Wednesday , 20 September 2017
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अपने हर काम में कुछ इस तरह ढूंढें आनंद

something-like-this-in-your-work

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एक गांव में कुछ मजदूर पत्थर के खंभे बना रहे थे। उधर से एक संत गुजरे। उन्होंने एक मजदूर से पूछा- यहां क्या बन रहा है? उसने कहा- देखते नहीं पत्थर काट रहा हूं? संत ने कहा- हां, देख तो रहा हूं। लेकिन यहां बनेगा क्या? मजदूर झुंझला कर बोला- मालूम नहीं।

यहां पत्थर तोड़ते-तोड़ते जान निकल रही है और इनको यह चिंता है कि यहां क्या बनेगा। साधु आगे बढ़े। एक दूसरा मजदूर मिला। संत ने पूछा- यहां क्या बनेगा? मजदूर बोला- देखिए साधु बाबा, यहां कुछ भी बने।

चाहे मंदिर बने या जेल, मुझे क्या। मुझे तो दिन भर की मजदूरी के रूप में 100 रुपए मिलते हैं। बस शाम को रुपए मिलें और मेरा काम बने। मुझे इससे कोई मतलब नहीं कि यहां क्या बन रहा है। साधु आगे बढ़े तो तीसरा मजदूर मिला। साधु ने उससे पूछा- यहां क्या बनेगा? मजदूर ने कहा- मंदिर।

इस गांव में कोई बड़ा मंदिर नहीं था। इस गांव के लोगों को दूसरे गांव में उत्सव मनाने जाना पड़ता था। मैं भी इसी गांव का हूं। ये सारे मजदूर इसी गांव के हैं। मैं एक- एक छेनी चला कर जब पत्थरों को गढ़ता हूं तो छेनी की आवाज में मुझे मधुर संगीत सुनाई पड़ता है। मैं आनंद में हूं।

कुछ दिनों बाद यह मंदिर बन कर तैयार हो जाएगा और यहां धूमधाम से पूजा होगी। मेला लगेगा। कीर्तन होगा। मैं यही सोच कर मस्त रहता हूं। मेरे लिए यह काम, काम नहीं है। मैं हमेशा एक मस्ती में रहता हूं। मंदिर बनाने की मस्ती में। मैं रात को सोता हूं तो मंदिर की कल्पना के साथ और सुबह जगता हूं तो मंदिर के खंभों को तराशने के लिए चल पड़ता हूं।

बीच-बीच में जब ज्यादा मस्ती आती है तो भजन गाने लगता हूं। जीवन में इससे ज्यादा काम करने का आनंद कभी नहीं आया। साधु ने कहा- यही जीवन का रहस्य है मेरे भाई। बस नजरिया का फर्क है।

In English

Some laborers were making stone pillars in a village. From here on, a sage passed. He asked a laborer – what is happening here? He said – I do not see the stone cut? The saint said – Yes, I have been watching. But what will happen here? Embarrassed the worker – do not know.

Here the stones are going to break and they worry about what will happen here. The sadhu moved forward Got a second worker. The saint asked – What will happen here? Called the laborer – See Sadhu Baba, nothing happens here.

Whether it is a temple or a prison, what do I do I get 100 rupees in the form of day-to-day wage. Just get the money in the evening and become my job. I do not mean what’s going on here. If the sadhu got ahead then the third worker got. The monk asked him – what will be done here? The worker said – the temple

There was no big temple in this village. People of this village had to go to celebrate another village. I am also of this village. These workers belong to this village. I used to play one chisni while sculpting stones, then in the chisel’s voice, I have heard some melodious music. I am in bliss.

After a few days, this temple will be ready and it will be worshiped with pomp. Fair will take place. Kirtan will be I am happy with this thinking. This work for me, is not working. I always live in a fun. In the fun of building a temple If I sleep at night then with the imagination of the temple and I wake up in the morning, I will go to the temple to cover the pillars.

When there is more fun in between then I sing the hymns. Never had the joy of doing more work in life. The sadhu said – This is the secret of life my brother Just the difference of perspective

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