Wednesday , 5 July 2017
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सहिष्णुता के लिए जरूरी है धैर्य और विनम्रता

tolerance-is-necessary-for-patience-and-humility

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GuruAmardas-ji

GURU AMAR DAS JI

सिखों के तीसरे गुरु अमरदास जी के दामाद जेठाजी अत्यंत विनम्र और सहनशील व्यक्ति थे। वे गुरु अमरदास जी की बहुत सेवा करते थे। एक दिन उन्होंने जेठा जी और दूसरे दामाद रामा को एक चबूतरा बनाने के लिए कहा। दोनों ने चबूतरा बना दिया।

चबूतरे को देखकर गुरुजी बोले, ‘यह सही नहीं है। दुबारा से बनाओ।’ इस तरह दुबारा बनाने पर भी जब उन्हें पसंद नहीं आया तो उन्होंने इसे बार-बार बनवाया। ऐसा होने पर रामा ने अपना धैर्य खो दिया और उन्हें गुस्सा आ गया।।

रामा ने गुरुजी से कहा, ‘आप बूढ़े हो गए हैं। आपको स्वयं ही नहीं मालूम यह कैसे बनाना है।’ लेकिन जेठा जी बोले, ‘गुरुजी माफ कीजिएगा आप फिर से बताएं यह चबूतरा कैसे बनाना है।

मुझे आपकी बात समझ नहीं आ रही है ऐसे में यह चबूतरा कैसा बनाना है यह तय नहीं कर पा रहे हैं।’ गुरुजी जेठा के धैर्य और विनम्रता के कायल हो गए। यही जेठा जी आगे चलकर सिखो के चौथे गुरु रामदास के नाम से प्रसिद्ध हुए।

संक्षेप में

धैर्य और विनम्रता के बल पर बड़े से बड़े काम आसान किए जा सकते हैं। इसलिए इन भावों को अपने अंदर आत्मसात करना चाहिए।

Hindi to English

Jaida, son-in-law of Amar Das, the third guru of the Sikhs, was a very humble and tolerant person. They used to serve a lot of guru Amardas ji One day, he asked Jetha Ji and the other son-in-law to make Rama a platform. Both made the platforms.

Seeing the popple, Guruji said, ‘This is not right. Make it again. ‘ Even when they did not like it, they made it again and again. When this happened, Rama lost his patience and he got angry.

Rama told Guruji, ‘You have grown old. You do not know yourself how to make it. ‘ But Jetha ji said, ‘Guruji, forgive me. You tell me how to make this platform.

I am not able to understand your point of view, in such a situation, it is not possible to decide how to make the platform. ‘ The patience and humility of Guruji Jethla became convincing. This jetha ji became famous after the fourth Guru of the Sikhs, Ramdas.

in short

Great work can be made easier with patience and humility. Therefore, these expressions should be assimilated within themselves.

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