Sunday , 18 February 2018
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ऐसे थे हमारे भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री

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जब लालबहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री थे तब वह एक बार कपड़े की दुकान में साड़ियां खरीदने गए। दुकान मालिक शास्त्री जी को देखकर बहुत खुश हुआ। शास्त्री जी ने दुकानदार से कहा कि वे जल्दी में हैं और उन्हें चार-पांच साड़ियां चाहिए।

दुकान का मैनेजर शास्त्री जी को एक से बढ़ कर एक साड़ियां दिखाने लगा। सभी कीमती साडि़यां थीं। शास्त्री जी बोले- भाई, मुझे इतनी महंगी साड़ियां नहीं चाहिए। कम कीमत वाली दिखाओ।
इस पर मैनेजर ने कहा- सर आप इन्हें अपना ही समझिए, दाम की तो कोई बात ही नहीं है। यह तो हम सबका सौभाग्य है कि आप पधारे।
शास्त्री जी उसका आशय समझ गए। उन्होंने कहा- आपको साड़ी की कीमत लेनी होगी। मैं जो तुम से कह रहा हूं उस पर ध्यान दो और मुझे कम कीमत की साड़ियां ही दिखाओ और उनकी कीमत बताते जाओ। तब मैनेजर ने शास्त्री जी को थोड़ी सस्ती साड़ियां दिखानी शुरू कीं।
शास्त्री जी ने कहा-ये भी मेरे लिए महंगी ही हैं। और कम कीमत की दिखाओ। मैनेजर को एकदम सस्ती साड़ी दिखाने में संकोच हो रहा था। शास्त्री जी इसे भांप गए। उन्होंने कहा- दुकान में जो सबसे सस्ती साड़ियां हों, वह दिखाओ। मुझे वही चाहिए।
आखिरकार मैनेजर ने उनके मनमुताबिक साड़ियां निकालीं। शास्त्री जी ने उनमें से कुछ चुन लीं और उनकी कीमत अदा कर चले गए। उनके जाने के बाद बड़ी देर तक दुकान के कर्मचारी और वहां मौजूद कुछ ग्राहक शास्त्री जी की सादगी की चर्चा करते रहे। वे उनके प्रति श्रद्धा से भर उठे
In English

When Lal Bahadur Shastri was the Prime Minister of the country, he once went to buy saris in the clothes shop. The shop owner was very pleased to see Shastri ji. Shastri told the shopkeeper that he is in a hurry and he needs four to five saris.

The shop manager started showing Shastri ji a saris more than one. There were all precious saris. Shastriji said, brother, I do not want such expensive sarees. Show low price
On this the manager said – Sir, consider them to be your own, there is no question of price. It’s a good luck to all of us that you fall.
Shastri understood her intentions. He said – you have to take the price of saris. Pay attention to what I am saying to you and show me low cost saris and tell them their price. Then the manager started showing Shastriji a bit cheap saris.
Shastri ji said – These are also expensive for me. Show less and price. The manager was hesitant to show the cheapest sarees. Shastri ji knew this. They said, show the cheapest sarees in the shop. I need the same
After all, the manager took out his man-made sarees. Shastri chose some of them and paid the price. After his departure, the shop staff and some of the guests present there talked about the simplicity of Shastriji. They were filled with reverence for them

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