Thursday , 13 July 2017
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हम कल के लिए आज नहीं सोचते

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हम कल के लिए आज नहीं सोचते

हम कल के लिए आज नहीं सोचते

एक नगर में एक संपन्न सेठजी रहते थे। वह दिनभर खूब मेहनत से काम करते थे। एक दिन उन्हें न जाने क्या सूझा कि अपने मुनीम को बुलाकर कहा, ‘पता करो हमारे पास कितना धन है और कब तक के लिए पर्याप्त है?’

कुछ दिन बाद मुनीम हिसाब लेकर आया और सेठ जी से बोला, ‘जिस हिसाब से आज खर्चा हो रहा है, उस तरह अगर आज से कोई कमाई न भी हो तो आपकी सात पीढ़ियां खा सकती हैं।’

सेठ जी चौंक पड़े। पूछा, ‘तब आठवीं पीढ़ी का क्या होगा?’ सेठ जी सोचने लगे और तनाव में आ गए। फिर बीमार रहने लगे। बहुत इलाज कराया मगर कुछ फर्क नहीं पड़ा।

एक दिन सेठ जी का एक दोस्त हालचाल पूछने आया। सेठजी बोले, ‘इतना कमाया फिर भी आठवीं पीढ़ी के लिए कुछ नहीं है। दोस्त बोला, ‘एक पंडित जी थोड़ी दूर पर रहते है अगर उन्हें सुबह को खाना खिलाएं तो आपका रोग ठीक हो जाएगा।’

अगले ही दिन सेठ जी भोजन लेकर पंडित जी के पास पहुंचे। पंडित जी ने आदर के साथ बैठाया। फिर अपनी पत्नी को आवाज दी, ‘सेठ जी खाना लेकर आए हैं।’

इस पर पंडित जी की पत्नी बोली, ‘खाना तो कोई दे गया है। पंडित जी ने कहा, ‘सेठ जी, आज का खाना तो कोई दे गया है। इसलिए आपका भोजन स्वीकार नहीं कर सकते। हमारा नियम है कि सुबह जो एक समय का खाना पहले दे जाए, हम उसे ही स्वीकार करते हैं। मुझे क्षमा करना।’

सेठ जी बोले, ‘क्या कल के लिए ले आऊं?’ पंडित जी बोले, ‘हम कल के लिए आज नहीं सोचते। कल आएगा, तो ईश्वर अपने आप भेज देगा।’

सेठ जी घर की ओर चल पड़े। रास्‍ते भर वह सोचते रहे कि कैसा आदमी है यह। इसे कल की बिल्कुल भी चिंता नहीं है और मैं अपनी आठवीं पीढ़ी को लेकर रो रहा हूं। उनकी आंखें खुल गईं। सेठ जी सारी चिंता छोड़कर सुख से रहने लगे।

In English

A prosperous Sethji used to live in a city. He used to work hard all day long One day he did not know what to ask, ‘Call your accountant’ and say, ‘Find out how much money we have and how long is it enough?’

After a few days, the accountant came to the account and said to Seth, ‘If you do not have any earnings from today, then you can eat up to seven generations.’

Seth was shocked. Asked, ‘Then what will happen to the eighth generation?’ Seth ji started thinking and tense. Then started to be sick There was a lot of treatment but there was no difference.

One day a friend of Seth Ji came to ask for mobility. Sethji said, ‘Even so, there is nothing for the eighth generation. The friend said, ‘A priest who lives a little far away if he eats food in the morning, then your disease will be cured.’

The next day, Seth Ji came to Pandit with food. Pandit ji sat with respect. Then he gave his wife a voice, ‘Seth has come with food.’

Panditji’s wife said, ‘The food has been given to someone. Pandit ji said, ‘Seth ji, today’s food has been given to someone. Therefore, you can not accept your food. Our rule is that in the morning that one time meal is given first, we accept it only. apologize me.’

Seth said, ‘What will I bring for tomorrow?’ Pandit ji said, ‘We do not think today for tomorrow. Tomorrow will come, then God will send himself. ‘

Seth ji walked towards the house. Through the way he kept thinking that what a man is this It is not worried at all tomorrow and I am crying over my eighth generation. Their eyes were opened Seth Ji continued to live happily after leaving all anxiety

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