Monday , 18 December 2017
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विवेकानंद कहते थे – बंदरों की तरह होती हैं कठिनाइयां

vivekananda-used-to-say-difficulties-like-monkeys

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vivekananda kehte hai Bandaro ki tarah hoti hai kadnaiya

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घटना तब की है जब स्वामी विवेकानंद वृंदावन में थे। सड़क पर चल रहे थे। कुछ लाल मुंह के बंदर उनके पीछे पड़ गए। स्वामीजी भागने लगे। बंदर भी उन पर तेजी से आक्रमण करने लगे। तभी एक समझदार व्यक्ति ने कहा, भागो मत। इनके सामने डट कर खड़े रह जाओ। मुकाबला करो।

स्वामीजी ने वैसा ही किया और बंदर भाग गए। इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए स्वामीजी अपने शिष्यों से कहते थे, जीवन में कठिनाइयां भी इन बंदरों की तरह होती हैं। कठिनाइयों से भागने पर वे बढ़ती हैं और सामना करने पर हल हो जाती हैं।

खेतड़ी (राजस्थान) के महाराजा स्वामी विवेकानंद का बहुत सम्मान करते थे। स्वामीजी मूर्ति पूजा में विश्वास रखते थे, परंतु महाराज की सोच इससे ठीक विपरीत थी। एक बार महाराजा ने कहा, स्वामीजी मूर्ति में क्या ईश्वर होता है?

जिस कक्ष में यह चर्चा चल रही थी, उसमें महाराज का एक चित्र लगा था। स्वामीजी ने उनके नौकर से कहा, यह चित्र उतारो। नौकर ने ऐसा ही किया। इसके बाद स्वामीजी ने उससे कहा, इस चित्र पर थूक दो। सेवक यह दुस्साहस न कर सका।

इस पर स्वामीजी ने राजा से कहा, यह तो मात्र कागज का टुकड़ा है। इससे आपका अपमान नहीं होगा। फिर भी सेवक ने नहीं थूका। एक प्रकार से इस चित्र में आप पूरी तरह से विद्यमान हैं। इसलिए आपका यह श्रद्धालु-सेवक इसका अपमान नहीं कर सका। यही बात मूर्ति पूजा पर लागू होती है।

Hindi to English

The incident happened when Swami Vivekananda was in Vrindavan. walking down the street. Some red mouth monkeys followed them. Swamiji started running away. The monkey also started attacking them rapidly. Then a sensible person said, Do not run away. Stand out in front of them. Duke it out.

Swamiji did the same and the monkey fled. Referring to this incident, Swamiji used to say to his disciples that difficulties in life are also like these monkeys. On escaping from difficulties they grow and resolve on the face.

The Maharaja of Khetri (Rajasthan) had very respected Swami Vivekananda. Swamiji used to believe in idol worship, but Maharaj’s thinking was in sharp contrast. Once the Maharaja said, what is God in Swamiji statue?

The room in which this discussion was going was in which there was a picture of Maharaj. Swamiji asked his servant, take down this picture. The servant did the same. After this, Swamiji told him, spit on this picture. The servant could not misbehave.

On this, Swamiji said to the king, This is only a piece of paper. This will not offend you. Yet the servant did not spit. In a way you are completely present in this picture. That’s why your devotee-servant could not insult this. This is what applies to idol worship.

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