Friday , 19 January 2018
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इसीलिए कहते हैं मां होती है दुनिया में महान

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एक बार एक जिज्ञासु व्यक्ति ने स्वामी विवेकानंद से पूछा, ‘संसार में मां की महानता क्यों गाई जाती है?’ स्वामीजी ने मुस्कुराते हुए कहा, पांच सेर का एक पत्थर ले आओ।

जब वह व्यक्ति पत्थर ले आया, तो स्वामीजी ने उससे कहा, ‘इसे कपड़े से लपेट कर पेट पर बांध लो और चौबीस घंटे बाद मेरे पास आना।’

उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया, लेकिन कुछ घंटों में ही उसके लिए काम करना मुश्किल हो गया। उसे दिन में ही तारे दिखाई देने लगे। तब वह स्वामी जी के पास पहुंचा और बोला, ‘अब में इसे नहीं उठा सकता, सवाल पूछने की इतनी बड़ी सजा?’

स्वामीजी ने कहा, इस पत्थर का बोझ तुमसे कुछ घंटे भी नहीं सहा गया और मां पूरे नौ महीने तक शिशु का बोझ उठाती है।

इस बोझ के साथ वह सारा काम करती है, वह कभी परेशान नहीं होती। मां से ज्यादा सहनशील कौन है? इसलिए मां की महिमा सबसे ज्यादा है।

Hindi to English

Once a curious person asked Swami Vivekananda, ‘Why is the greatness of the mother sung in the world?’ Swamiji said smiling, bring a stone of five cedar.

When the person brought the stone, Swamiji told him, ‘wrap it with cloth and put it on the stomach and come to me twenty four hours later.’

That person did the same, but it was difficult to work for him in just a few hours. The stars started to appear in the day itself. Then he reached Swami Ji and said, ‘Now can not raise it in this, such a big punishment to ask questions?’

Swamiji said, the burden of this stone has not touched you for a few hours and the mother takes the burden of the baby for nine months.

With this burden, he does all the work, he never gets worried. Who is more tolerant than mother? That’s why mother’s glory is highest.

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