Wednesday , 20 September 2017
Latest Happenings
Home » Gyan Ganga » Guru_Profile » Mahabharat » महाभारत युद्ध में तीर भी बोलते थे यह है प्रमाण

महाभारत युद्ध में तीर भी बोलते थे यह है प्रमाण

the-arrows-also-used-to-speak-in-the-mahabharata-war

the-arrows-also-used-to-speak-in-the-mahabharata-war

arjun and karan

                                                   KARAN AND ARJUN OF MAHABHARAT

द्वापरयुग में महाभारत युद्ध के समय की बात है, कौरवों और पांडवों में युद्ध चल रहा था। कर्ण, अर्जुन को मारने की शपथ ले चुके थे। कर्ण लगातार बाणों की बारिश कर रहा था यह देख भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का रथ जमीन में नीचे झुका दिया।

कर्ण का एक तीर, अर्जुन के मुकुट को हटाते हुए चला गया। अचानक वह तीर लौटकर कर्ण के तरकश में वापिस आ गया। यह देख कर्ण को आश्चर्य हुआ। तीर ने कहा, ‘हे कर्ण! तुम अगली बार ठीक से निशाना लगाना।’ कर्ण, तीर को बोलते देख हैरान था।

कर्ण ने तीर से पूछा, ‘आप कौन हैं?’ तीर ने कहा, ‘मैं साधारण तीर नहीं हूं। मैं महासर्प अश्वसेन हूं। एक बार अर्जुन ने खांडव वन को अग्नि से जला दिया था। जिससे मेरा पूरा परिवार जलकर मर गया। अतः मैं अर्जुन से बदला लेना चाहता हूं।’

कर्ण ने कहा, ‘मित्र मैं तुम्हारी भावना की कद्र करता हूं लेकिन यह युद्ध मैं अपने पुरुषार्थ से जीतना चाहता हूं। अनीति की विजय के बजाए मैं नीति के साथ लड़ते हुए मर जाना ज्यादा उत्तम समझता हूं।’ महासर्प अश्वसेन( तीर) कर्ण की प्रशंसा करता हुआ बोला, ‘हे कर्ण वास्तव में तुम धर्म में प्रतिष्ठित हो। तुम्हारी कीर्ति उज्जवल रहेगी।’

संक्षेप में

कर्ण की नीति और धर्म ही वह गुण है जो उन्हें महाभारत के महानायकों की सूची में लाता है। लक्ष्य की पूर्णता के लिए संकल्पित होने के बावजूद धर्म के साथ समझौता न करनी ही सच्ची वीरता है। ऐसा ही वीर दुनिया को नई दिशा देता है।

Hindi to English

It is a matter of time of Mahabharata war in Dwaparuga, war was going on between the Kauravas and the Pandavas. Karna had taken an oath to kill Arjun. Seeing that Karna was raining incessantly by arrows, Lord Krishna observed the chariot of Arjuna in the ground.

An arrow of Karna went away, removing Arjun’s crown. Suddenly he returned and returned to Karna’s quiver. Seeing Karna was surprised to see this. Arrow said, ‘O Karna! You should aim precisely next time. ‘ Karna was surprised to see the arrows.

Karna asked the arrow, ‘Who are you?’ The arrow said, ‘I am not an ordinary arrow. I am the Chief of the Assassins. Once Arjun burnt the Khandav forest with fire. My entire family died after burning. So, I want to take revenge from Arjun. ‘

Karna said, ‘Friends, I respect your spirit but I want to win this war with my happiness.’ Instead of winning the policy of non-violence, I think it is better to die while fighting with the policy. Mahasarupa Ashwaseen (Arrow) said, praising Karna, “O Karna, you are truly prestigious in religion. Your kirti will be bright. ‘

in short

Karna’s policy and religion is the quality that brings him to the list of Mahabharata’s super-heroes. Despite being convinced for the fulfillment of the goal, it is true bravery not to compromise with religion. Such a hero gives new direction to the world.
Google Translate for Business:Translator ToolkitWebsite Translator

Comments

comments