Sunday , 3 September 2017
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Tag Archives: भगवान

भगवान की चाहत

एक साधु नदी के पास ध्यान कर रहे थे, तभी एक युवा व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए पूछा, “गुरूजी, मैं आपका शिष्य बनना चाहता हूँ।” साधु ने कहा, “क्यों?” युवा व्यक्ति ने एक पल के लिए सोचा और फिर कहा, “क्यों कि मैं भगवान को पाना चाहता हूँ|” गुरु बाहर की ओर आए, उन्होंने उस व्यक्ति की गर्दन को पकड़ा, ... Read More »

भगवान श्रीब्रह्मा(bhagavaan shree brahma)

महाप्रलय के बाद भगवान नारायण दीर्घ कालतक योगनिद्रा में निमग्र रहे। योगनिद्रा से जगने के बाद उनकी नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट हुआ। जिसकी कर्णिकाओंपर स्वयम्भू श्रीब्रह्मा प्रकट हुए। उन्होंने अपने नेत्रों को चारों ओर घुमाकर शून्य में देखा। इस चेष्टा से चारों दिशाओं में उनके चार मुख प्रकट हो गये। जब चारों ओर देखने से उन्हें कुछ भी ... Read More »

मंगलवार व्रत की कथा

hanumaan jee

भगवान शिव के एकादश रुद्रावतारों में से एक हैं हनुमानजी। कलयुग में हनुमान जी उपासना से शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। यदि सच्चे मन से महाबली पवन पुत्र की आराधना की जाए तो वह अपने भक्त का हर मनोरथ पूर्ण कर देते हैं। प्राचीन समय की बात है किसी नगर में एक ब्राह्मण दंपत्ति रहते थे उनके कोई संतान ... Read More »

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर

Padmanabha Swamy Mandir Story

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल राज्य के तिरुअनन्तपुरम शहर में स्थित है। यह मंदिर जगत पालक भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर केरल के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों में से एक है। मान्यता है कि देश में भगवान विष्णु को समर्पित 108 देशम है और श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर भी उनमें से एक हैं। श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर का धार्मिक ... Read More »

मधुबन के मंदिरो में भगवान बस रहा है

Madhuban Ke Mandiro Main Bhagwan

मधुबन के मंदिरो में भगवान बस रहा है । पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥ आध्यात्म का यह सोना पारस ने खुद दिया है, ऋषिओं ने इस धरा से निर्वाण पद लिया है । सदिओं से इस शिखर का स्वर्णिम सुयश रहा है, पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥ मधुबन के मंदिरों ... Read More »

शबरी की प्रेमभक्ति

  भगवान श्रीराम के अनन्य भक्तों में एक भील जाति की कन्या भी थी श्रमणा। जिसे बाद में शबरी के नाम से जाना गयाl उसे जब भी समय मिलता, वह भगवान की पूजा- अर्चना करती। बड़ी होने पर जब उसका विवाह होने वाला था तो अगले दिन भोजन के लिए काफी बकरियों की बलि दी जानी थी। यह पता लगते ... Read More »

कौवे की परेशानी

Kauve kee pareshaanee

यदि आपको सुखी रहना है तो किसी से अपनी तुलना नहीं करो । ‘आप’ आप ही हो। आप के समान कोई नहीं। फिर क्यों दूसरों से अपनी तुलना करना, इर्षा करना ? आइये इस बात को एक कहानी के माध्यम से समझते हैं – एक कौआ जंगल में रहता था और अपने जीवनसे संतुष्ट था। एक दिन उसने एक हंस को देखा,  “यह हंस कितना ... Read More »

देव प्रतिमा निर्माण विधि

Dev pratimaa nirmaaṇa vidhi

    सूत जी बोले – ब्राह्मणों ! मैं प्रतिमा का शास्त्रसम्मत लक्षण कहता हूं । उत्तम लक्षणों से रहित प्रतिमा का पूजन नहीं करना चाहिए । पाषाण, काष्ठ, मृत्ति का, रत्न, ताम्र एवं अन्य धातु इनमें से किसी की भी प्रतिमा बनायी जा सकती है । उनके पूजन से सभी अभीष्ट फल प्राप्त होते हैं । मंदिर के माप ... Read More »

मैं तो कृष्ण हो गया !

Main to kriṣṇa ho gayaa

  भगवान ! मेरा उद्धार करो ! मेरी नौका पार लगाओ । मेरे पापों के बोझ से बस, यह डूबना ही चाहती है । बड़ी जीर्ण है यह, और फिर ऊपर से बोझ बेतौल है । विपरीत बयार बह रही है, चारों और घोर अंधकार छाया हुआ है, हाथों हाथ नहीं सूझता । खेने की कला भी नहीं मालूम । ... Read More »

मोक्ष संन्यासिनी गोपियां

moksh sanyasini gopiya

  कुछ लोग प्रतिदिन सकामोपासना कर मनवाञ्छित फल चाहते हैं, दूसरे कुछ लोग यज्ञादि के द्वारा स्वर्ग की तथा (कर्म और ज्ञान) योग आदि के द्वारा मुक्ति के लिए पार्थना करते हैं, परंतु हमें तो यदुनंदन श्रीकृष्ण के चरणयुगलों के ध्यान में ही सावधानी के साथ लगे रहने की इच्छा है । हमें उत्तम लोक से, दम से, राजा से, स्वर्ग ... Read More »