Wednesday , 17 January 2018
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Tag Archives: श्रीराम

मरते वक्त बालि ने, अंगद से कही थी ये तीन बातें . .

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मरते वक्त बालि ने, अंगद से कही थी ये तीन बातें रामायण में जब श्रीराम ने बालि को बाण मारा तो वह घायल होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा था। इस अवस्था में जब पुत्र अंगद उसके पास आया तब बालि ने उसे ज्ञान की कुछ बातें बताई थीं। बालि ने कहा- देश काल और परिस्थितियों को समझो। किसके साथ कब, ... Read More »

श्रीराम-राज्याभिषेक

shree raam-raajyaabhishek

रात्रि में विश्राम के बाद प्रात: काल विभीषण ने श्रीराम से हाथ जोड़कर कहा- प्रभो! अब आप स्नान करके दिव्य वस्त्र, मालांए तथा अंगराग का सदुपयोग करें। उसके बाद सुंदर व्यंजनों को स्वीकार कर मुझे कुछ दिन अपने आतिथ्य-सत्कार का सौभाग्य प्रदान करें। भगवान श्रीराम ने कहा –विभीषण! मेरे लिए इस समय सत्य का आश्रय लेने वाले महाबाहु भरत बहुत ... Read More »

केवट के भाग्य (Fate of Kevat)

Naiya le chal parli pr Bhajan

  श्रीराम के बार-बार मना करने पर भी अयोध्यावासी वापस नहीं लौट रहे थे। श्रीराम भी उनके दु:ख से दु: खी थे। पूरी रात अभी बाकी थी। तभी श्रीराम ने सुमन्त्र को रथ ले चलने के लिए कहा और सीता तथा लक्ष्मण के साथ अयोध्या वासियों को सोता हुआ छोड़कर वे चल दिए। जब राम, लक्ष्मण, सीता गंगा पार करने ... Read More »

शबरी की प्रेमभक्ति

  भगवान श्रीराम के अनन्य भक्तों में एक भील जाति की कन्या भी थी श्रमणा। जिसे बाद में शबरी के नाम से जाना गयाl उसे जब भी समय मिलता, वह भगवान की पूजा- अर्चना करती। बड़ी होने पर जब उसका विवाह होने वाला था तो अगले दिन भोजन के लिए काफी बकरियों की बलि दी जानी थी। यह पता लगते ... Read More »

श्रीराम का पत्नी प्रेम

Shreeraam kaa patnee prem

वनगमन के समय सेवा में चलने के लिए श्रीसीता जी का जब आग्रह देखा गया, तब उनकी शारीरिक सुकुमारता आदि के स्नेह से जैसी प्रेमपूर्ण शिक्षादी गयी, वह स्नेह की सीमा का सूचक है । परंतु जब यह लक्षण देखने में आया कि सीता जी को यदि हठ करके रोका गया तो इनके प्राण ही नहीं बचेंगे तब उनको प्रेमपूर्वक ... Read More »

एक ऐसा तीर्थ जहां स्वयं प्रभु राम ने की थी शिव जी की आराधना

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग में एकादशवें पर है श्री “रामेश्वर”। रामेश्वरतीर्थ को ही सेतुबन्ध तीर्थ कहा जाता है। यह स्थान तमिलनाडु के रामनाथम जनपद में स्थित है। यहाँ समुद्र के किनारे भगवान श्री रामेश्वरम का विशाल मन्दिर शोभित है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर श्रीरामचंद्रजी ने लंका के अभियान के पूर्व शिव की अराधना करके उनकी मूर्ति की स्थापना की ... Read More »

माता सुमित्रा

महाराजा दशरथ की कई रानियाँ थीं। महारानी कौसल्या पट्टमहिषी थीं। महारानी कैकेयी महाराजा को सर्वाधिक प्रिय थीं और शेष में श्री सुमित्रा जी ही प्रधान थीं। महाराज दशरथ प्रायः कैकेयी के महल में ही रहा करते थे। सुमित्रा जी महारानी कौसल्या के सन्न्किट रहना तथा उनकी सेवा करना अपना धर्म समझती थीं। पुत्रेष्टि –यज्ञ समाप्त होने पर अग्नि के द्वारा ... Read More »