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Tag Archives: devaraaj

परंपरा का निर्माण

जीवन के साथ आयुर्वेद का गहरा संबंध होने के कारण पितामह ब्रह्मा ने आयुर्वेद के पठन – पाठन की परंपरा स्थापित की । ब्रह्मा जी ने इस चिकित्सा – शास्त्र को अपने मानसपुत्र दक्ष को और दक्ष ने अश्विनीकुमारों को तथा अश्विनीकुमारों ने देवराज इंद्र को पढ़ाया । इस तरह यह परंपरा आजतक चलती चली आ रही है । यद्यपि …

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आखिर क्यों पड़ी थी समुद्र मंथन की जरूरत..

Aakhir Kyo Pari Samunder Manthan Ki Jarurat Srory

एक बार शिवजी के दर्शन के लिए दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कैलाश जा रहे थे। मार्ग में उन्हें देवराज इन्द्र मिले। इन्द्र ने दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों को भक्तिपूर्वक प्रणाम किया। तब दुर्वासा ऋषि ने इन्द्र को आशीर्वाद देकर विष्णु भगवान का पारिजात पुष्प प्रदान किया। इन्द्रासन के गर्व में चूर देवराज इन्द्र ने उस पुष्प को …

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महाभारत का कारण

Mahaabhaarat kaa kaaraṇa

एक समय राजाधिराज युधिष्ठिर अपने भाइयों सहित श्रीकृष्ण के साथ मयदानव द्वारा बनाई सभा में स्वर्ण सिंहासन पर देवराज इन्द्र के समान विराजमान थे। मयदानव निर्मित भवन में दुर्योधन को जल-स्थल का भान नहीं हुआ और दुर्योधन गिर पड़े। इस पर भीम ने हास्य-व्यंग्य किया जिससे की दुर्योधन ने अपमानित महसूस किया। इस प्रसंग पर लोग कहते हैं कि दुर्योधन …

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गणेश जी को दूर्वा(दूब) क्यों चढ़ाई जाती है ?

Gaṇaesh jee

पौराणिक मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। इस दैत्य के कोप से स्वर्ग और धरती पर त्राही-त्राही मची हुई थी। अनलासुर ऋषि-मुनियों और आम लोगों को जिंदा निगल जाता था। दैत्य से त्रस्त होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और प्रमुख ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे। सभी ने शिवजी से प्रार्थना की कि …

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