Thursday , 15 June 2017
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जब युवा कबीर ने बताई गंगा जल की शुद्धता

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वाराणसी की एक तंग गली में एक ब्राह्मण बीमारी की अवस्था में शय्या पर पड़ा था। युवा कबीर गंगा स्नान के लिए जा रहे थे। ब्राह्मण की दशा देखकर उसके पास पहुंचे। उन्होंने कहा, ‘मेरे लायक कोई सेवा हो तो जरूर बताइगा।’

तब ब्राह्मण ने कहा, ‘बेटा मेरा अंत समीप है। मैं अकेला हूं। जीवन के अंतिम समय में थोड़ा गंगा जल पीना चाहता हूं। तुम गंगा स्नान के लिए जा रहे हो, तो थोड़ा सा गंगा जल लेते आना। कबीर यह सुनकर जल्द ही गंगा नदी के किनारे पहुंचे। स्नान किया और लोटे में गंगा जल लेकर वहां पहुंचे। और उन्होंने आग्रह किया लीजिए पंडित जी गंगा जल, इसे पी लीजिए।

 

तब बीमार ब्राह्मण ने कहा, ‘अरे बेटा तुम तो अपने लोटे में ही गंगा जल ले आए। क्योंकि तुम मध्यमवर्गीय जुलाहे के बेटे हो। तुम्हारा यह जल पीकर तो मैं अपवित्र हो जाउंगा। तब कबीर बोले, ‘माननीय पंडित जी, जब आपको गंगाजल पर इतनी श्रद्धा इतना विश्वास भी नहीं है कि वह एक लोटे को पवित्र कर सके तो फिर गंगाजल आपको मुक्ति नही दे पाएगा।’

यह सुनकर ब्राह्मण बोला, ‘कबीर तुम्हारे इन वाक्यों ने मेरे ज्ञान चक्षु खोल दिए हैं। अब तुम अपने हाथों से ही गंगाजल पिलाओं। इस तरह कबीर के हाथ से गंगाजल पीकर ब्राह्मण ने प्राण त्याग दिए।’

In English

In a narrow street of Varanasi, a Brahmin was lying on the bed in a state of sickness. Young Kabir Ganga were going to the bath. Seeing the condition of the Brahmin, he came to him. He said, ‘I will definitely tell if there is any service to me.’

Then Brahmin said, ‘Son, my end is near. I am alone I want to drink some Ganga water in the last time of life. If you are going for the Ganges bath, then take a little Ganga water. Kabir heard this soon after reaching the bank of river Ganga. After bathing and taking the Ganges water in Lotte, they arrived there. And they urged Pandit ji ganga water, drink it, drink it.

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Then the sick Brahmin said, ‘O Son, you have brought Ganga water in your lot only. Because you are the son of middle-class julai. If I drink this water, then I will become impure. Then Kabir said, ‘Hon’ble Pandit, when you do not believe so much faith on Gangajal that he can sanctify a lot then Gangajal will not be able to give you salvation.’

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After hearing this, Brahmin said, ‘Kabir, your these words have opened my eyesight. Now you have ganga water piglets from your hands In this way, the Brahmins gave up their life after drinking the Ganges water from Kabir’s hands. ‘

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