Monday , 18 September 2017
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कृष्ण और सुदामा का प्रेम बहुत गहरा था।

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कृष्ण और सुदामा का प्रेम बहुत गहरा था। प्रेम भी इतना कि कृष्ण, सुदामा को रात दिन अपने साथ ही रखते थे।

कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही करते।

एक दिन दोनों वनसंचार के लिए गए और रास्ता भटक

गए। भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक

ही फल लगा था।

कृष्ण ने घोड़े पर चढ़कर फल को अपने हाथ से तोड़ा। कृष्ण ने फल के छह टुकड़े

किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा सुदामा को दिया।

सुदामा ने टुकड़ा खाया और बोला,

‘बहुत स्वादिष्ट! ऎसा फल कभी नहीं खाया। एक

टुकड़ा और दे दें। दूसरा टुकड़ा भी सुदामा को मिल

गया।

सुदामा ने एक टुकड़ा और कृष्ण से मांग

लिया। इसी तरह सुदामा ने पांच टुकड़े मांग कर खा

लिए।

जब सुदामा ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो कृष्ण ने

कहा, ‘यह सीमा से बाहर है। आखिर मैं भी तो भूखा

हूं।

मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं

करते।’ और कृष्ण ने फल का टुकड़ा मुंह में रख

लिया।

मुंह में रखते ही कृष्ण ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह

कड़वा था।

कृष्ण बोले,

‘तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?

उस सुदामा का उत्तर था,

‘जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक

कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?

सब टुकड़े इसलिए

लेता गया ताकि आपको पता न चले।

दोस्तों जँहा मित्रता हो वँहा संदेह न हो, आओ

कुछ ऐसे रिश्ते रचे…

कुछ हमसे सीखें , कुछ हमे

सिखाएं. अपने इस ग्रुप को कारगर बनायें।

किस्मत की एक आदत है कि

वो पलटती जरुर है

और जब पलटती है,

तब सब कुछ पलटकर रख देती है।

इसलिये अच्छे दिनों मे अहंकार

न करो और

खराब समय में थोड़ा सब्र करोl

Translate Into Hindi to English

The love of Krishna and Sudama was very deep. Love was so much that Krishna kept Sudama with him in the night.
There was no work, both would work together.

One day went for both the forestry and wandered the way
went. Hungry and thirsty came under a tree. One on the tree
It was the only fruit.

Krishna climbed the horse and broke the fruit with his hand. Krishna has six pieces of fruit
According to his habit, given the first piece to Sudama.
Sudama ate the piece and said,
‘Very tasty! This fruit never eaten. One
Piece and give it. The second piece also finds Sudama
Gaya.

Sudama demands a piece and Krishna
took. Similarly, Sudama asks for five pieces and eat
for.

When Sudama asked for the last piece, then Krishna
Said, ‘It is out of bounds. After all i am so hungry
I am

I love you, but you do not love me
do.’ And Krishna put the piece of fruit in his mouth
took.

Keeping his mouth, Krishna spit it out, because he
Was bitter.
Krishna said,
‘You are not crazy, how did you eat so bitter fruit?’

‘The answer to that Sudama was,
‘The hands with which to eat very sweet fruits, one
How to complain of bitter fruit?

All pieces therefore
It was taken so you do not know.

Friends, if there is some friendship, do not doubt, come
Some such relationships have been created …

Some of us learn, some of us
Teach Make this group effective.

A habit of luck is that
That’s the turnover

And when it turns out,

Then everything reverses.
So ego in good days
Do not do
Have a little patience in bad times.

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