Wednesday , 12 July 2017
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जब गुरु नानक ने दी अनमोल सीख जिसे धनवान ताउम्र भूल न सका

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जब गुरु नानक ने दी अनमोल सीख जिसे धनवान ताउम्र भूल न सका

जब गुरु नानक ने दी अनमोल सीख जिसे धनवान ताउम्र भूल न सका

एक बार गुरु नानक यात्रा करते हुए थक गए। वे एक गरीब दलित बढ़ई के घर में विश्राम के लिए रुके। उन्हें उसका व्यवहार पसंद आया और वे दो हफ्तों के लिए उसके घर में ठहर गए।

यह देखकर गांव के लोग कहने लगे कि नानक ऊंची जाति के हैं, उन्हें नीची जाति के व्यक्ति के साथ नहीं रहना चाहिए। यह उचित ठीक नहीं है।

एक दिन उस गांव के एक धनी जमींदार मलिक ने बड़े भोज का आयोजन किया और उसमें सभी जातियों के लोगों को खाने पर बुलाया। गुरु नानक का एक ब्राह्मण मित्र उनके पास आया और उन्हें भोज के बारे में बताया।

उसने नानक से भोज में चलने का आग्रह किया। लेकिन नानक जातिव्यवस्था में विश्वास नहीं करते थे इसलिए उन्होंने भोज में जाने को मना कर दिया। उनकी दृष्टि में सभी मानव समान थे। वे बोले कि मैं तो किसी भी जाति में नहीं आता, मुझे क्यों आमंत्रित किया गया है?

ब्राह्मण बोला अब मैं समझा कि लोग आपको अधर्मी क्यों कहते हैं। लेकिन यदि आप भोज में नहीं जाएंगे तो मलिक जमींदार को अच्छा नहीं लगेगा। नानक भोज में नहीं गए।

बाद में मलिक ने उनसे मिलने पर पूछा कि आपने मेरे भोज के निमंत्रण को किसलिए ठुकरा दिया?

तब गुरू नानक ने उत्तर दिया कि मुझे स्वादिष्ट भोजन की कोई लालसा नहीं है, यदि तुम्हारे भोज में मेरे न आने के कारण तुम्हें दुःख पहुंचा है तो मैं तुम्हारे घर में भोजन करूंगा।

लेकिन मलिक फिर भी खुश न हुआ। उसने नानक की जातिव्यवस्था न मानने और दलित के घर में रुकने की निंदा की।

नानक शांत खड़े यह सुन रहे थे। उनहोंने मलिक से कहा कि अपने भोज में यदि कुछ बच गया हो तो ले आओ, मैं उसे खाने के लिए तैयार हूं।

नानक ने मलिक द्वारा लगाई गई थाली से एक-एक रोटी उठा ली। उन्होंने सबसे पहले दलित की रोटी को अपनी मुठ्ठी में रखकर दबाई तो उनकी मुठ्ठी से दूध की धार बह निकली। फ़िर नानक ने मलिक की रोटी को मुठ्ठी में दबाया तो खून की धार बह निकली। यह देखकर धनी व्यक्ति भावविभोर हो गया और वह यह सीख ताउम्र नहीं भूल सका।

In English

Once Guru Nanak was tired of traveling. They stayed for a poor dalit carpenter’s house to rest. He liked his behavior and he stayed in his house for two weeks.

Seeing this, the people of the village started saying that Nanak is of the upper caste, he should not stay with the lower caste person. It’s not fair enough.

One day a wealthy landlord Malik organized a big banquet and invited people from all the tribes to dinner. A Brahmin friend of Guru Nanak came to him and told him about the banquet.

He urged Nanak to walk in the banquet. But Nanak did not believe in caste system, so he refused to go to the banquet. In their view, all human beings were equal. They said that I do not come in any caste, why have I been invited?

Speaking of Brahmin Now I understand why people call you unrighteous. But if you do not go to the feast then Malik Zamindar will not like it. Nanak did not go to the banquet.

Later, when Malik met him, he asked, “Why did you reject the invitation for my banquet?”

Then Guru Nanak replied that I have no craving for delicious food, if you have been hurt because of not coming to me at your dinner then I will eat in your house.

But Malik was not happy even then. He condemned the caste system of Nanak and stayed in Dalit’s house.

Nanak was standing quiet listening to it. They told Malik that if there is anything left on your lunch then bring it, I am ready to eat it.

Nanak picked up one roti from the plate imposed by Malik. He first suppressed the dalit’s bread in his hand and then pressed the flow of milk with his hand. Then Nanak dumped Malik’s bread in his hand, then the blood stream blew. Seeing this, the wealthy person became very impatient and he could not forget the lesson he

 

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