Breaking News

Tag Archives: gyan

ब्रह्मविद्या का ज्ञान

सतयुग में महर्षि दध्यंग आथर्वण अग्रणी ब्रह्मवेत्ता के रूप में विख्यात थे। देव शिरोमणि इंद्र उनकी ख्याति सुनकर एक दिन उनके आश्रम में पहुँचे। इंद्र ने कहा, ‘महर्षि, मेरी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मुझे वरदान देने का वचन दें। महर्षि आतिथ्य स्वीकार को बहुत महत्त्व देते थे, अतः उन्होंने वचन देकर उनसे बैठने को कहा। महर्षि ने पूछा, ‘अतिथिवर, …

Read More »

जब हवा चलती है….”When the wind moves …”

hawa

बहुत  समय  पहले  की  बात  है , आइस्लैंड के उत्तरी छोर पर  एक  किसान  रहता  था . उसे  अपने  खेत  में  काम  करने  वालों  की  बड़ी  ज़रुरत  रहती  थी  लेकिन  ऐसी  खतरनाक  जगह , जहाँ  आये  दिन  आंधी  –तूफ़ान  आते  रहते हों , कोई  काम  करने  को  तैयार  नहीं  होता  था . किसान  ने  एक  दिन  शहर  के  अखबार  में  इश्तहार  दिया  कि  उसे   खेत  में   काम  करने  वाले एक मजदूर की  ज़रुरत  है . किसान से मिलने कई  लोग  आये …

Read More »

गुरु के प्रति सच्ची दक्षिणा यही है

प्राचीनकाल के एक गुरु अपने आश्रम को लेकर बहुत चिंतित थे। गुरु वृद्ध हो चले थे और अब शेष जीवन हिमालय में ही बिताना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह चिंता सताए जा रही थी कि मेरी जगह कौन योग्य उत्तराधिकारी हो, जो आश्रम को ठीक तरह से संचालित कर सके। उस आश्रम में दो योग्य शिष्य थे और दोनों ही …

Read More »

हमारे गुरु मिले ब्रम्हज्ञानी

dile mein na jaane sataguru kya rang bhar diya hai

हमारे गुरु मिले ब्रम्हज्ञानी, पाई अमर निशानी । गुरु मिले ब्रम्हज्ञानी हमारे गुरु मिले ब्रम्हज्ञानी काग पलट गुरु हंसा किन्हे, दीन्हि नाम निशानी । हंसा पहुंचे सुख-सागर पर, मुक्ति भरे जहाँ पानी ॥ गुरु मिले ब्रम्हज्ञानी, हमारे गुरु मिले ब्रम्हज्ञानी ॥ जल विच कुम्भ,कुम्भ विच जल है, बाहर भीतर पानी । विकस्यो कुम्भ जल जल ही समाना, यह गति विरले …

Read More »

आखिरी सन्देश

Akhri Sandesh Story

ऋषिकेश के एक प्रसिद्द महात्मा बहुत वृद्ध हो चले थे और उनका अंत निकट था . एक दिन उन्होंने सभी शिष्यों को बुलाया और कहा , ” प्रिय शिष्यों मेरा शरीर जीर्ण हो चुका है और अब मेरी आत्मा बार -बार मुझे इसे त्यागने को कह रही है , और मैंने निश्चय किया है कि आज के दिन जब सूर्य …

Read More »

जानिए क्यों की जाती है मंदिर की परिक्रमा तथा क्या है इसका महत्त्व ?

somanathdhamshiv

ईश्वर की आराधना करने के तरीके अनेक हैं, इसमें पूरे विधि-विधान से पूजा करने से लेकर उपवास रख कर भी ईश्वर को प्रसन्न करने जैसी रीति है। लेकिन इसके अलावा भी एक और अंदाज है भगवान को याद करने तथा उनसे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का। यह तरीका है परिक्रमा का, जो किसी धार्मिक स्थल के ईर्द-गिर्द की जाती है। …

Read More »

आकर भक्ती सीखना हमारे कीर्तन मे

Adi Guru Shri Krishan

आप भी आना संग ग्वालों को भी लाना आकर माखन खाना हमारे कीर्तन मे आप भी आना संग अर्जुन को भी लाना आकर ज्ञान सीखना हमारे कीर्तन मे आप भी आना संग मीयर्रा को भी लाना आकर भक्ती सीखना हमारे कीर्तन मे [To English wish4me] Aap Bhi Aana Sang Gvalon Ko Bhi Lana Aakar Maakhan Khana Hamare Kirtan Me Aap …

Read More »

आकर ज्ञान सीखना हमारे कीर्तन मे

Naval Rasiya Ho Naval Rasiya Bhajan

आप भी आना संग ग्वालों को भी लाना आकर माखन खाना हमारे कीर्तन मे आप भी . संग अर्जुन को भी लाना आकर ज्ञान सीखना हमारे कीर्तन मे आप भी आना संग मीयर्रा को भी लाना आकर भक्ती सीखना हमारे कीर्तन मे [To English Wish4me] Aap Bhi Aana Sang Gvalon Ko Bhi Lana Aakar Maakhan Khana Hamare Kirtan Me Aap …

Read More »

कुछ ना भेद रहा मान मन मे

raam naam lau laagee

हे गुरु तुम हो मेरे निधन वेद पूरण है तुज़मे समाए रामायण है तेरा सार गीता में तो शब्ध टुमरे महाभारत में तेरा ज्ञान कुछ… ये संसार तुम ही रचाए लेवत तुम हो सबका भर करम धरम सब तेरे अर्पण कैसे करूँ में तेरा बयान कुछ… [To English wish4me] Hey Guru tum ho mere Nidhan Ved puran hai Tujme samaye …

Read More »

तीन मछलियां

Teen-machhliyan

एक सरोवर मेँ तीन दिव्य मछलियाँ रहती थीँ। वहाँ की तमाम मछलियाँ उन तीनोँ के प्रति ही श्रध्दा मेँ बँटी हुई थीँ। एक मछली का नाम व्यावहारिकबुद्धि था, दुसरी का नाम मध्यमबुद्धि और तीसरी का नाम अतिबुद्धि था। अतिबुद्धि के पास ज्ञान का असीम भंडार था। वह सभी प्रकार के शास्त्रोँ का ज्ञान रखती थी। मध्यमबुद्धि को उतनी ही दुर तक सोचनेँ की आदत …

Read More »