Monday , 17 July 2017
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सुखी जीवन का मूलमंत्र

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सुखी जीवन का मूलमंत्र

सुखी जीवन का मूलमंत्र

जापान के सम्राट यामातो का एक राज्यमंत्री था। जिसका नाम था ‘ओ-चो-सान’। उसका परिवार सौहार्द के लिए बड़ा प्रसिद्ध था। हालांकि उसके परिवार में लगभग एक हजार सदस्य थे, पर उनके बीच एकता का अटूट संबंध था। सभी सदस्य साथ-साथ रहते और साथ-साथ ही खान खाते थे। फिर उनमें द्वेष कलह की बात ही कहां?

ओ-चो-सान के परिवार के सौहार्द की बात यामातो के कानों तक पहुंची। सत्यता की जांच करने के लिए एक दिन वे स्वयं वृद्ध मंत्री के घर तक आ पहुंचें।

स्वागत सत्कार और शिष्टाचार की साधारण रस्में समाप्त हो जाने के बाद यामातो ने पूछा, ‘महाशय! मैंने आपके परिवार की एकता और मिलनसारिता की कई कहानियां सुनी हैं। क्या आप बताएंगे कि एक हजार से भी अधिक व्यक्तियों वाले आपके परिवार में यह सौहार्द और स्नेह संबंध किस तरह बना हुआ है।’

ओ-चो-सान वृद्धावस्था के कारण अधिक देर तक बातें नहीं कर सकता था। अतः उसने अपने पौत्र को संकेत से कलम-दवात और कागज लाने के लिए कहा। उन चीजों के आ जाने के बाद उसने अपने कांपते हाथों से कोई सौ शब्द लिखकर वह कागज सम्राट को दे दिया।

उत्सुकतावश सम्राट यामातो ने उस कागज पर नजर डाली तो वह चकित रह गए। दरअसल कागज में एक ही शब्द को सौ बार लिखा गया था और वह शब्द था, ‘सहनशीलता’।

सम्राट को चकित और अवाक् देख ओ-चो-सान ने अपनी कांपती हुई आवाज से कहा, ‘मेरे परिवार के सौहार्द का रहस्य बस इसी एक शब्द में निहित है। सहनशीलता का यह महामंत्र ही हमारे बीच एकता का धागा अब तक पिरोए हुए है। इस महामंत्र को जितनी बार दुहराया जाए, कम ही है।’

In English

The emperor of Japan was a minister of state for yamato. Whose name was ‘O-Cho-san’. Her family was famous for her happiness. Although there were about one thousand members in his family, there was an unbreakable bond of unity among them. All members lived side by side and Khan used to eat together. Then where is the matter of hatred of contentment?

The talk of the harmony of O-Cho-san’s family reached Yamato’s ears. One day they come to the senior minister’s house to investigate the truth.

After the simple rituals of reception and courtesy ends, Yamato asked, ‘sir! I have heard many stories about the unity and harmony of your family. Will you tell you how this cohabitation and affection relationship in your family with more than a thousand people is made?

O-Cho-san could not talk for long because of old age. Therefore, she asked her grandson to bring paper and paper from the sign. After those things came, he wrote a hundred words with his trembling hands and handed it over to the emperor.

Curiously, when Emperor Yamato looked at the paper, he was astonished. In fact, the same word was written hundred times in the paper and the word was ‘tolerance’.

Astonished and awakened by the emperor, O-Cho-san said with his shaky voice, “The mystery of my family’s cordiality lies in just one word. This Mahamantra of tolerance is the thread of unity between us. The number of times this Mahamantra is repeated, is less.

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