Wednesday , 5 July 2017
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स्वयं की अलग पहचान बनाना है तो कीजिए यह उपाय

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एक गांव में एक किसान रहता था। वह रोज सुबह झरनों से साफ पानी लाने के लिए दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वह डंडे में बांधकर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था। उनमें से एक घड़ाकहीं से फूटा हुआ था, और दूसरा एकदम सही था। इस तरह रोज घर पहुंचते-पहुंचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था।

सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचाता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है। दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पहुंचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार जाती है। फूटा घड़ा ये सब सोचकर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया। उसने किसान से कहा, ‘मैं खुद पर शर्मिंदा हूं और आपसे माफी मांगना चाहता हूं।’

किसान ने पूछा, ‘क्यों? तुम किस बात से शर्मिंदा हो?’ फूटा घड़ा बोला, ‘शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूं, और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुंचाना चाहिए था, बस उसका आधा ही पहुंचा पाया हूं। मेरे अंदर ये बहुत बड़ी कमी है और इस वजह से आपकी मेहनत बर्बाद होती रही है।’

किसान को घड़े की बात सुनकर थोडा दुख हुआ और वह बोला, ‘कोई बात नहीं, मैं चाहता हूं कि आज लौटते वक्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो। घड़े ने वैसा ही किया। वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता आया। ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर घर पहुंचते-पहुंचते फिर उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था।’ वह मायूस होकर किसान से माफी मांगने लगा।

किसान बोला, ‘शायद तुमने ध्यान नहीं दिया। पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे।’ वो बस तुम्हारी तरफ ही थे। सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था। ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अंदर की कमी को जानता था, और मैंने उसका फायदा उठाया। मैंने तुम्हारी तरफ वाले रास्ते पर रंग-बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे।

तुम रोज थोड़ा-थोड़ा कर उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया। आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूं और अपने घर को सुन्दर बना पाता हूं। तुम्हीं सोचो, ‘यदि तुम जैसे हो, वैसे नहीं होते तो भला क्या मैं ये सब कुछ कर पाता?

संक्षेप में

हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी है, पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं। यानी आप जैसे हैं वैसे ही रहिए। उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को वैसा ही स्वीकारना चाहिए जैसा वह है। उसकी अच्छाई पर ध्यान देना चाहिए। जब हम ऐसा करेंगे तब फूटा घड़ा भी अच्छे घड़े से कीमती हो जाएगा।

Hindi to English

A farmer lived in a village. He used to take two big jars to bring clean water from the waterfall every morning, which he used to hang in his stance and hang on both his shoulders. One of them was frayed from the wheels, and the other was perfect. Thus, reaching home every day, only one and a half cubit of water was saved by the farmer.

The right pitcher was proud of the fact that the whole water of the whole carries home and there is no shortage in it. On the other hand, the broken pot was embarrassed by the fact that he could reach half the water only and the farmer’s effort wasted. Thinking about all this, he became very disturbed and one day he did not stay with him. He said to the farmer, ‘I’m embarrassed myself and want to apologize to you.’

The farmer asked, ‘Why? What are you embarrassed about? ‘ ‘You probably do not know but I am out of place, and for the past two years, I have reached half the amount of water I should have reached home. This is a great reduction in me and because of this your hard work has been wasted. ‘

The farmer was a little sad to hear about the pitcher and said, ‘No problem, I want you to look at the beautiful flowers falling in the way while returning today. The pitcher did the same. He came looking at beautiful flowers across the way. By doing so, his sadness fell away, but when he reached home, half of the water had fallen. ‘ He desulted and apologized to the farmer.

The farmer said, ‘Maybe you did not care. All the flowers were on the way. ‘ They were just on your side. There was not even a single flower on the right pitcher. That’s because I always knew the shortcomings in you, and I took advantage of it. I had given seeds of colorful flowers on the road on your side.

You have to do a little bit of water every day and keep the whole path so beautiful. Because of you today, I can offer these flowers to God and make my house beautiful. You think, ‘If you were not as you are, would I have been able to do all this?’

in short

We all have some weakness within us, but these drawbacks make us unique. That’s exactly what you are like. Like that farmer, we must accept everyone as it is. He should pay attention to his goodness. When we do this then the blown pitcher will also become valuable from the good pitcher.

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