Thursday , 9 February 2017
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भारतीय संस्कृति की आत्मा – हमारे त्योहार

soul-of-indian-culture-our-festivals

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58प्राचीन काल से माना जाता है कि भारत त्योहारों का देश है, जहाँ विभिन्न समाज और संस्कृति के लोग रहते हैं, यहाँ विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं, कुछ त्योहार राष्ट्रीय, धार्मिक, होते हैं, तो कुछ प्रांतीय, जो बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाए जाते हैं समय दर समय बीतने  के पश्यात आज भारत के सभी समुदाय के लोग भिन्न – भिन्न राज्यों में निवास करने लगे हैं जो व्यवसाय या नौकरी के कारण देश के एक राज्य से दूसरे राज्य में रहते हैं जो अपने त्योहार बड़े हर्ष के साथ मानते ही हैं और साथ ही राज्यबार या क्षेत्रबार त्योहार का भी लुफ्ट उठाते हैं, और अपने योगदान के साथ सहर्ष सम्मिलित भी होते हैं|

इसका फयदा यह हुआ कि अब हमारे पास त्योहारों की संख्या पहले से ज़्यादा है, अब हम राष्ट्रीय त्योहार के साथ धार्मिक और क्षेत्रबार त्योहार भी मानते हैं, जिससे हमें हर त्योहार का इतिहास, उसे मानने का कारण, और बिधि का पता चलता है, और हम एक नयी संस्कृति से अवगत होते हैं, और उस संस्कृति के संस्कारों से, हम जिन त्योहारों को मानते हैं उनमें से कोई भी ऐसा त्योहार नहीं जो व्यक्तिगत रूप से मनाया जाता है, जिसको मानने में घर, परिवार, कुटुंभ, रिश्तेदार, समुदाय की आवश्यकता न हो, हमारी भारतीय संस्कृति में हर त्योहार सभी साथ मिलकर मनाए जाते हैं, त्योहार मानने का मर्म यही है कि हम सभी एकता और सदभावना के साथ रहे और एक दूसरे के सुख –दुख में सहभगी बने, जैसे त्योहारों में सब एक दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं, वैसे ही सभी एक दूसरों का ध्यान रखें, त्योहार बनाए ही इसीलिए गये हैं, कि समय-समय पर हम सभी एक दूसरें के संपर्क में रहें, यही हमारी एकता का मूल मंत्र है, और यही हमारी संस्कृति की असली पहचान भी|

Soul of Indian Culture – Our Festivals

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