodsopchar. Lentils and sesame porridge mixed with a desire to seek God. Ø 108 times mole at night Š ৠ Bgwate Vasudeway Swaha Namo mantra should fire.

In this fast sesame six pays off as good to donate. All forms of the person who provides the mole as many thousand years it has ranked in heaven. The charity said that the 6 types Hrisivr sesame sesame mixed with water that are as 1. 2. 3. rouge sesame sesame sesame meal Tilak 4. 5. 6. Sesame sesame mixed with plenty of water fire . Use of these things and a top Brahmin himself called them donate these things.

Thus observes Ekadashi Sttila God made them all together in ignorance frees crimes and provide space in heaven by virtue charity. As a man of truth to this statement, which lent it does Bgwatr Lord delivers them certainly do.

Sttila Ekadasi vow

Dalby pulastya sage sage once asked Sir, earth man Brhmahtyadi great sin in public, another theft of money and are jealous of seeing other’s growth. Remain trapped in the various addictions, but they would not get the hell, what is the reason?

What they do not do charity so that their sins are destroyed. You say it favorably. Muni said pulastya O blest! You have asked me a serious question. It will do immense good to the world of organisms. This distinction, Brahma, Vishnu, Rudra and Indra and do not even know the secret ingredients of course, but I will tell you.

He takes Magha man must be purified by bathing etc. Senses subdued, anger, greed, attachment, pride, envy and malice, and remind ourselves of God’s sacrifice. Pushya constellation dung, cotton, sesame mix should make their Kande. Kandon should fire them 108 times.

If the original star and Ekadashi on that day that the good virtue to accept the rules. Bath continual action to retire the gods and worship the deity Lord Sri Ekadasi vow to hold. Should night awakening.

The next day the sun-lamp, oblation and worship God as the enjoyment of slang. Thereafter Petha, coconut, custard apple or nut by the praise should offer water

Oh God! You are sheltering the poor, to save the world Huaon are caught in the ocean. Punderikaksh Hey! Biswbavn Hey! Subramanya O! O father! Jagtpte Hey! Lakshmi offer water with you to accept this trivial.

Then, filled with water today (pitcher) Donate to Brahman and Brahman cows and sesame brunette is better to deserve. Sesame bath and food are both excellent. The man who has the gift of the Tilo, equally dwells in heaven for a thousand years.

1. Sesame bath, 2. rouge sesame, sesame 3. fire, 4. Sesame libation, sesame meal and 5 of 6. Dan Tilo These are 6 types of mole. It is called because of their use Sttila Ekadashi. The vow to various sins are destroyed. So saying, the sage saying pulastya story I’ll tell you this Ekadashi.

At one time the same question and did Nardji Srivishnu Lord God said to the Sttila Ekadashi majestic Nardji sleep I tell you. God told Nardji S.S.P. I tell you the truth, event. Listen carefully.

In the dead of old lived a Brahmani. He always used to fast. At one time he had been fasting one month. It was his emaciated body. Although she never said she was extremely intelligent Dewataaon or Brahmins did not intended for food or money donations. Brahmani I thought it was a fast and cleanse your body, the longer it will get so Vishnulok but he did not ever donated food, it is hard to be its fulfillment.

God said further that in the dead disguised as a beggar, thinking I went to Brahmani asked him alms. What brings the Brahmani bid chef? I said I should hand out. But he put it in an earthen cob my begging bowl. I returned with him in heaven. After a while, the body abandoned Brahmani was in heaven. The Brahmani was beautiful castle in the soil to the charity of heaven, but he found his house empty of crops all materials.

He came to me and said that I had upset many vow Bgvn but still my house, and your worship of all things sprout is zero. What is the reason for this? I said it before you go home. Devstriya will come to see you. Listen to them before Sttila Ekadashi virtue and law, then open the door. I hear the word, such as your home. Devstriya came when asked to open the door and then came to see me when you bid Brahmani Sttila Ekadashi majestic tell me.

One of them said that I say Devstri. Brahmani also heard when the door was opened majestic Sttila Ekadashi. Dewangnaon seen him that neither he nor Gandharwi is demonic but is Manushi as before. The Brahmani lent their stated Sttila Ekadashi. She was beautiful and ripe beauty of its impact and its home grown crops containing all material.

Therefore, humans forsake foolishness and greed by the vow of Ekadashi Sttila Tiladi should donate. This misfortune, poverty and leads to salvation through various troubles.

Sttila Ekadasi ritual chants

Krishna Krishna Gtirbv Kripalustvmgtinan.
Purushottam Snsaraarnvmgnanan Prasid.
Hello Hello Biswbavn Pundrikaksh.
Hi S Subramanya ancestor soul can not create object.
Or on Grihanardhyn Duttn Jagtpte Lcshmya co.

For freedom from evil mole Eat, Drink, and Find

 

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