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रामायण में भोग नहीं, त्याग है

रामायण में भोग नहीं, त्याग है*भरत जी नंदिग्राम में रहते हैं, शत्रुघ्न जी उनके आदेश से राज्य संचालन करते हैं।**एक रात की बात हैं,माता कौशिल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी। नींद खुल गई । पूछा कौन हैं ?**मालूम पड़ा श्रुतिकीर्ति जी हैं ।नीचे बुलाया गया ।**श्रुतिकीर्ति जी, जो सबसे …

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तो इसलिए महामना प्रार्थना पत्र पर लिख देते थे क्षमा

    बनारस कहें या काशी यहां के काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के कुछ ही समय बाद की बात है। कभी-कभी जब अध्यापक उद्दंड छात्रों को उनकी गलतियों के लिए आर्थिक दंड दे दिया करते थे। मगर छात्र दंड माफ कराने मदन मोहन मालवीय जी के पास पहुंच जाते और महामना माफ भी कर देते थे। यह बात शिक्षकों …

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गुरु कोई भी हो सकता है, बस! सीखने की इच्छा होनी चाहिए

  महादेव गोविंद रानाडे जब मुंबई हाईकोर्ट के जज थे। उन्हें नई-नई भाषाएं सीखने का शौक था। जब उन्हें पता चला कि उनका बारबर दोस्त बहुत अच्छी बांग्ला जानता था। तो उन्होंने उसे गुरु बना दिया। जितनी देर बारबर उनकी हजामत करता वे उससे बांग्ला सीखते। यह देखकर उनकी पत्नी बोलीं औरों को पता चलेगा कि कि हाईकोर्ट के जज …

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यकीन कीजिए! एक चाकू से भी ले सकते हैं सीख

यकीन कीजिए! एक चाकू से भी ले सकते हैं सीख

जब स्वामी विवेकानंद शिकागो की धर्मसभा में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। तब वह यात्रा पर जाने से पूर्व वह स्वामी रामकृष्ण परमहंस की धर्मपत्नी गुरु मां शारदा से आशीर्वाद लेने गए। चरण स्पर्श के पश्चात गुरु मां से वह बोले, ‘मुझे भारतीय संस्कृति पर बोलने के लिए अमेरिका से आमंत्रण मिला है। मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए।’ मां …

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किसी ने सही कहा है, सम्मान चाहिए तो पहले सम्मान देना सीखें

bhagatsingh

बहुत पुरानी बात है। एक व्यक्ति अक्सर धर्मग्रंथों का मजाक उड़ाया करता था। वह नास्तिक था। वह ईश्वर में विश्वास करने वालों का सम्मान नहीं करता था। वह उनसे वैचारिक बहस न करके, कुतर्कों के जरिए उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश करता था। एक दिन वह एक पादरी के पास पहुंचा। उसका मकसद पादरी को नीचा दिखाना था। उसने पादरी …

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बापू की असाधारण और अक्षम्य गलती

बापू की असाधारण और अक्षम्य गलती

एक दिन मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) शाम की प्रार्थना सभा में बोलते-बोलते बहुत परेशान हो गए। उन्होंने कहा, जो गलती मुझसे हुई है, वह असाधारण और अक्षम्य है। कई बरस पहले मुझे इसका पता लगा, पर तभी मैंने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस कारण से कई वर्ष नष्ट हो गए। मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया है। दरिद्रनारायण की …

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