Thursday , 13 July 2017
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धूर्त भेड़िया

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धूर्त भेड़िया

धूर्त भेड़िया

ब्रह्मारण्य नामक एक बन था। उसमें कर्पूरतिलक नाम का एक बलशाली हाथी रहता था। देह में और शक्ति में सबसे बड़ा होने से बन में उसका बहुत रौब था। उसे देख सारे बाकी पशु प्राणी उससे दूर ही रहते थे।

जब भी कर्पूरतिलक भूखा होता तो अपनी सूँड़ से पेड़ की टहनी आराम से तोड़ता और पत्ते मज़े में खा लेता। तालाब के पास जा कर पानी पीता और पानी में बैठा रहता। एक तरह से वह उस वन का राजा ही था। कहे बिना सब पर उसका रौब था। वैसे ना वह किसी को परेशान करता था ना किसी के काम में दखल देता था फिर भी कुछ जानवर उससे जलते थे।

जंगल के भेड़ियों को यह बात अच्छी नहीं लगती थी। उन सब ने मिलकर सोचा, “किसी तरह इस हाथी को सबक सिखाना चाहिये और इसे अपने रास्ते से हटा देना चाहिये। उसका इतना बड़ा शरीर है, उसे मार कर उसका मांस भी हम काफी दिनों तक खा सकते हैं। लेकिन इतने बड़े हाथी को मारना कोई बच्चों का खेल नहीं। किसमें है यह हिम्मत जो इस हाथी को मार सके?”

उनमें से एक भेड़िया अपनी गर्दन ऊँची करके कहने लगा, “उससे लड़ाई करके तो मैं उसे नहीं मार सकता लेकिन मेरी बुद्धिमत्ता से मैं उसे जरूर मारने में कामयाब हो सकता हूँ।” जब यह बात बाकी भेड़ियों ने सुनी तो सब खुश हो गये। और सबने उसे अपनी करामत दिखाने की इज़ाज़त दे दी।

चतुर भेड़िया हाथी कर्पूरतिलक के पास गया और उसे प्रणाम किया। “प्रणाम! आपकी कृपा हम पर सदा बनाए रखिये।”
कर्पूरतिलक ने पूछा, “कौन हो भाई तुम? कहाँ से आये हो? मैं तो तुम्हें नहीं जानता। मेरे पास किस काम से आये हो?”

“महाराज! मैं एक भेड़िया हूँ। मुझे जंगल के सारे प्राणियों ने आपके पास भेजा है। जंगल का राजा ही सबकी देखभाल करता है, उसीसे जंगल की शान होती है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि अपने जंगल में कोई राजा ही नहीं। हम सब ने मिलकर सोचा कि आप जैसे बलवान को ही जंगल का राजा बनाना चाहिये। इसलिये राज्याभिषेक का मुहुर्त हमने निकाला है। यदि आपको कोई आपत्ति नहीं हो तो आप मेरे साथ चल सकते हैं और हमारे जंगल के राजा बन सकते हैं।”

ऐसी राजा बनने की बात सुनकर किसे खुशी नहीं होगी? कर्पूरतिलक भी खुश हो गया। अभी थोड़ी देर पहले तो मैं कुछ भी नहीं था और एकदम राजा बन जाऊँगा यह सोचकर उसने तुरन्त हामी भर दी। दोनो चल पडे। भेड़िया कहने लगा, “मुहुर्त का समय नज़दीक आ रहा है, जरा जल्दी चलना होगा हमें।”

भेड़िया जोर जोर से भागने लगा और उसके पीछे कर्पूरतिलक भी जैसे बन पड़े, भागने की केाशिश में लगा रहा। बीच में एक तालाब आया। उस तालाब में ऊपर ऊपर तो पानी दिखता था। लेकिन नीचे काफी दलदल था। भेड़िया छोटा होने के कारण कूद कर तालाब को पार कर गया और पीछे मुड़कर देखने लगा कि कर्पूरतिलक कहाँ तक पहुँचा है।

कर्पूरतिलक अपना भारी शरीर लेकर जैसे ही तालाब में जाने लगा तो दलदल में फंसता ही चला गया। निकल न पाने के कारण में वह भेड़िये को आवाज़ लगा रहा था, “अरे! दोस्त, मुझे जरा मदद करोगे? मैं इस दलदल से निकल नहीं पा रहा हूँ।”
लेकिन भेड़िये का ज़वाब तो अलग ही आया, “अरे! मूर्ख हाथी, मुझ जैसे भेड़िये पर तुमने यकीन तो किया लेकिन अब भुगतो और अपनी मौत की घड़ियाँ गिनते रहो, मैं तो चला!” यह कहकर भेड़िया खुशी से अपने साथियों को यह खुशखबरी देने के लिये दौड़ पड़ा।

बेचारा कर्पूरतिलक!

इसीलिये कहा गया है कि एकदम से किसी पर यकीन ना करने में ही भलाई होती है।

   Hindi to English

Brahmana was a name. In it there was a powerful elephant named Curturbilak. Having the largest in the body and being in power, he had a lot of power in the form. Seeing all the other animal animals lived away from him.

Whenever the camper was hungry, his twist breaks the tree’s sprig with ease and ate the leaves in the fun. Go to the pool and drink water and sit in the water. In a way he was the king of that forest. Without saying it was his robe. By the way, he did not harass anyone or interfered in somebody’s work, even then some animals used to burn him.

The wolf of the forest did not like this thing. All of them thought together, “Somehow this elephant should teach a lesson and remove it from its own way. It has such a big body, it can kill its flesh and eat it too much. But killing such a large elephant There is no children’s play. Who has this courage that can kill this elephant? ”

One of them wolf raised his neck and said, “I can not kill him by fighting him, but with my wisdom, I can surely kill him.” When this thing was heard by the other wolves, they were all happy. And all of them allowed him to show his work.

The clever wolf went to the elephant camper and worshiped him. “Grace, please, always bless us.”
Karpattikilak asked, “Who are you brothers? Where have you come from? I do not know you, what work have I come from?”

“Sir, I am a wolf, I have sent all the beasts of the forest to you, and the king of the forest carries all the care of the forest, it is the beauty of the forest. But the regret is that there is no king in his jungle. We all thought together that you should make a strong man like the king of the forest, so we have brought out the coronation of the coronation. If you do not have any objection then you can walk with me and our forest. Aja can become. ”

Who will not be happy to hear such a king? Krpurtilk was happy. Just a little while ago, I did not have anything and would become a king immediately, thinking that he immediately filled his heart. Both lying on. The wolf said, “The time of fasting is approaching, we will have to go quickly.”

The wolf began to run away from the rocks and behind him, he became like a camel, being trapped in the escape. Meanwhile there was a pond. The water looked upwards in that pond. But was down significantly bog. Wolf crossed the pond by jumping due to being small and looked back and saw where the camper is reaching.

When the camper took his heavy body as soon as he entered the pond, he got stuck in the swamps. In the absence of getting out, he was shouting to the wolf, “Hey friend, will you help me a bit? I can not get out of this bog.”
But the wolf’s answer was different, “Hey fool! You wolf like me, but you did believe, but now you have to wait and count the watches of your death, I just run!” By saying this, the wolf gladly ran to give this good news to his companions.

Poor camper!

That is why it has been said that there is good to not believe in anyone at all.

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