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Tag Archives: naaraayan

भगवान श्रीब्रह्मा(bhagavaan shree brahma)

SHREE BRAHMA JI

महाप्रलय के बाद भगवान नारायण दीर्घ कालतक योगनिद्रा में निमग्र रहे। योगनिद्रा से जगने के बाद उनकी नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट हुआ। जिसकी कर्णिकाओंपर स्वयम्भू श्रीब्रह्मा प्रकट हुए। उन्होंने अपने नेत्रों को चारों ओर घुमाकर शून्य में देखा। इस चेष्टा से चारों दिशाओं में उनके चार मुख प्रकट हो गये। जब चारों ओर देखने से उन्हें कुछ भी …

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भगवन्नाम समस्त पापों को भस्म कर देता है

maanas se : navadha bhakti

कन्नौज के आचारच्युत एवं जातिच्युत ब्राह्मण अजामिल ने कुलटा दासी को पत्नी बना लिया था । न्याय – अन्याय से जैसे भी धन मिले, वैसे प्राप्त करना और उस दासी को संतुष्ट करना ही उसका काम हो गया था । माता पिता की सेवा और अपनी विवाहिता साध्वी पत्नी का पालन भी कर्तव्य है, यह बात उसे सर्वथा भूल चुकू …

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देवी षष्ठी की कथा

Devi Shashti Ki Katha

प्रियव्रत नाम से प्रसिद्ध एक राजा हो चुके हैं । उनके पिता का नाम था स्वायम्भुव मनु । प्रियव्रत योगिराज होने के कारण विवाह करना नहीं चाहते थे । तपस्या में उनकी विशेष रुचि थी, परंतु ब्रह्मा जी की आज्ञा तथा सत्प्रयत्न के प्रभाव से उन्होंने विवाह कर लिया । विवाह के पश्चात् सुदीर्घकाल तक उन्हें कोई भी संतान नहीं …

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द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अर्चा विग्रह – 5) श्री केदारेश्वर

Dvadash Jyotirling -5

केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नाम श्रृंगपर अवस्थित हैं । शिखर के पूर्व अलकनंदा के सुरम्य तट पर बदरीनारायण अवस्थित हैं और पश्चिम में मंदाकिनी के किनारे श्रीकेदारनाथ विराजमान हैं । यह स्थान हरिद्वार से लगभग 150 मील और ऋषिकेश से 132 मील उत्तर हैं । भगवान विष्णु के अवतार नर नारायण ने भरतखण्ड के बदरिकाश्रम में तप किया था …

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एक बार भगवान नारायण अपने वैकुंठलोक में सोये हुए थे

maanas se : navadha bhakti

एक बार भगवान नारायण अपने वैकुंठलोक में सोये हुए थे। स्वप्न में वे क्या देखते हैं कि करोड़ों चंद्रमाओं की कांतिवाले, त्रिशूल-डमरूधारी, स्वर्णाभरण-भूषित, सुरेंद्र वंदित, अणिमादि सिद्धिसेवित त्रिलोचन भगवान शिव प्रेम और आनंदातिरेक से उन्मत्त होकर उनके सामने नृत्य कर रहे हैं। उन्हें देखकर भगवान विष्णु हर्ष-गद्गद हो सहसा शय्या पर उठकर बैठा गए और कुछ देर तक ध्यानस्थ बैठे …

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भगवान विष्णु का स्वप्न

maanas se : navadha bhakti

एक बार भगवान नारायण अपने वैकुंठलोक में सोये हुए थे। स्वप्न में वे क्या देखते हैं कि करोड़ों चंद्रमाओं की कांतिवाले, त्रिशूल-डमरूधारी, स्वर्णाभरण-भूषित, सुरेंद्र वंदित, अणिमादि सिद्धिसेवित त्रिलोचन भगवान शिव प्रेम और आनंदातिरेक से उन्मत्त होकर उनके सामने नृत्य कर रहे हैं। उन्हें देखकर भगवान विष्णु हर्ष-गद्गद हो सहसा शय्या पर उठकर बैठा गए और कुछ देर तक ध्यानस्थ बैठे …

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कैसे करें अक्षय तृतीया पर पूजा ताकि मिले पूरा फल

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अक्षय तृतीया को आखातीज के नाम से भी जाना जाता है। आखातीज का व्रत वैशाख माह में सुदी तीज को किया जाता है। इस दिन श्री लक्ष्मी जी सहित भगवान नारायण की पूजा की जाती है। पहले भगवान नारायण और लक्ष्मी जी की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराना चाहिए। उन्हें पुष्प और पुष्प-माल्यार्पण करना चाहिए। भगवान की धूप, दीप …

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आखिर क्यों पड़ी थी समुद्र मंथन की जरूरत..

Aakhir Kyo Pari Samunder Manthan Ki Jarurat Srory

एक बार शिवजी के दर्शन के लिए दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कैलाश जा रहे थे। मार्ग में उन्हें देवराज इन्द्र मिले। इन्द्र ने दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों को भक्तिपूर्वक प्रणाम किया। तब दुर्वासा ऋषि ने इन्द्र को आशीर्वाद देकर विष्णु भगवान का पारिजात पुष्प प्रदान किया। इन्द्रासन के गर्व में चूर देवराज इन्द्र ने उस पुष्प को …

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नृसिंहावतार

nrsinhaavataar

हिरण्याक्ष के वध से उसका भाई हिरण्यकशिपु बहुत दु:खी हुआ। वह भगवान का घोर विरोधी बन गया। उसने अजेय बनने की भावना से कठोर तप किया। उसे देवता, मनुष्य या पशु आदि से ना मरने का वरदान मिला। वरदान पाकर वह अजेय हो गया। हिरण्यकशिपु का शासन इतना कठोर था कि देव- दानव सभी उसके चरणों की वंदना करते रहते …

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जीवन का मैंने सौंप दिया सब भार तुम्हारे हाथों

yadi naath ka naam dayaanidhi hai

जीवन का मैंने सौंप दिया सब भार तुम्हारे हाथों में उद्धार पतन अब मेरा है सरकार तुम्हारे हाथों में . हम उनको कभी नहीं भजते वो हमको कभी नहीं तजते अपकार हमारे हाथों में उपकार तुम्हारे हाथों में जीवन का मैंने सौंप दिया सब भार तुम्हारे हाथों में हम पतित हैं, तुम हो पतित पावन हम नर हैं, तुम नारायण …

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